भाई वाह, मंत्री रेलवे सैलून का बेवजह इस्तेमाल करे तो ठीक, और विभागीय अधिकारी करें तो गलत
जब रेलवे का कोई अधिकारी या कर्मचारी गलत करें तो उस पर अनुशासनात्मक/विभागीय कार्रवाई हो जाये और विभागीय मंत्री करें, तो वह सदाचार हो जाये, उस मंत्री के उक्त कार्य को यह कहकर प्रतिष्ठित किया जाये कि अरे मंत्री है, उसे इतना तो हक बनता ही है। बार-बार पं. दीन दयाल उपाध्याय की सादगी का ढोल पीटनेवाली और मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन कर देनेवाली पार्टी के मंत्रियों का मंत्री बनने के बाद की उनकी जीवन शैली देखिये…
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