Author: Krishna Bihari Mishra

राजनीति

बेटा हो तो तेज प्रताप जैसा, जो पीएम की खाल उधेड़ देने तक की ताकत रखता है

एक लोकोक्ति है – बापे पुत परापत घोड़ा, बहुत नहीं तो थोड़ा-थोड़ा। कभी अपने समय में पूरे बिहार को हिलाकर रखनेवाले और अपने प्रतिद्वंदियों को धौंस दिखाने में माहिर लालू प्रसाद के बेटे तेज प्रताप यादव ने एक नया बयान दिया है। सोमवार को विधानसभा परिसर में पत्रकारों से उन्होंने कहा कि ‘अगर मेरे पिता को कुछ होता है, तो मैं पीएम की खाल उधेड़ दूंगा।‘

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अपनी बात

सड़क जाम – सीएम के इमेज को नष्ट करने की कहीं कोई सुनियोजित साजिश तो नहीं

रांची का अरगोरा चौक, दिन के 10 बजे, जहां जाम होने का सवाल ही नहीं उठता और वहां सड़क जाम हो जाय, ये बात कुछ पचती नहीं, जहां जाम होना चाहिए जैसे कर्बला चौक और वहां से गाड़ियां बिना किसी दिक्कत के आराम से निकलती चली जाये, ये भी बात कुछ पचती नहीं। सीएम का काफिला, एक नहीं, कई बार सड़क जाम में फंस जाये, ये बात कुछ पचती नहीं। आज हम जान-बूझकर दो से तीन बार रांची की सड़कों पर निकले,

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राजनीति

CM के PRO अजय नाथ झा ने नहीं दिया विभागीय कारण बताओ नोटिस का जवाब

तो क्या मुख्यमंत्री के पीआरओ अजय नाथ झा ने बिना सीएम के बोले ही न्यूज बना दिया था? क्या कोई भी पीआरओ सीएम का झूठा वक्तव्य, जो सीएम ने दिये नहीं हो, अखबारों में प्रकाशित करा सकता हैं?  ऐसी हरकत तो वहीं कर सकता है, जो सीएम का इमेज खराब करना चाहता हो। फिलहाल झारखण्ड में यहीं हो रहा हैं, यहीं कारण है कि मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुमार ने मुख्यमंत्री के पीआरओ अजय नाथ झा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

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अपनी बात

रांची प्रेस क्लब कोर कमेटी के मेंम्बरों की मनमानी के विरुद्ध मुकेश कल जायेंगे कोर्ट

रांची प्रेस क्लब की सदस्यता का विवाद थमता नहीं दीख रहा। राजनामा.कॉम के संपादक मुकेश भारतीय ने कहा है कि उन्होंने द रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष बलबीर दत्त तथा कोर कमेटी के सदस्य रजत कुमार गुप्ता को लिखित तौर पर सूचना दे दी है कि उन्हें रांची प्रेस क्लब का सदस्य न बनाकर उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित किया गया है, जो गलत है, ऐसे हालत में उनके पास अब एक ही विकल्प बचा है कि वे न्यायालय की शरण में जाये।

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अपनी बात

यहां पे सब जाम-जाम हैं, झारखण्ड के सीएम हैरान हैं, रांची की सड़क जाम-जाम हैं

जब घर में लगी आग, तो चलो आग बुझाने के लिए कुएँ खोदे। पूरी राजधानी की जनता सड़क जाम से तबाह है। सड़क जाम से मुक्ति पाने के लिए, प्रतिदिन नये-नये तरीके ईजाद हो रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। जब से मुख्यमंत्री स्वयं रोड जाम में फंसने लगे हैं, तो उनके अंदर दिव्यज्ञान का प्रार्दुभाव हुआ। प्रतिदिन सड़क जाम को लेकर बैठकों का जो दौर प्रारंभ हुआ।

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अपनी बात

गांव न हो गया बच्चा हो गया, जिसको देखो वह उसे गोद लेने की ही बात कर रहा

गांव न हो गया कि एक बच्चा हो गया, जिसको देखों वह गांव गोद लेने को कह रहा हैं। जी हां, एक बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सासंदों को एक – एक गांव गोद लेने को क्या कह दिया, अब सीएम रघुवर दास भी ये कहने लगे कि हर अधिकारी एक गांव को गोद ले लें। भाई, क्या अधिकारियों को अब कोई काम नहीं रह गया, अब वे एक गांव गोद लेंगे, तब जाकर गांव का विकास होगा?

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अपराध

कभी लालू प्रसाद की गिरफ्तारी में बाधक एक IAS पर कार्रवाई होगी भी या नहीं

दो दिन पूर्व राज्य के एक मंत्री धनबाद में थे। मंत्री के पहुंचते ही पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया। कभी लालू प्रसाद यादव की आंखों से नींद गायब कर देनेवाले तथा चारा घोटाला में शामिल अधिकारियों व नेताओं को एक-एक कर जनता के सामने नकाब उतारनेवाले उक्त मंत्री ने बयान दे डाला, कि आप पत्रकार तो  वह न्यूज छापेंगे नहीं, जो छापना चाहिए, फिर भी मैं कह देता हूं कि अगर हो सके तो मन बनाइये और इसे अखबारों में जगह दीजिये,

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अपनी बात

बिना फार्म भरे रांची प्रेस क्लब के सदस्य बन गये पद्मश्री बलबीर, शरण, हरिनारायण और नीलू

अगर कोई लड़का बिना मैट्रिक का फार्म भरे, मैट्रिक की परीक्षा पास कर जाये, तो आपको कैसा लगेगा? आप आश्चर्य अवश्य करेंगे, कि भला बिना मैट्रिक का फार्म भरें, कोई मैट्रिक की परीक्षा कैसे पास कर सकता है? ठीक उसी तरह जैसे बिना मैट्रिक का फार्म भरे, कोई लड़का मैट्रिक की परीक्षा पास नहीं कर सकता, वैसे ही कोई भी पत्रकार बिना सदस्यता फार्म भरे, किसी भी संस्थान का सदस्य कैसे बन सकता है?

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अपनी बात

जनाब झारखण्ड के CM दो बार सड़क जाम में क्या फंस गये, उन्हें दिव्य ज्ञान प्राप्त हो गया

कमाल है, जब अपने पर आई तो लगे बैठक करने, कानून का राज स्थापित करने, ट्रैफिककर्मियों को बर्खास्त करने और जब इन्हीं समस्याओं से जनता त्रस्त थी, तो इनको कोई लेना-देना नहीं था। झारखण्ड बनने के बाद कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों, यहां तक की नगर-विकास मंत्रालय तक संभाल चुके रघुवर दास, आज मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गये, पर जरा देखिये, इनके क्रियाकलापों को, इनको जनता की कोई फिक्र नहीं, फिक्र सिर्फ अपनी है।

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अपनी बात

बलबीर एंड कंपनी के हालत पस्त, ईंट से ईंट बजाने की तैयारी, रघुवर सरकार पर भी उठे सवाल

सूत्र बताते है कि चूंकि 881 सदस्यों में बलबीर एंड कंपनी के लोगों का नाम नहीं है, जिन्होंने सदस्यता हेतु आवेदन नहीं जमा किया, अब वे चाहते है कि बैकडोर से या नियमों में फेरबदल कर, सदस्यता प्राप्त कर लें, पर ऐसा संभव होता नहीं दीख रहा, क्योंकि जिन लोगों ने सदस्यता हेतु आंदोलन किया, और जिनकी बलबीर एंड कंपनी ने कभी सुनने का काम नहीं किया और न ही सम्मान दिया, अंतिम-अंतिम समय तक नाक रगड़वाने की कोशिश की।

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