एक ओर भारत-चीन सीमा पर डोका ला में चीन ने अपनी गिद्ध दृष्टि रखकर, उसे अपना इलाका मानकर कब्जा जमाने को आतुर है, वहां अवैध निर्माण करा रहा है, उसकी सरकारी एजेंसियां ग्लोबल टाइम्स भारत के खिलाफ अनाप-शनाप बक रहा है, भारत को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है।

लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के बाद देश में तीसरी बार कोई प्रधानमंत्री बना है, जिसका नाम है – नरेन्द्र मोदी। जिसने देश की सेना का मनोबल बढ़ाया और उस सेना ने भारत चीन और भूटान की सीमा डोका –ला में चीन द्वारा कराये जा रहे सड़क निर्माण का विरोध ही नहीं किया, बल्कि एक महीने से उस पर रोक लगा रखी है

याद करिये, फरवरी 2011, केन्द्र में यूपीए की सरकार, संसद में मुलायम सिंह यादव राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपना पक्ष सदन में रख रहे है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव कांग्रेसनीत गठबंधन सरकार को आगाह कर रहे है कि वे अपनी आदत तत्काल सुधारे और देश की जो स्थिति है,

जरा सोचिये, अगर नीतीश ने जीएसटी का विरोध कर दिया होता तो क्या होता… तो फिर क्या पत्रकार से नेता बने हरिवंश वहीं लिखते, जो उन्होंने दैनिक भास्कर के 2 जुलाई के अंक में लिखा। उत्तर होगा – एकदम नहीं। सबसे पहले हम आपको बता दें कि हरिवंश वर्तमान में, जदयू सांसद है।

वाह रे अधिकारी, वाह रे झारखण्ड का आइपीआरडी, वाह रे मुख्यमंत्री का विभाग, वाह रे विज्ञापन बनानेवाले और वाह रे विज्ञापन प्रकाशित करनेवाले नमूने…
झारखण्ड सरकार ने विगत 13 जून को कैबिनेट से पास कर दिया कि मात्र एक रुपये में 50 लाख तक की संपत्ति की रजिस्ट्री राज्य की महिलाएं अपने नाम करा सकती है, इस दस्तावेज पर निबंधन शुल्क भी देय नहीं होगा। संपत्ति का मूल्य 50 लाख से अधिक होने पर उपरोक्त राशि पर मुद्रांक व निबंधन शुल्क लगेगा। महिला-पुरुष के संयुक्त क्रेता होने पर छूट मान्य नहीं होगी। एक बार की खरीद पर ही यह छूट महिलाओं को प्राप्त होगी।

1 जुलाई से पूरे देश में जीएसटी लागू होने जा रहा है, इसकी पूरी तैयारियां कर ली गयी है, पूरे ताम-झाम के साथ संसद के केन्द्रीय हॉल में एक समारोह आयोजित कर आज संसद में आधी रात को जीएसटी का घंटा बजेगा और फिर पूरे देश में एक प्रकार का कर-प्रणाली लागू हो जायेगा।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर बता दिया कि वे चाहे किसी के भी समर्थन से सरकार क्यों न चला रहे हो? पर जहां तक नीति और सिद्धांत की बात है, वे किसी से नीति और सिद्धांत को उधार नहीं लेंगे, उनकी अपनी नीति है, उस पर चलते रहेंगे, चाहे उसके कुछ भी परिणाम क्यों न निकल जाये?

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