हेमन्त ने रघुवर को सत्ता से बाहर क्या किया, निशिकांत जैसे भाजपाई नेताओं को दिव्य ज्ञान की अनुभूति होने लगी

कमाल हो गया, इधर झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रघुवर दास को सत्ता से बाहर क्या किया? निशिकांत दूबे जैसे भाजपाई नेताओं को दिव्य ज्ञान होने लगी, कल तक जिन्हें रघुवर दास में दिव्यता नजर आती थी, वे भी उनमें दोष ढूंढने लगे, और खूलेआम जनता के बीच उन पर आरोप भी मढ़ने लगे। ये वो नेता हैं, जो कल तक चुनावी सभा में कहा करते थे, कि भाजपा अगर चोर, उचक्कों को भी टिकट दे दें तो आप उसे जीता दिजिये और आज वे अपने ही नेता तथा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को कटघरे में खड़े कर रहे हैं।

भाई, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के नेता व राज्य के नये मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को इस बात की दाद देनी पड़ेगी कि उन्होंने निशिकांत दूबे जैसे नेताओं को बहुत ही जल्दी दिव्य ज्ञान की अनुभूति करा दी, नहीं तो ये बेचारे अभी भी रघुवर भक्ति में पड़े रहते। आखिर निशिकांत दूबे ने कहा क्या? निशिकांत दूबे ने हाल ही में वासुकिनाथ स्थित वासुकिनाथ मंदिर के गर्भगृह में पुरोहित सुमित की मौत पर कहा था कि पूर्व सीएम रघुवर दास की अनदेखी के कारण ऐसी घटना घट गई।

निशिकांत दूबे का कहना था कि  यहां देवघर-वासुकिनाथ श्राइन बोर्ड बना हुआ है, जिसके अध्यक्ष और कोई नहीं स्वयं मुख्यमंत्री होते हैं, देवघर और वासुकिनाथ में आधारभूत संरचना से लेकर सारी सुविधाओं के लिए योजना बनाने और उसे लागू करने का काम मुख्यमंत्री का होता है, पर पिछले तीन सालों से यहां कुछ भी नहीं हुआ।

वर्ष में एक बार श्राइन बोर्ड की बैठक होती भी हैं तो उसमें सिर्फ खानापूर्ति की जाती है,  वासुकिनाथ में बिजली की समस्या पूर्व में थी, यहां करंट से हादसे की बात बार-बार की जा रही थी, उसके बावजूद न तो इस पर किसी ने ध्यान दिया और न ही कोई कार्रवाई की, और इसी बीच इतनी बड़ी घटना का घट जाना, बताता है कि इसके लिए जिम्मेवार कौन है?

निशिकांत दूबे का कहना था कि देवघर में क्यू कॉम्पलेक्स का केवल फेज वन का काम हुआ, वह भी केन्द्र के पैसे से, केन्द्र ने इसके लिए 40 करोड़ रुपये दिये, पर राज्य ने एक पैसे नहीं दिये, देवघर का फुट ओवर ब्रिज हिल रहा है, पर कोई ध्यान नहीं। अब सवाल उठता हैं तो क्या राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास देवघर और वासुकिनाथ आनेवाले तीर्थयात्रियों को केवल एलइडी और होर्डिंग के माध्यम से उल्लू बनाने का काम करते रहे और लोग भगवान भरोसे इन तीर्थस्थलों पर तीर्थ का आनन्द लेते रहे।

अगर ये हादसा श्रावण के महीने में होता तो कितने लोग मरते, ये तो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को बताना ही चाहिए। राज्य के नये मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को चाहिए कि वे इस ओर विशेष ध्यान दे, क्योंकि ये ऐसा स्थल है, जहां हमेशा लोगों का आना लगा रहता है, कोई बड़ा हादसा न हो, इसके लिए जितनी जल्दी हो, विशेष ध्यान यहां देना चाहिए।