भाई वाह, गोला का आदमी बरहेट का MLA न बने, पर छत्तीसगढ़ का आदमी झारखण्ड का CM जरुर बने

भाई, मैं तो डंके की चोट पर कहता हूं कि आज तक ऐसा होनहार व्यक्ति झारखण्ड का मुख्यमंत्री कभी नहीं बना, जितनी बुद्धि इनके पास हैं, आज तक किसी मुख्यमंत्री को नहीं हुई, तभी तो जो काम देश के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री ने नहीं किया, वो इन्होंने किया, इन्होंने रांची में शंघाई टावर बनाने की सोची, अरे सोचा तो सोचा, झारखण्ड में हाथी तक उड़ा दिया, ऐसा होनहार मुख्यमंत्री हमें अब कहां से मिलेगा?

भाई, मैं तो डंके की चोट पर कहता हूं कि आज तक ऐसा होनहार व्यक्ति झारखण्ड का मुख्यमंत्री कभी नहीं बना, जितनी बुद्धि इनके पास हैं, आज तक किसी मुख्यमंत्री को नहीं हुई, तभी तो जो काम देश के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री ने नहीं किया, वो इन्होंने किया, इन्होंने रांची में शंघाई टावर बनाने की सोची, अरे सोचा तो सोचा, झारखण्ड में हाथी तक उड़ा दिया, ऐसा होनहार मुख्यमंत्री हमें अब कहां से मिलेगा?

हम तो चाहेंगे कि यह व्यक्ति जब तक जीवित रहे, राज्य का मुख्यमंत्री बना रहे। यह हाथी उड़ाता रहे और हम बड़े प्रेम से हाथी उड़ानेवाले मुख्यमंत्री को जी भरकर देखते रहे। हम तो कहेंगे कि मुख्यमंत्री जी को चाहिए कि, अपने पर्यटन विभाग को वो कहे कि वो एक विज्ञापन निकाले और उस विज्ञापन के माध्यम से लोगों को झारखण्ड बुलाएं और अपनी प्रतिभा दिखाएं।

विज्ञापन में लिखा होना चाहिए “हाथी उडानेवाला सीएम देखने के लिए झारखण्ड पधारें।” इससे दो फायदे होंगे, झारखण्ड को भारी मात्रा में राजस्व भी प्राप्त होगा, और लोग हाथी उड़ानेवाले सीएम को देखने के लिए झारखण्ड भी आयेंगे, इससे रघुवर दास का सम्मान और बढ़ेगा।

भाई, ये जनाब, 19 अक्टूबर को बरहेट में थे, इन्होंने अपने स्वभावानुसार जनता को समझाया, और कहा गोला का नहीं, स्थानीय को बनाये बरहेट का विधायक, यानी इनका इशारा फिलहाल बरहेट का नेतृत्व कर रहे झामुमो के वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन की ओर था, अब सवाल उठता है कि जिस व्यक्ति का पूरा खानदान ही इस मिट्टी से जुड़ा हैं, जिनके पिता झारखण्ड आंदोलनकारियों के प्राण कहे जाते हैं, उस व्यक्ति के लिए यह बयान कहां तक शोभनीय हैं, और वह भी ऐसे व्यक्ति के मुख से जिसका पूरा परिवार छत्तीसगढ़ से आकर यहां बसा है।

कमाल है, इनके टूकड़ों पर बिकनेवाले अखबार व चैनल तो कुछ बोलेंगे नहीं, क्योंकि वे पतिव्रत धर्म का पालन करेंगे, लेकिन जो सही लोग हैं, वे तो बोलेंगे ही पूछेंगे ही, कि मुख्यमंत्री रघुवर दास जी, आपके इस बोल का अभिप्राय या आधार क्या हैं और आप किस हैसियत से बोल रहे हैं, क्या आपको यह संवाद बोलने का अधिकार हैं? वह भी उस व्यक्ति के लिए जिसका रक्त का एक-एक बूंद झारखण्ड से जुड़ा है।

भाई, हमें मालूम है कि आप भाजपाइयों ने मर्यादा और चरित्र का कब का श्राद्ध कर दिया हैं, इसलिए आपको कुछ भी आइना दिखाया जाय, आप सुधरनेवाले ही नहीं, आप तो विधानसभा में जब नेता प्रतिपक्ष को गाली से नवाज सकते हैं, जब आप एक समुदाय विशेष को गढ़वा में बेइज्जत कर सकते हैं, तो इस चुनाव में आप क्या करेंगे, सबको पता हैं।

एक समय था, जब वाजपेयी-आडवाणी का युग था, न तो दिल्ली में भाजपा का शासन था और न ही राज्यों में भाजपा कही दिखाई पड़ती थी, एक नारा चलता था – राम राज्य की ओर चले, भाजपा के साथ चले। आपने इस नारा को कितना सार्थक किया हैं, वो तो आपके तेवर, आपके बुद्धि-कौशल और आपके अंदर छुपे नैतिक बल को देखकर पता चल जाता हैं।

आपने जैसे सत्ता संभालते ही अनैतिक तरीके से जिस प्रकार सुदेश महतो की पार्टी को सबक सिखाने के लिए झाविमो के दलबदलूओं को अपनी पार्टी में मिलाया, और जिस प्रकार आधुनिक अखबारों/चैनलों के मालिकों/संपादकों को कागज के टूकड़े दिखाकर उनकी जमीर खरीद ली, उसी से पता लग जाता हैं कि आप कुछ भी कर सकते हैं, सत्ता पाने के लिए वो हर काम कर सकते हैं, जो विपक्ष आज तक नहीं किया, और हमें लगता है कि जितना आप गिरे हैं, उतना वो नहीं ही गिरेगा, और गिरेगा भी तो, हम यहीं कहेंगे कि सिखाया आप ने ही हैं।

Krishna Bihari Mishra

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