राजनीति

बेटा हो तो तेज प्रताप जैसा, जो पीएम की खाल उधेड़ देने तक की ताकत रखता है

एक लोकोक्ति है – बापे पुत परापत घोड़ा, बहुत नहीं तो थोड़ा-थोड़ा। कभी अपने समय में पूरे बिहार को हिलाकर रखनेवाले और अपने प्रतिद्वंदियों को धौंस दिखाने में माहिर लालू प्रसाद के बेटे तेज प्रताप यादव ने एक नया बयान दिया है। सोमवार को विधानसभा परिसर में पत्रकारों से उन्होंने कहा कि ‘अगर मेरे पिता को कुछ होता है, तो मैं पीएम की खाल उधेड़ दूंगा।‘

तेज प्रताप ने यह भी कहा कि  ‘हमलोग कार्यक्रमों में जाते रहते है। लालू प्रसाद जी भी इन कार्यक्रमों में जाते रहते है, ऐसे में सुरक्षा वापस लेना, उनकी हत्या करने की साजिश है, हम उसका मुहंतोड़ जवाब देंगे, नरेन्द्र मोदी जी की खाल उधड़वा देंगे।’ इसके पूर्व उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भी धमकी भरे अंदाज में कहा था कि उनके घर में घुस कर मारेंगे।

ये है बिहार के नेताओं के बेटे या बिहार के नेताओं की भाषा और ऐसे हैं उनके पिता जो अपने बेटे का पक्ष लेते हुए ये कहते है कि यह एक बेटे का स्वाभाविक गुस्सा है। खैर, इन नेताओं और उनके बेटे-बेटियों को बिहार के सम्मान से क्या मतलब?  ये क्या बोलते है, और उसका अन्य राज्यों में बिहार के निवासियों पर क्या प्रभाव पड़ता है? उससे इनको क्या मतलब?  नेता है, बड़बोलापन है, बोल दिये, आगे जो होगा, वह देखा जायेगा।

स्वयंभू पार्टी के स्वयंभू नेता लालू प्रसाद जो गरीबों और पिछड़ों का खुद को हमदर्द बताते हुए करोड़ों-अरबों में खेल रहे है, क्या अपनी सुरक्षा पर उसमें से कुछ खर्च नही कर सकते? अपने लिए निजी सुरक्षा गार्डों को क्यों नहीं रख लेंते? क्या जरुरत है सरकारी सुरक्षा लेने की? थोड़ा दरियादिली दिखाइये, आपको जिस प्रकार उदारता से लोग करोड़ों-अरबों की सम्पत्ति दान दे देते हैं, क्या वे आपकी सुरक्षा का भार नहीं ले सकते? अरे उनको कहिये, कि जैसे उनलोगों ने करोड़ों-अरबों की सम्पत्ति दान दे दी, थोड़ा सुरक्षा पर भी खर्च करें, देखते ही देखते आपके उपर सुरक्षा पर ही इतना खर्च हो जायेगा कि उतना प्रधानमंत्री पर भी खर्च नहीं होता।

कमाल है, जिसकी भय से पूरा बिहार कभी थर-थर कांपता था, जो सभी को चुनौती देता था, सबकी नींद उड़ा देता था, आज उसकी हालत पस्त है, वह अपनी सुरक्षा के लिए रोना, रो रहा है। कमाल है, किसी ने ठीक ही कहा है, देखते जाइये, वक्त की मार तो ऐसी पड़ती है, कि अच्छे-अच्छों की हालत खराब हो जाती है। कभी यहीं लालू, जेल से निकलने पर हाथी पर बैठकर पटना की सड़कों पर देर रात तक घूमते थे, आज उनके बेटे, लालू की सुरक्षा के लिए भोकार पार-कर रो रहे हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धमकिया रहे हैं।

वाह रे ईश्वर, तू भी कमाल का समय, अच्छे-अच्छों को दिखा देता है, सचमुच तुम्हें चुनौती कौन दे सकता है? कभी ब्राह्मणवाद को चुनौती देनेवाला, आज ब्राह्मणों के आगे परिक्रमा कर रहा हैं, कभी उसे प्रवक्ता बनाता है, कभी उससे कुंडलियां दिखाता है, कभी उससे यज्ञ और कर्मकांड कराता है, और कभी बेटे को कृष्ण बनवाकर मीडिया के समक्ष प्रस्तुत कर देता है।  देखते जाइये लालू और उनके परिवारों की व्यथा, अभी तो बहुत कुछ देखना लालू को बाकी है, उनके परिवार को देखना बाकी है, क्योंकि जो उन्होंने सबको दिखाया है, उसे दिखाने के लिए ईश्वर ने, सारे उनके कर्मों की फिल्मों की रील मंगवा कर रख ली है, धीरे-धीरे एक –एक रील चढ़ेगा, लालू और उनके परिवार देखते जायेंगे और बिहार की जनता देखती जायेगी।