Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

कोई भी देश अपने देश को बाजार बनाना नहीं चाहता, पर अपने CM भारत को बाजार कह गर्व महसूस करते हैं

धिक्कार, इस राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को जो भारत देश को बाजार कहने में गर्व महसूस करता है। भारत जैसे देश को उद्यमिता प्रधान देश न कहकर, उसे उपभोक्तावादी देश कहने में खुद को गर्व महसूस करनेवाला व्यक्ति की यह सोच बताता है कि वह अपने देश के सम्मान को कैसे प्रभावित कर रहा है, वह भी एक प्रतिष्ठित राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर, वह भी उस मंच से जहां हिन्दी को प्रतिष्ठित करने की बात हो रही है।

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अपनी बात

जनता को उल्लू बनाने का काम जारी, CM ने सफाई अभियान वहां चलाया, जहां गंदगी थी ही नहीं

जब कोई मुख्यमंत्री सूट-बुट पहनकर, अपने मंत्रियों, इलेक्ट्रानिक मीडिया व प्रिंट मीडिया के संवाददाताओं व अपने कार्यकर्ताओं के लाव लश्कर के साथ किसी मुहल्ले में सफाई अभियान के लिए निकल पड़े तो समझ लीजिये, वह राज्य की जनता को उल्लू बनाने के लिए निकल पड़ा है, दरअसल उसे स्वच्छता व सफाई से कोई लेना-देना नहीं है, वह फोटो खींचवाने के लिए उस स्थल पर पहुंचा हैं,

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अपनी बात

धन्य हैं रघुवर, धन्य हैं उनकी सरकार, धन्य हैं उनके अधिकारी, जो अपराधियों को बेदाग बचा लते हैं

भाई देश में किसी राज्य का मुख्यमंत्री हो, तो वह रघुवर दास जैसा हो, अगर सरकार हो तो रघुवर सरकार जैसी हो, अगर कोई अधिकारी हो, तो झारखण्ड के अधिकारियों जैसा हो, जिसे जांच करने को कुछ मिले तो बस वहीं चीजें लिखे, जो राज्य सरकार को हृदय से पसंद हो, जो अपराधियों को बेदाग बचा लें, वह सरकार के इशारे पर ऐसी रिपोर्ट तैयार कर दें,

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अपनी बात

आओ हल्ला करें, शोर करें, चीखे-चिल्लाये यह कहकर कि आज ‘हिन्दी दिवस’ है

दरअसल हमारे देश में, जो खुद को शिखर पर मानते हैं, उनमें से 99 प्रतिशत लोग दोहरे चरित्र के है, जब वे जमीन पर होते हैं, तो उन्हें हिन्दी नजर आती हैं, और जैसे ही ये अपने क्षेत्र में शिखर पर होते हैं, उन्हें अंग्रेजी की व्यापकता, उसकी विशालता, उसके समृद्ध इतिहास पर उनकी नजरें जाकर टिक जाती हैं। उसका उदाहरण आप देखिये, भारत के न्यायालयों चाहे वह सुप्रीम कोर्ट हो

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अपनी बात

साल भर के अंदर राजधानी की सूरत बदलनेवाले, रांची को तो नहीं बदल सकें, पर…

पहले विधायक थे, चलो मान लिया, एक विधायक की क्या औकात? बाद में झारखण्ड विधानसभा के अध्यक्ष बने, चलो यह भी मान लिया एक विधानसभाध्यक्ष भी क्या कर सकता है? लेकिन अब तो आप नगर विकास मंत्रालय संभाल रहे हैं, अब आप ये कहेंगे कि हमें करने नहीं दिया गया, तो लोग कभी इस बात को नहीं स्वीकार करेंगे?

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धर्म

अखबार पढ़कर अगर आप हरितालिका तीज मना रहे हैं तो सावधान हो जाइये…

अगर आपने रांची से प्रकाशित हिन्दी दैनिक प्रभात खबर पढ़कर हरितालिका तीज मनाने का निश्चय किया हैं तो जितना जल्द हो सके, इससे आप उबर जाये, क्योंकि इसने जो आपको जानकारी दी हैं, वह पूर्णतया गलत है, धर्मविरुद्ध है। इस अखबार में, जिन्होंने जानकारी दी है, या जिनके द्वारा हरितालिका तीज के बारे में बताया गया हैं, उन्हें दरअसल हरितालिका तीज के बारे में जानकारी ही नहीं हैं।

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राजनीति

कांग्रेसी और वामदलों के भारत बंद को मिला जनसमर्थन, झारखण्ड समेत पूरे देश में मिला-जुला असर

पेट्रोल-डीजल में लगातार हो रही मूल्यवृद्धि तथा बढ़ती महंगाई के विरुद्ध में कांग्रेस द्वारा आज बुलाया गया भारत बंद का कांग्रेस शासित प्रदेशों में व्यापक असर वही भाजपा शासित राज्यों में इसका मिला-जुला असर देखने को मिल रहा हैं। सर्वाधिक असर कर्नाटक में दीख रहा हैं, जहां बंद असरदार हैं, सड़कों पर सन्नाटा पसरा हैं, वहीं जिन राज्यों में इसी साल के अंत में चुनाव होनेवाले हैं,

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अपनी बात

पहली बार झारखण्ड के किसी नेता ने वर्तमान पत्रकारों और उनकी पत्रकारिता की खूलेआम धज्जियां उड़ाई

पहली बार राज्य के किसी प्रमुख नेता ने देश व राज्य में चल रही पत्रकारिता पर अपना पक्ष रखा है। ये कोई सामान्य नेता नहीं, बल्कि झारखण्ड के ऐतिहासिक पुरुष यानी प्रथम मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी है, उन्होंने अपने सोशल साइट के माध्यम से जोरदार शब्दों में अपनी बात रखी है, जो किसी नेता में हिम्मत नहीं कि आज की स्थितियों को देखकर कह दें।

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राजनीति

बरसों बाद कांग्रेस ने बुलाया भारत बंद, प्रमुख विपक्षी दलों ने दिया समर्थन, नेताओं ने झोंकी ताकत

हमेशा आराम की राजनीति करनेवाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बरसो बाद कल सड़क पर उतरेगी, वह भी भारत बंद कराने के लिए, आम तौर पर आराम की राजनीति करनेवाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता कल सड़कों पर उतरेंगे, भारत बंद करायेंगे, आम तौर पर पहले देखा जाता था कि विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा आयोजित भारत बंद या झारखण्ड बंद को कांग्रेस समर्थन देती थी

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राजनीति

स्वयंसेवकों ने बनाया दबाव, उच्चाधिकारियों से कहा ‘भास्कर’ को भेजी जाय लीगल नोटिस

पिछले दिनों रांची से प्रकाशित दैनिक भास्कर के एक रिपोर्ट से संघ के स्वयंसेवकों का एक बड़ा समूह आहत है। ये समूह दैनिक भास्कर को क्षमा करने के मूड में नहीं है, इनका कहना है कि कोई भी अखबार किसी भी संस्था के खिलाफ बेसिर-पैर की बातें कैसे छाप सकता है? और एक जिम्मेदार संस्था का मान-मर्दन कैसे कर सकता है, इसका जवाब तो उसे मिलना ही चाहिए।

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