क्या सीएम का चहेता ढुलू, रघुवर की बात मानेगा, टाइगर की जगह खुद को सेवक कहलाना पसन्द करेगा?
जिस प्रकार एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकते, उसी प्रकार एक ही पार्टी में दो टाइगर भी नहीं रह सकते, भला सीएम रघुवर के सामने मंच संचालक किसी भी व्यक्ति को टाइगर कहकर पुकारे, ये भला सीएम रघुवर को कैसे पसन्द आयेगा, जो अपने विरोधियों के लिए चोट्टा एवं चिरकूट शब्द का प्रयोग करता हो, उसके सामने कोई टाइगर के रुप में आये, भला सीएम कैसे पसन्द करेगा,
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