भगवान से बने डाक्टर साहब, डाक्टर साहब से बने डाक्टर और अब डाक्टर से बन गये डा. यानी डाकू
दुनिया में कोई ऐसा पेशा नहीं, जिसमें शत प्रतिशत लोग ईमानदार हो, हर पेशे में अच्छे और बूरे दोनों लोग हैं, और इन्हीं से उस पेशे की पहचान हो जाती है, कई साल पहले जब डाक्टर का लोग नाम नहीं जानते थे, तो हमारे देश में डाक्टरों का स्थान वैद्यों ने ले रखा था, लोग अपनी ईलाज के लिए इनके पास जाते, और स्वस्थ हो जाते। विश्व की सर्वाधिक पुरानी चिकित्सा में आयुर्वेद का जन्मदाता भारत ही है।
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