जिस दिन लालू यादव का जन्मदिन, उसी दिन झारखण्ड से राष्ट्रीय जनता दल सदा के लिए समाप्त

एक समय था, लालू यादव का मतलब एकीकृत बिहार में जनता दल, बाद में हुआ राष्ट्रीय जनता दल। सारे के सारे समाजवादी विचारधारा के नेता लालू यादव को अपना नेता मानते थे, पर अचानक ऐसा भी वक्त आया है कि अब लोगों को लालू प्रसाद से विरक्ति होती जा रही है, लोग उन्हें छोड़कर ऐसे दल को अपना ठिकाना बनाते जा रहे हैं, जिसे वे दिन-रात कोसते नजर आते थे, अचानक लालू यादव से हुआ मोहभंग अब सब कुछ बता रहा है कि वर्तमान बिहार में लालू कुछ इलाकों में भले ही नजर आ जाये, पर झारखण्ड में अब राजद को झंडा ढोनेवाला भी नहीं मिलेगा।

आज जिस प्रकार से समाचार आये है कि अभय कुमार सिंह को झारखण्ड राजद का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है, राजद के प्रति हमदर्दी रखनेवाले, उसके लिए जान लूटानेवालों को जैसे लगा कि हृदयाघात लग गया हो। राजद के नेता बताते है कि उन्हें उस वक्त उतना झटका नहीं लगा, जिस दिन अन्नपूर्णा देवी ने पाला बदल लिया था या राजद के गिरिनाथ सिंह ने भाजपा में अपना ठिकाना ढूंढ लिया, आघात तो आज लगा जब उन्हें पता चला कि अभय कुमार सिंह को प्रदेश राजद का अध्यक्ष बना दिया गया।

राजद के समर्पित नेता कैलाश यादव तो साफ कहते है कि आज एक तरह से तय हो गया कि झारखण्ड में राजद का नैतिक पतन होना तय है, क्योंकि एक कुशल नेतृत्व, और संगठन को मजबूती प्रदान करनेवाला पिछड़े समाज का व्यक्ति गौतम सागर राणा को अचानक एकाएक अध्यक्ष पद से हटाना, पूरे प्रदेश में गलत संदेश दे गया, जो एक नकारात्मक राजनीतिक निर्णय का संकेत देता है।

कैलाश यादव की माने तो विगत ढाई महीने में लोकसभा चुनाव के दौरान राजद के शीर्ष नेताओं को अनदेखी कर प्रत्याशी चयन में राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा गलत निर्णय लेने के कारण ही पार्टी से अन्नपूर्णा देवी, गिरिनाथ सिंह, जनार्दन पासवान, मनोज भुइयां सहित कई नेताओं ने पार्टी को अलविदा कर दिया और अब अचानक ऐसा लिया गया निर्णय निश्चय ही पार्टी कार्यकर्ताओं को सोचने पर मजबूर करेगा कि ऐसे हालात में क्या किया जाय? राजद नेताओं का मानना है कि अभय सिंह के अध्यक्ष पद पर मनोनयन से राज्य में सारा का सारा राजनीतिक सामाजिक समीकरण ही सदा के लिए समाप्त हो जायेगा।

हालांकि इस स्थिति को लेकर आगामी 13 जून को रांची में गौतम सागर राणा के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है, जिसमें राज्य के सभी 24 जिलों के राजद नेता मौजूद रहेंगे, जिसमें सभी राजनीतिक पहलूओं पर विचार किया जायेगा, तभी और विस्तार से पता चलेगा कि राजद की वर्तमान स्थिति में महागठबंधन में उसका कद क्या रहेगा, पर राजनैतिक पंडित बताते है कि अब न तो 1990 के लालू है और न ही उनकी पार्टी और उनका नेतृत्व, इसलिए अब पार्टी को झारखण्ड में समाप्त ही समझिये।