मोतिहारी के भेलवाकोठी में गांधी की प्रतिमा का सरकलम, खुद को गांधीवादी बतानेवाले नीतीश इस घटना पर मौन

चंपारणवासी सनद रहे, यह गांधी जी की प्रतिमा का गर्दन नहीं कटा, बल्कि इसके द्वारा आपके चरित्र, स्वाभिमान और संस्कार की धज्जियां उड़ा दी गई, जिन असामाजिक तत्वों ने ऐसा किया है, उसने आपकी इज्जत की जमापूंजी पर डाका डाला हैं। ऐसे में आपकी जो सम्मानरुपी जमा पूंजी है, उस सम्मान को हर हाल में बरकरार रखना आप की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं।

क्योंकि इधर पूरे देश में कुछ असामाजिक तत्वों का मनोबल अचानक बढ़ा है, जो नहीं चाहते कि देश में अमन हो, शांति हो, भाईचारा हो, क्योंकि अमन, शांति और भाईचारे से इनकी हमेशा से नफरत रही है, ऐसे में हम सब का फर्ज बनता है कि गांधी के मूलभूत सिद्धांतों व विचार को हम किसी भी कीमत पर प्रभावित होने नहीं दे, आज जो पूर्वी चंपारण से जो खबर आई है, वह खबर विचलित करनेवाली है, क्योंकि असामाजिक तत्वों ने गांधी की प्रतिमा का सरकलम कर हम सब को एक प्रकार से चुनौती दे डाली है

स्थानीय प्रशासन इस पर अब तक जाने क्यों मौन हैं? वह भी तब जब हम गांधी की 150 वीं जयंती वर्ष में प्रवेश करनेवाले हैं। क्या अब चंपारण या बिहार में यही सब होगा, महापुरुषों की प्रतिमा का अपमान होगा, जिन्हें हम राष्ट्रपिता कहते हैं, उनकी प्रतिमा का सरकलम किया जायेगा, और वह भी तब जब आप हाल ही में चम्पारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष मना चुके हो।

चंपारण के वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार वर्मा ने आज अपने सोशल साइट फेसबुक पर जो चित्र डाली है और जो शब्द लिखे हैं, वो किसी भी व्यक्ति को मर्माहित कर देंगे। उन्होंने जो सूचना दी है, वह हैरान कर देनेवाली हैं। उन्होंने एक चित्र दिया है, जिसमें साफ दिख रहा है कि महात्मा गांधी की प्रतिमा का सरकलम कर दिया गया है, जबकि उन्हीं के बगल में कस्तूरबा गांधी की प्रतिमा सुरक्षित है। अशोक कुमार वर्मा बताते है कि यह प्रतिमा जिसका सरकलम किया गया है, वह चंपारण के भेलवाकोठी की है, जिसे हाल ही में चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष में स्थापित किया गया था।

लोग बताते है कि जिस दिन यह प्रतिमा स्थापित की गई थी, उसी समय से इस प्रतिमा पर कुछ लोगों की कुदृष्टि थी, अचानक कुछ दिनों के बाद गांधी जी की प्रतिमा के कान को कुछ असामाजिक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया और अब तो उनकी प्रतिमा का सर ही गायब है, आखिर किसने इस कुकर्म को किया? उस कुकर्मी को ढूंढ निकालने का काम किसका है?

गांधी के सिद्धांतों व विचारों को बार-बार जन-जन तक पहुंचाने की बात करनेवाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बताएं कि उनके राज्य में वह कौन असामाजिक तत्व है, जो इस प्रकार की हरकत कर आराम से घुम रहा है और पुलिस उस तक पहुंच नहीं पाती। नीतीश कुमार खुद बताये कि आखिर देश व बिहार गांधी के सिद्धांतों पर चलेगा या नये-नये पैदा हुए गांधी विरोधियों के सिद्धांतों पर।

चंपारण के लोगों और गांधीवादियों को भी इस पर मुखर होना होगा, उन्हें खुद सोचना होगा कि जिस गांधी ने चम्पारण को अपना कर्मभूमि बनाया, जिन्होंने उनके पूर्वजों के लिए लडाइयां लड़ी, जेल गये, क्या उनकी प्रतिमा के साथ अनादर सही है, क्या इस कांड पर चुप बैठना जायज है, क्या उन्हें इस कांड को लेकर अपना विरोध दर्ज नहीं करना चाहिए, क्या नीतीश सरकार से यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि आखिर इस कांड को करनेवाले लोग जेल के सलाखों के पीछे कब होंगे?