Author: Krishna Bihari Mishra

राजनीति

सरयू राय ने बार काउंसिल के सचिव को लिखा पत्र, 23 नवम्बर को पारित प्रस्ताव वापस लेने को कहा

झारखण्ड के सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री सरयू राय ने झारखण्ड राज्य बार काउंसिल के सचिव राजेश पांडेय को एक पत्र लिखा है, पत्र में उन्होंने महाधिवक्ता अजीत कुमार सहाय पर आरोप लगाया है कि वे जनहित के मामलों को उठाने में फेल है, उन्होंने मुख्य कानूनी सलाहकार के पद पर रहते हुए भी कार्यों का निबटारा उचित ढंग से नहीं किया।

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अपनी बात

अफसोस, सत्तारुढ़ दल और राज्य के CM ने सदन को सिर्फ बजट पास कराने का जरिया बना लिया

झारखण्ड विधानसभा का शीतकालीन सत्र समाप्त हो गया, ये सत्र भी आम सत्रों की तरह ही हंगामें की भेंट चढ़ गया, सत्तापक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों ने अपने-अपने ढंग से सदन को चलाने की कोशिश की, पारा टीचरों के आंदोलन तथा बाहरी व्यक्तियों को राज्य में मिल रही नौकरी ही हंगामें के केन्द्र में रहा, पारा टीचरों के मुद्दे पर तो जैसे राज्य सरकार ने संकल्प ही ले रखा है कि पारा टीचरों को सबक सीखा देना है,

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अपराध

बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुभान अल्लाह, BJP नेता पप्पू बनर्जी कइयों से करोड़ों लेकर फरार

जैसे-जैसे लोकसभा-विधानसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे झारखण्ड के भाजपा नेताओं, विधायकों, सांसदों की कारगुजारियां भी एक-एक कर सामने आ रही है। फिलहाल अपने नये कारनामों के लिए रामगढ़ के भाजपा जिलाध्यक्ष पप्पू बनर्जी सुर्खियों में हैं। उन पर आरोप है कि वे कई लोगों के करोड़ों रुपये लेकर फरार है और पिछले एक सप्ताह से लापता है।

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अपनी बात

BJP की संभावित हार को देख, CM ने की अपने लिए विशेष व्यवस्था, नेता प्रतिपक्ष को बढ़ाई सुविधाएं

लगता है, राज्य के होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास को इस बात का आभास हो गया है कि आनेवाले समय में विधानसभा का चुनाव जब भी हो, उनका मुख्यमंत्री पद पर रहना अब संभव नहीं हैं, राज्य की जनता मन बना चुकी है कि उनकी विदाई अगले वर्ष कर देनी है, शायद यहीं कारण है कि उन्होंने अभी से ही अपने लिए विशेष व्यवस्था करनी शुरु कर दी है, यहीं नहीं अपने साथ रहनेवाले तीन खासमखास लोगों पर भी उन्होंने दया लुटा दी है,

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अपनी बात

कमला ने CM के अतिप्रिय विधायक ढुलू महतो के खिलाफ राज्य के 81 विधायकों को सौंपी पत्र, मांगी मदद

धनबाद कतरास गद्दी मोहल्ला की रहनेवाली कमला कुमारी ने राज्य के सभी 81 विधायकों को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है। फिलहाल झारखण्ड में चल रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सभी विधायकों को लिखे पत्र से, उसे लगता है कि शायद ऐसा करने से उसे न्याय मिल जाये, क्योंकि उसकी बातों को न तो राज्य की पुलिस सुन रही है और न ही भाजपा का कोई नेता ही उसे मदद करने को तैयार है।

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अपराध

ये है CM रघुवर की धनबाद पुलिस, जो यौन शोषण के आरोपियों को बचाने में खुद को दांव पर लगा देती है

सचमुच, आखिर धनबाद पुलिस किसी भी यौन शोषण मामले में, जब कोई महिला प्राथमिकी दर्ज कराने आती है, तो उसकी प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं करती, साथ ही जिस पर यौन शोषण के आरोप है, उन्हें गिरफ्तार या उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करती, क्या इसमें सत्ताधारी दल के नेताओं का दबाव होता है, या कुछ और बात है?

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अपनी बात

चार साल पूरे होने पर CM ने पूरे राज्य को होर्डिंग-बैनर से पाटा, जनता हुई नाराज, बोली सबक सिखायेंगे

जनाब के 4 साल पूरे हो गये, जनाब के मातहत काम करनेवाले लोग, उनसे अनुप्राणित लोग, उनके द्वारा कथित कार्यों को लेकर, पूरे रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखण्ड को बैनर-पोस्टर से रंग दिये हैं, पूरे राज्य में बस चारों और एक बार फिर रघुवर ही रघुवर नजर आ रहे हैं, और यहीं बैनर-पोस्टर आम जनता के मूड को और भड़का रहा है, यानी जिस प्रचार के सहारे जनाब खुद को इमेज बनाने में लगे हैं, वहीं प्रचार जनता के मूड व जायके को बिगाड़ रहा हैं।

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राजनीति

दिनेश उरांव झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष की तरह नहीं बल्कि भाजपा प्रवक्ता की तरह कर रहे काम

झारखण्ड विकास मोर्चा के छः विधायकों की सुनवाई पूरी हो चुकी, फैसला सुरक्षित रखा गया है, ये फैसला कब आयेगा? ये भी भविष्य के गर्भ में हैं, आखिर झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष को फैसले देने में अब क्या दिक्कत आ रही हैं? वह भी तब जबकि सुनवाई पूरी हो चुकी। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार के अनुसार, दरअसल जब व्यक्ति विधानसभाध्यक्ष न होकर, पार्टी के प्रति समर्पण दिखाना प्रारम्भ कर देता है।

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अपनी बात

कोलेबिरा की जनता ने भाजपा को किया दूर से प्रणाम, कांग्रेस-झाविमो प्रत्याशी पर जताया भरोसा

लीजिये, झारखण्ड के कोलेबिरा विधानसभा की जनता ने भी अपना फैसला सुना दिया। यहां की जनता भी अन्य जगहों की तरह भाजपा को पसन्द नहीं करती, कोलेबिरा में जनता के पास विपक्ष के रुप में दो विकल्प थे, एक झारखण्ड पार्टी को सहयोग दे रही झामुमो और राजद तो दूसरा कांग्रेस तथा कांग्रेस को सहयोग दे रही झाविमो। झाविमो के बंधु तिर्की को तो इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा और जैसा कि होता है,

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अपनी बात

जहां-जहां CM का जन-चौपाल, उस क्षेत्र के पारा-टीचरों पर आफत, उनके घरों से उठा ले जा रही पुलिस

आखिर राज्य के सीएम को किस बात का डर? वे तो सबको एक ही लाठी से हांकने के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में पारा टीचरों को रातों-रात उनके घरों से उठाने की बात तो शर्मनाक है, भला पारा-टीचर उनका क्या बिगाड़ लेंगे, बेचारे सात-आठ हजार रुपये में खटनेवाले पारा-टीचरों की एक सीएम के सामने क्या औकात? पर जिस प्रकार से पारा-टीचरों पर दमन का नया फार्मूला इजाद हुआ है, वह लोकतंत्र के लिए घातक है।

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