अगर करीमन, मियां न होकर दलित हिन्दू होता और कोई ब्राह्मण उसके शव को श्मशान में जलने नहीं देता, तो क्या होता?
अगर करीमन मियां, मियां न होकर दलित हिन्दू होता और कोई ब्राह्मण उसके शव को श्मशान में जलने नहीं देता, तो फिर क्या होता? निश्चय ही उस वक्त पूरे देश में आग लग जाती, पूरे ब्राह्मण समुदाय को लोग हिला कर रख देते, एनडीटीवी ही नहीं बल्कि पूरे चैनलों में ये खबर सुर्खियों में होती, कई सप्ताह तक इस पर विशेष चर्चाएं होती, अखबार वाले उस ब्राह्मण का जीना मुहाल कर देते, संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज होती, और वह ब्राह्मण जेल की सलाखों में होता।
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