हरियाणा-महाराष्ट्र चुनाव परिणाम के बाद भाजपा का दामन थामे दलबदलूओं के मुंह लटके, बढ़ी धड़कन

झारखण्ड के दागियों व दलबदलूओं की नींद उड़ी हुई हैं, साथ ही दिल की धड़कनें भी बढ़ गई हैं, उन्हें लगता था कि दल, बदल देने से उनकी अपने इलाकों में जीत की संभावना शत प्रतिशत बढ़ गई हैं, उनका आगे का राजनीतिक जीवन सुरक्षित हो गया हैं, पर नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन की मानें तो इन सारे दलबदलूओं-दागियों ने सही मायनों में राजनीतिक आत्महत्या कर ली हैं,

झारखण्ड के दागियों व दलबदलूओं की नींद उड़ी हुई हैं, साथ ही दिल की धड़कनें भी बढ़ गई हैं, उन्हें लगता था कि दल, बदल देने से उनकी अपने इलाकों में जीत की संभावना शत प्रतिशत बढ़ गई हैं, उनका आगे का राजनीतिक जीवन सुरक्षित हो गया हैं, पर नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन की मानें तो इन सारे दलबदलूओं-दागियों ने सही मायनों में राजनीतिक आत्महत्या कर ली हैं, और जो महाराष्ट्र-हरियाणा की जनता ने ऐसे लोगों को सबक सिखाई, वह नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन की बातों को पुष्ट कर देती हैं।

महाराष्ट्र व हरियाणा में भी बड़े पैमाने पर दलबदलूओं ने पाला बदला था, और वहां की जनता ने उन्हें बहुत अच्छे ढंग से सबक ही नहीं सिखाया, बल्कि भाजपा को जो जीत 2014 में मिली थी, उससे भी भाजपा को दूर रखा, जो भाजपा में ही चिन्तन का विषय हो गया और भाजपा में इस बात पर माथापच्ची चल रही हैं कि अगर हरियाणा और महाराष्ट्र की तरह झारखण्ड में भी यहीं हाल हो गया, तो फिर गोड्डा में चल रहे उन परियोजनाओं का क्या होगा, जो बड़े-बड़े भाजपा के पूंजीपति झारखण्ड में निष्कंटक अपना राज्य चला रहे हैं, आर्थिक मजे ले रहे हैं, उनका क्या होगा? इसलिए आजकल भाजपा फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं, वो कहते हैं न भाजपा का हाल उस लोकोक्ति की तरह हो गया कि दूध का जला मट्ठा फूंक-फूंक कर पीता है।

अब तो भाजपा के ही कई नेता दबी जबान से कहने लगे है कि जो लोग दूसरी पार्टी से भाजपा में आये हैं, उन्हें भाजपा का टिकट मिल ही जायेगा, इसकी कोई गारंटी भी नहीं। झामुमो से उछलकर भाजपा का दामन पकड़े मांडू के विधायक जे पी पटेल से एक पत्रकार ने पूछा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा का यह कहना है कि टिकट मिलने का दावा किसी से उन्होंने नहीं किया हैं, तो उस वक्त जे पी पटेल का चेहरा देखनेलायक था, जिसका प्रमाण विद्रोही24.कॉम के पास मौजूद हैं, जे पी पटेल उस वक्त उक्त पत्रकार से कह रहे है कि उनकी बात अमित शाह से हुई थी, उनको ही मांडू से भाजपा का टिकट मिलेगा, लक्ष्मण गिलुवा से इस संदर्भ में बात ही नहीं हुई तो वे इस पर कैसे बयान दे सकते हैं?

यही हाल झामुमो में रहकर अपनी राजनीतिक पहचान बनानेवाले कुणाल षाड़ंगी का हैं, वे फिलहाल विभिन्न पोर्टलों व चैनलों में अपने स्वभावानुसार चेहरा चमका रहे हैं, पर ये चेहरा चमकाने की आदत भाजपा उन्हें बराबर देती रहेगी, इसकी संभावना कम हैं, भाजपा में रह रहे लोगों का कहना है कि यहां चेहरा चमकानेवालों की कमी हैं क्या? जो उन्हें मौका दिया जायेगा? अरे अभी-अभी भाजपा में आये हैं, थोड़ा कसरत कर लें, चुनाव की अधिसूचना जारी होगी, टिकट मिल भी जायेगा तो वे जीत ही जायेंगें, इसकी संभावना पर भी तो विचार होना हैं।

यही हाल कांग्रेस के सुखदेव भगत और मनोज यादव का हैं, मनोज यादव इस बार भाजपा से चुनाव जीत ही जायेंगे, इसकी संभावना कम ही दिख रही हैं, क्योंकि मनोज यादव के पार्टी में शामिल होने से, वहां भाजपा में कोहराम मचा हैं, और उस इलाके के भाजपा कार्यकर्ता उन्हें सबक सिखाने को तैयार बैठे हैं, उस इलाके के राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यहां के भाजपा कार्यकर्ता मनोज यादव के झोले ढोने को तैयार नहीं हैं। सुखदेव भगत के बारे में राजनीतिक पंडितों का कहना है कि कांग्रेस में जो सम्मान सुखदेव भगत को मिला, वो उन्हें भाजपा में न आज मिला हैं और न भविष्य में मिलेगा, वे देर-सबेर कांग्रेस में आयेंगे ही, क्योंकि उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं, क्योंकि पूर्व में भी कई लोग जब उनके दिलों में भाजपा प्रेम अचानक हिलोड़े मारने लगा था, तो भाजपा में शामिल हुए थे, वे भी फिर बाद में सही जगह पहुंच गये हैं. जैसे – गौतम सागर राणा का नाम आप ले सकते हैं।

इधर राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अभी तो जो लोग झाविमो को छोड़कर पांच साल पहले भाजपा में गये थे, वे ही जीत पायेंगे या नहीं, उसकी संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आती, क्योंकि ऐसे विधायकों से उनके इलाके के लोग ज्यादा खफा हैं, और वे किसी भी प्रकार से उनके समर्थन में आते नहीं दिख रहे, इन विधायकों में तो कई ने तो भाजपा के ही शीर्ष नेताओं के खिलाफ ऐसे-ऐसे बयान दिये हैं कि भाजपा अगर ऐसे लोगों को टिकट देती हैं, तो भाजपा के लिए ही डूब मरने की बात होगी।

पर भाजपा अब वो पहले वाली नहीं रही, अब तो मोदी-शाह-रघुवर की पार्टी हैं, तीनों सजातीय, तीनों की सोच एक, चाहे जैसे भी हो, जीते तो सिर्फ भाजपा ही, ऐसे में इनसे राजनीतिक शुचिता एवं शुद्धता की बात करना ही बेमानी हैं, अब तो झारखण्ड की जनता ही बतायेगी कि उसे भाजपा के अंदर चल रही राजनीतिक चरित्रहीनता पर मुहर लगानी हैं, या चुनाव परिणाम के माध्यम से भाजपा को यह संदेश देना है कि उसे राजनीतिक चरित्रहीनता मजूंर नहीं, उसे अब झारखण्ड हित में शुद्ध राजनीति की आवश्यकता हैं और अगर ऐसा होता हैं तो भाजपा कितने सीट प्राप्त करेगी, भाजपा को अभी से ही विचार कर लेना चाहिए।

राजनीतिक पंडित तो आज भी कहते हैं कि रघुवर दास को पांच साल तक झारखण्ड के मुख्यमंत्री पद पर बैठाएं रखना, भाजपा के लिए ही सिरदर्द साबित होगा। राजनीतिक पंडित तो यह भी कहते है कि जो लोग जन-आशीर्वाद यात्रा के दौरान टिकट की लालच में भीड़ इकट्ठे किये या भीड़ लाएं, उसे देखकर कोई यह सोच रहा है कि भाजपा 65 पार कर जायेगी तो वह समझ लें कि जब हरियाणा भाजपा में 75 पार के नारे में, 40 पर आकर अटक सकती हैं तो झारखण्ड में भाजपा 65 में 30 पर आकर क्यों नहीं अटक सकती, और जब ऐसा हुआ तो राज्य में बागडोर किसकी होगी? समझते रहिये…

Krishna Bihari Mishra

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