लो आया मौसम सत्तापक्ष के नेताओं के चेहरे चमकाने का, उसके बदले मुंहमांगी रकम वसूलने का

रांची के विभिन्न इलाकों में बड़े-बड़े होर्डिंग, बड़े-बड़े बैनर लगे हैं, जो लोगों को अपनी ओर बरबस आकर्षित कर रहे हैं। ये होर्डिंग और बैनर किसी राजनीतिक दल ने नहीं लगवाये हैं, दरअसल रांची से प्रकाशित अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने लगवाये है, क्योंकि अब अखबारों को भी पहचान का संकट हो गया है, इसलिए वे भी अपने यहां होनेवाले कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के लिए होर्डिंग व बैनर का सहारा लेते हैं, तथा सड़कों पर लगे बिजली के खंभों में उसे लटकवाते हैं।

रांची के विभिन्न इलाकों में बड़े-बड़े होर्डिंग, बड़े-बड़े बैनर लगे हैं, जो लोगों को अपनी ओर बरबस आकर्षित कर रहे हैं। ये होर्डिंग और बैनर किसी राजनीतिक दल ने नहीं लगवाये हैं, दरअसल रांची से प्रकाशित अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने लगवाये है, क्योंकि अब अखबारों को भी पहचान का संकट हो गया है, इसलिए वे भी अपने यहां होनेवाले कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के लिए होर्डिंग व बैनर का सहारा लेते हैं, तथा सड़कों पर लगे बिजली के खंभों में उसे लटकवाते हैं।

जैसे-जैसे नैतिकता और चरित्र, अब दुकानों पर, चावल-दाल की भांति बिकने लगे, वैसे-वैसे इस प्रकार की हरकतें भी दिखाई देने लगी, इस पर अब कोई आश्चर्य नहीं करता, जो आश्चर्य करते हैं, या इस पर अंगूली उठाते हैं, उसे ऐसा करनेवाले आला दर्जे का बेवकूफ या फ्रस्टेशन का शिकार व्यक्ति बताते हैं।

अब चूंकि जैसे-जैसे समय बीतता जायेगा, चुनाव का मौसम आता जायेगा, (ऐसे तो हमारे देश में हर वक्त कोई न कोई चुनाव आता ही रहता है, जैसे कभी लोकसभा का चुनाव तो कभी विधानसभा का चुनाव, कभी इन दोनों के उपचुनाव, कभी पंचायत चुनाव तो कभी नगर-निगम के चुनाव, जिसमें इन अखबारों-चैनलों के बल्ले-बल्ले होते रहते हैं।) ऐसी हरकतों में इजाफा देखने को मिलता जायेगा।

एक बात और, इन दिनों सभी अखबारों-चैनलों व अन्य मीडिया हाउसों में प्रबंधन/मालिकों ने आजकल इवेंट्स टीम भी बना रखी हैं, जो इवेन्ट्स आयोजित कर, नेताओ, व्यापारियों, करोड़ों में खेलनेवाली एनजीओ संस्थाओं, निजी शिक्षण संस्थाओं, मेडिकल संस्थाओं आदि द्वारा कमाये जा रहे अवैध रुपयों पर नजर टिकाकर, उनका बहुत बढ़िया से ब्लैकमेलिंग कर, अपने हक की राशि विज्ञापन के माध्यम से उठा लेते हैं और जो उनका ब्लैकमेलिंग का शिकार नहीं होता, उसे छट्ठी रात की दूध भी याद करा देते हैं, और इस कार्य में राज्य ही नहीं, देश के सभी अखबार व चैनल पारंगत है।

जैसे अभी आप रांची के कई इलाकों में ‘हिन्दुस्तान’ के द्वारा लगाये गये होर्डिंग-बैनरों को देख लीजिये। क्या लिखा है – इन होर्डिंग-बैनरों में। लिखा है – पूर्वांचल का आज, हिन्दुस्तान का कल। देखिए, पूर्वी राज्यों की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण और भविष्य पर चर्चा। 8 अक्टूबर 2018, सुबह 10 बजे से। बढ़ेगा झारखण्ड, बढ़ेगा पूरब, बढ़ेगा हिन्दुस्तान। इसमें नितिन गडकरी केन्द्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री रघुवर दास, केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्र में राज्य मंत्री सुदर्शन भगत, केन्द्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह, केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल के फोटो चिपके हैं, इसमें कही भी विपक्ष नजर नहीं आ रहा है।

आखिर ऐसा क्यों? दरअसल ‘हिन्दुस्तान’ अच्छी तरह जानता है कि इसकी आड़ में, पैसा सरकार ही देती है, न कि विपक्ष और जैसे ही विपक्ष के किसी नेता का नाम आयेगा, सत्तापक्ष ऐसे आयोजनों से हाथ खींच लेगा, क्योंकि विकास का ठेका सिर्फ सत्ता पक्ष ही लेता है, विपक्ष की तो कोई भूमिका ही नहीं रहती और न भूमिका रहती है उनका, जो देश व राज्य को अपनी ईमानदारी और चरित्र से आलोकित करते रहते हैं।

आप पूरे रांची में ‘हिन्दुस्तान’ अखबार द्वारा लगाये गये इस होर्डिंग व बैनरों को ध्यान से देखिये। आपको पता लग जायेगा कि ये कार्यक्रम दरअसल कौन और किसलिये करा रहा है और इसमें फायदा किसको है? इस कार्यक्रम का प्रायोजक कौन है, किसके इशारे पर ऐसा किया जा रहा है? फिलहाल, इस कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता हैं – झारखण्ड सरकार, सह प्रायोजक हैं – छत्तीसगढ़ शासन, और टीवी पार्टनर हैं – एबीपी। अब हमें नहीं लगता कि इसके बाद और भी कुछ लिखना बच जाता है।

ऐसे कार्यक्रम कोई ये पहली बार नहीं हुए है, या ऐसा नहीं कि ये कार्यक्रम इसके बाद होंगे ही नहीं, दरअसल जब तक हमारे देश में चरित्रहीनों की फौज रहेगी, ये गोरखधंधा हमेशा चलता रहेगा और लोग इसके माध्यम से एक दूसरे को लाभान्वित करते रहेंगे। पूर्व में पहले लाभान्वित करने का जो जरिया होता था, वह अखबार-चैनल के मालिकों को राज्यसभा में भेजने से संपन्न हो जाता था, पर अब ये राज्यसभा में इनके मालिकों को भेजने से ही संपन्न नहीं होता, बल्कि इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कर, जिसमें जनता न के बराबर होती हैं और न ही दिलचस्पी रखती है, जनता के टैक्स के पैसों से अपना उल्लू सीधा करना होता है, जिसमें सत्तापक्ष उदारता दिखाता रहता है और इस उदारता का लाभ पत्रकारिता जगत में शामिल सभी उठाते हैं।

अतः चुनाव का मौसम आ गया, फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ के कार्यक्रम के मजे लीजिये, कालान्तराल में और कई अखबार व चैनल आपको ऐसे इवेन्ट्स कराते दिखेंगे, आपको उल्लू बनाते दिखेंगे, आप उल्लू बनते रहिये, तथा पत्रकारिता और नेताओं के सहजीविता का आनन्द लीजिये।

Krishna Bihari Mishra

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