मां का दरबार और उद्घाटन करेंगे नेता-अधिकारी, जो मां के भक्तों का सुख-चैन ही लूट लेते हैं
कमाल है दुर्गा पूजा उत्सव चरम पर हैं, और मस्त हैं वे नेता व अधिकारी जो इस दुर्गा पूजा में भी स्वयं को भगवान को चुनौती देने से बाज नहीं आये, कहने को तो वे यह भी कह सकते हैं कि वे करें तो क्या करें, हम थोड़े ही खुद जाते हैं, पंडालों का उद्घाटन करने। अरे हमें पूजा समितियां बुलाती हैं, तो चले जाते हैं। बात भी सही हैं, पर यहीं समितियां अगर इन्हें कूएं में कूदने के लिए कहेंगी तो क्या ये कूएं में कूद जायेंगे, नहीं न।
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