चार साल पूरे होने पर CM ने पूरे राज्य को होर्डिंग-बैनर से पाटा, जनता हुई नाराज, बोली सबक सिखायेंगे

जनाब के 4 साल पूरे हो गये, जनाब के मातहत काम करनेवाले लोग, उनसे अनुप्राणित लोग, उनके द्वारा कथित कार्यों को लेकर, पूरे रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखण्ड को बैनर-पोस्टर से रंग दिये हैं, पूरे राज्य में बस चारों और एक बार फिर रघुवर ही रघुवर नजर आ रहे हैं, और यहीं बैनर-पोस्टर आम जनता के मूड को और भड़का रहा है, यानी जिस प्रचार के सहारे जनाब खुद को इमेज बनाने में लगे हैं, वहीं प्रचार जनता के मूड व जायके को बिगाड़ रहा हैं।

जनाब के 4 साल पूरे हो गये, जनाब के मातहत काम करनेवाले लोग, उनसे अनुप्राणित लोग, उनके द्वारा कथित कार्यों को लेकर, पूरे रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखण्ड को बैनर-पोस्टर से रंग दिये हैं, पूरे राज्य में बस चारों और एक बार फिर रघुवर ही रघुवर नजर आ रहे हैं, और यहीं बैनर-पोस्टर आम जनता के मूड को और भड़का रहा है, यानी जिस प्रचार के सहारे जनाब खुद को इमेज बनाने में लगे हैं, वहीं प्रचार जनता के मूड व जायके को बिगाड़ रहा हैं।

रांची के फुटपाथ पर अपना छोटा सा उद्योग चला रहे सुनील राम बताते है कि ये अपने सीएम रघुवर दास जितना दिमाग अपने प्रचार-प्रसार में लगाते है, उतना दिमाग केवल अपने बोल-चाल को सुधारने में लगा देते तो इनका इमेज भी बनता और राज्य की जनता का दूसरे राज्यों में सम्मान भी बढ़ता, पर इन्हें बोल-चाल करना कौन सिखलाएं, ऐसे भी बूढ़ तोता सीख नहीं मांगता, अब जो हो गया सो हो गया।

रांची विश्वविद्यालय में पढ़ रहा सरोज, विद्रोही24. कॉम को बताता है कि अब तक जितने भी राज्य में विधानसभा के उपचुनाव हुए, उसमें सिर्फ एक सीट को छोड़कर, भाजपा और उसके सहयोगी दलों का सफाया ही हुआ, उसके बावजूद भी अगर किसी को ज्ञान न हो, तो भगवान ही मालिक है, आम जनता को क्या चाहिए? और आप दे क्या रहे हैं, इस पर जब तक चिन्तन नहीं करेंगे? आप का कभी हित नहीं सधनेवाला।

सरोज कहता है कि दुनिया ये पहले राजनीतिज्ञ नहीं है, जिन्होंने विज्ञापन के नाम पर अपना चेहरा चमकाने के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाये, पर जरा उन नेताओं से पूछिये कि जिन्होंने ऐसा किया, उनकी हालत क्या है? उत्तर प्रदेश से सपा का शासन का समाप्त होना, अखिलेश यादव का सत्ता से बाहर होना, मध्यप्रदेश से शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ से रमण सिंह के शासन का अंत, ये तो प्रत्यक्ष उदाहरण है कि आप करोड़ों फूंक दीजिये, फिर भी जनता का स्नेह आपको नहीं मिलेगा, जब तक आप अपने बोलचाल तथा अपने कर्मों में सुधार नहीं लायेंगे।

रांची विश्वविद्यालय में पढ़ाई जारी रखी, सुनीता तिर्की बताती है कि उसने कई लोगों के शासन देखे, पर ये शासन तो गजब का है, यहां तो स्कूल बंद कर दिये जाते है, शराब को मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर में बेचने का प्रबंध किया जाता है, लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं, थाने में गरीबों-मजलूमों के प्राथमिकी दर्ज नहीं किये जाते, यहां तक की आज भी सामाजिक सुरक्षा पेंशन में लोचा साफ दिखाई पड़ता है, ऐसे में किस बात का शासन, हम तो वोट जब भी हो, रघुवर के खिलाफ ही वोट करेंगे, क्योंकि इसने तो आदिवासियों और मूलवासियों को लड़ाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी, सीएनटी-एसपीटी का जो हाल किया, वो जगजाहिर है, धार्मिक उन्माद तो चरम पर है, कब कौन मॉब लिचिंग का शिकार हो जायेगा, ये सब करने के लिए तो हमलोगों ने भाजपा को वोट नहीं दिया, अब तो परिवर्तन ही विकल्प हैं, सुनीता तिर्की ये भी कहती है कि ये कितना भी रुपये अपने प्रचार पर फूंक दें, जो यहां के लोगों के दिलों में जो रघुवर दास के खिलाफ जो छवि बन गई है, वो इतनी जल्दी खत्म नहीं होगी, जब तक लोग इन्हें सत्ता से हटा न दें।

एक व्यापारिक प्रतिष्ठान चला रहे, रांची के एक अतिप्रतिष्ठित एवं भाजपा के कट्टर समर्थक रह चुके, एक व्यक्ति ने कहा कि लोकसभा में तो वे नरेन्द्र मोदी को ही वोट देंगे, पर विधानसभा में रघुवर दास मुख्यमंत्री न बने, इसके लिए वे एड़ी-चोटी एक कर देंगे, क्योंकि इसने पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है, ये हाथी उडानेवाले सीएम है, वो हाथी जो आज तक कभी उड़ा ही नहीं, पता नहीं इनको दिमाग देनेवाले कौन लोग है? जो अधकचरा ज्ञान देकर, सीएम रघुवर की गत तो गिरा ही रहा है, भाजपा के प्रति लोगों की मानसिकता को भी बदल रहा है, एक समय था, भाजपा का मतलब, शील और चरित्र दिखाई पड़ता था, अब तो ये दोनों चीजें भूल ही जाइये।

एक बार फिर करोड़ों रुपये विज्ञापन पर फूंकने पर ये व्यक्ति कहते है कि जनता का पैसा है, फूंक दीजिये, ये पैसा सीएम रघुवर दास अपने मेहनत से कमाये होते तो पता चलता। उन्हें मालूम होना चाहिए कि प्रचार-प्रसार से कुछ नहीं होता, अगर प्रचार-प्रसार से ही सब होता तो जरा बताइये कि 13 दिनों की चली वाजपेयी सरकार को जनता ने दुबारा चुनाव होने पर अपार बहुमत कैसे दे दिया? अरे भाई अब भी वक्त है, समझिये जनता को काम चाहिए, जनता को प्रचार नहीं।

राजेश का कहना है कि कौन सा मुख्यमंत्री, काहे का मुख्यमंत्री ये वहीं मुख्यमंत्री है न, जिन्होंने कभी नगड़ी में खाद्यान्न योजना में डीबीटी लागू किया था, क्या हुआ उस डीबीटी का, जहां से शुरु हुआ, वहीं खत्म हो गया। ये कहते है कि 2018 तक पूरे झारखण्ड में बिजली आ जायेगी, अरे भाई अब तो दिसम्बर बीतने में कुछ ही दिन तो शेष है, कहां है बिजली, यहां तो राजधानी रांची में ही बिजली गायब रहती है, गांवों और किसानों को क्या खाक मिलेगा। राजेश गुस्सा कर कहते है कि पूछिये रघुवर दास से कि उसके कैशलेस अभियान का क्या हुआ? झूठ और प्रचार से आप जनता का दिल नहीं जीत सकते।

नम्रता बताती है कि ये सरकार खुद घोषणा कर चुकी है कि पूरा राज्य खूले में शौच मुक्त हो गया, पर कुछ ही दिनों पहले मुख्यमंत्री के जनचौपाल में ही कुछ लोगों ने सवाल उठा दिया कि उनके गांवों के कई घरों में शौचालय नहीं है, खुद मुख्यमंत्री ने वहां के डीसी को इस बात को लेकर क्लास भी लगाई, तो ऐसे में प्रचार-प्रसार आम आदमी के लिए क्या मायने रखता है, मैं खुद पूर्व में भाजपा को वोट देती थी, पर सीएम रघुवर दास ने तो उसका मूड ही खराब कर दिया है, आम चुनाव में तो इस बार भाजपा को दूर से ही प्रणाम कर देना है।

Krishna Bihari Mishra

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ये है CM रघुवर की धनबाद पुलिस, जो यौन शोषण के आरोपियों को बचाने में खुद को दांव पर लगा देती है

Tue Dec 25 , 2018
सचमुच, आखिर धनबाद पुलिस किसी भी यौन शोषण मामले में, जब कोई महिला प्राथमिकी दर्ज कराने आती है, तो उसकी प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं करती, साथ ही जिस पर यौन शोषण के आरोप है, उन्हें गिरफ्तार या उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करती, क्या इसमें सत्ताधारी दल के नेताओं का दबाव होता है, या कुछ और बात है?

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