दलबदलू नेता, दलबदलू ही न रहेगा, वो थोड़े ही गांधी, नेहरु, शास्त्री बनने के लिए दुनिया में पैदा लिया है
बेशक दल बदलिये, दलबदलू कहाइये, पर अपना दीदा मत खोइये, किसी दल के नेता को इतना भी पहले मत गरिया दीजिये कि फिर जब आपको उस दल में जाने की नौबत आये तो आपकी ही इज्जत खतरे में पड़ जाये और आप मुंह चोर के जैसा जिस पार्टी में गये, उस पार्टी के और जिस पार्टी को छोड़े हैं, उस पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी आप मुंह लुकाते फिरिये, क्योंकि कार्यकर्ता तो कार्यकर्ता होता हैं, वह तो आप जैसा नेता तो होता नहीं,
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