Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

शर्मनाक, Me Too आरोपियों के खिलाफ देश एकजुट, पर CM रघुवर Me Too आरोपी के साथ स्थापना दिवस मनायेंगे

भारत में पहली बार, लड़कियों/महिलाओं ने मी टू अभियान के तहत अपने उपर हुए यौन शोषण को जोरदार ढंग से उठाना शुरु किया है, जिसका प्रभाव भी देखने को मिल रहा है, इस मी टू अभियान के शिकार, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, संगीतकार और फिल्मी दुनिया के लोग हो रहे हैं। वर्तमान में जिन-जिन पर मी टू के तहत आरोप लग रहे हैं, उनके जीवन भर की पूंजी यानी इज्जत कूड़ों की अम्बार में सिमटती दिख रही हैं,

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अपनी बात

जेपी के बगुला भगतों ने ही लोकनायक के संपूर्ण क्रांति की हवा निकाल दी…

जेपी के बगुला भगतों ने जितनी दिमाग पद, धन और जमीन बटोरने में लगाई, उतनी दिमाग अगर जेपी के संपूर्ण क्रांति को जमीन पर उतारने में लगाते, तो निःसंदेह देश का नक्शा ही अब तक बदल गया होता, पर जेपी के लोगों को, उनके पदचिन्हों पर चलने का दावा करनेवाले को, संपूर्ण क्रांति में दिलचस्पी कहां, वे तो आजीवन धन इक्ट्ठे करने, मृत्युपर्यंन्त स्वयं और स्वयं के परिवार के लिए पद-धन और जमीन बटोरने में ही अपना जीवन लगा दिया।

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अपनी बात

बीडीओ सुनील ने की ब्लॉक प्रमुख प्रियंका पाठक के साथ बदतमीजी, पति को एससी/एसटी एक्ट में फंसाया

एससी-एसटी एक्ट सचमुच सामान्य वर्गों के लिए भारी पड़ रहा है, बिहार में भी अब इसका दुरुपयोग जमकर हो रहा है, चूंकि अब नये कानून के बारे में बड़े पदों पर कार्यरत एससी-एसटी के लोगों को पता चल चुका है कि इसका इस्तेमाल करने से वर्तमान में क्या फायदा है? इसलिए वे बेवजह इस्तेमाल करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे।

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अपनी बात

नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने काबिल बन रहे एक पत्रकार को औकात बताई, पत्रकार की हेकड़ी बंद

बेवजह के सवालों और बार-बार की टोका-टाकी से तंग आकर नगर विकास मंत्री ने वही किया, जो उन्हें लगा कि उन्हें करना चाहिए। उन्होंने सीधे उक्त पत्रकार की क्लास ले ली। पत्रकार ने जब देखा कि सीपी सिंह आक्रोशित हो रहे है, तो उसकी आवाज धीमी होती चली गई, हालांकि उसने प्रयास किया कि मंत्री को अपने बातों से पटके, पर सी पी सिंह कहा उसकी बातों से पटकाने वाले थे।

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अपनी बात

भाई वाह, मंत्री रेलवे सैलून का बेवजह इस्तेमाल करे तो ठीक, और विभागीय अधिकारी करें तो गलत

जब रेलवे का कोई अधिकारी या कर्मचारी गलत करें तो उस पर अनुशासनात्मक/विभागीय कार्रवाई हो जाये और विभागीय मंत्री करें, तो वह सदाचार हो जाये, उस मंत्री के उक्त कार्य को यह कहकर प्रतिष्ठित किया जाये कि अरे मंत्री है, उसे इतना तो हक बनता ही है। बार-बार पं. दीन दयाल उपाध्याय की सादगी का ढोल पीटनेवाली और मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन कर देनेवाली पार्टी के मंत्रियों का मंत्री बनने के बाद की उनकी जीवन शैली देखिये…

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अपनी बात

दिल्ली से आई थी, ये हंस/बोल/दौड़ रही थी, मात्र 15 दिनों में ये मर कैसे गई? रघुवर सरकार जवाब दो?

25 सितम्बर को दिल्ली से रांची 16 वैसी बच्चियों को लाया गया था, जिन्हें किसी न किसी तरह काम के नाम पर वहां बेच दिया गया था। रांची जंक्शन पर आई ये बच्चियां बहुत खुश थी, क्योंकि वह अपने घर वापस लौट रही थी। इन्हीं में से एक थी गोड्डा जिले से पहाड़िया जन-जाति की 17 साल की एक आदिवासी बच्ची। उसने अपने उपर हुए अमानवीय अत्याचार की ऐसी दर्द भरी दास्तान सुनाई, कि स्टेशन पर खड़ें सभी लोगों के आंखों में आंसू आ गये।

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अपनी बात

स्वच्छ भारत मिशन को ही प्रभावित करने में लगा है रांची रेल मंडल, पुरुष शौचालय में लगा दिया ताला

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष में हम प्रवेश कर चुके है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस वर्ष को स्वच्छता को समर्पित कर चुके है, पर उन्हीं के मंत्री और उन मंत्रियों के विभाग स्वच्छता को कैसे प्रभावित कर रहे है, उसका सबसे सुंदर उदाहरण है, रांची रेल मंडल का रांची जंक्शन, जिसके प्लेटफार्म नंबर दो पर निर्मित पुरुष शौचालय में हमेशा ताला लटका रहता है, जिसके कारण कई रेलयात्रियों को यत्र-तत्र, मल-मूत्र विसर्जित करते देखा जा सकता है।

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अपनी बात

आखिर अपने CM रघुवर दास एक ही डॉयलॉग को कब तक रिपीट करते रहेंगे?

आखिर एक ही डॉयलॉग को कितनी बार रिपीट करेंगे, मुख्यमंत्री रघुवर दास जी, जनता ये सभी डॉयलॉग सुनते-सुनते बोर हो गई, थोड़ा अपने डॉयलॉग में परिवर्तन लाइये, ये क्या एक ही बात को, कनफूंकवों के द्वारा, कान फूंकने पर हर जगह बोलते रहते हैं, क्या आपको नहीं लगता कि एक ही डॉयलॉग सुनकर लोग आपकी बातों पर हंसते भी है, जरा देखिये आपने ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड सम्मिट, जो आपही के सरकार द्वारा दिल्ली में आयोजित किया गया है,

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अपनी बात

पता नहीं, बिहारियों को ये कब समझ आयेगी कि बकरे और मुर्गे-मुर्गियां कटने के लिए ही पैदा होते हैं

पता नहीं, बिहारियों को ये बात कब समझ में आयेगी कि बकरे और मुर्गे-मुर्गियां कटने के लिए ही पैदा होते हैं, अगर आप बकरे और मुर्गे-मुर्गियां खुद को बनायेंगे तो यहीं होगा, जो आज गुजरात में हुआ। क्या ये सही नहीं कि बिहारी मजदूर कभी असम तो कभी तमिलनाडू में घृणा राजनीति के शिकार हुए, महाराष्ट्र में तो ये सिलसिला थमने का नाम ही नहीं लेता। कभी दिल्ली की सीएम रह चुकी कांग्रेस की वरिष्ठ नेतृ शीला दीक्षित भी ऐसे बयान दे चुकी है,

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राजनीति

कांग्रेस की नजर में झारखण्ड की जनता त्रस्त, मुख्यमंत्री रघुवर दास मस्त

अजय कुमार ने कांग्रेस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य के वर्तमान हालात को देखते हुए तो यहीं लग रहा है कि झारखण्ड की जनता त्रस्त और मुख्यमंत्री रघुवर दास मस्त। झारखण्ड पुलिस सुस्त और अपराधी चुस्त। उन्होंने कहा कि पांच अक्टूबर को चावल व्यवसायी नरेन्द्र सिंह होड़ा की हत्या, कल भाजपा कार्यालय के पीछे मुक्ति गैस एजेसी से तीन लाख की लूट और आज बीस लाख के जेवर की लूट बता रहा है कि राज्य के हालात क्या है?

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