क्या सीएम का चहेता ढुलू, रघुवर की बात मानेगा, टाइगर की जगह खुद को सेवक कहलाना पसन्द करेगा?

जिस प्रकार एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकते, उसी प्रकार एक ही पार्टी में दो टाइगर भी नहीं रह सकते, भला सीएम रघुवर के सामने मंच संचालक किसी भी व्यक्ति को टाइगर कहकर पुकारे, ये भला सीएम रघुवर को कैसे पसन्द आयेगा, जो अपने विरोधियों के लिए चोट्टा एवं चिरकूट शब्द का प्रयोग करता हो, उसके सामने कोई टाइगर के रुप में आये, भला सीएम कैसे पसन्द करेगा,

जिस प्रकार एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकते, उसी प्रकार एक ही पार्टी में दो टाइगर भी नहीं रह सकते, भला सीएम रघुवर के सामने मंच संचालक किसी भी व्यक्ति को टाइगर कहकर पुकारे, ये भला सीएम रघुवर को कैसे पसन्द आयेगा, जो अपने विरोधियों के लिए चोट्टा एवं चिरकूट शब्द का प्रयोग करता हो, उसके सामने कोई टाइगर के रुप में आये, भला सीएम कैसे पसन्द करेगा, जो अपने जोहार जन-आशीर्वाद यात्रा में किसी भी राज्यस्तरीय नेता को अपने पास ठेकने तक नहीं दिया, भला उसके सामने कोई भी व्यक्ति किसी को टाइगर कहकर पुकारें, वो कैसे बर्दाश्त कर सकता है?

शायद यहीं कारण रहा कि जब मंच संचालक ने सीएम रघुवर दास के चहेते ढुलू को अपनी बात रखने के लिए टाइगर कहकर बुलाया, सीएम रघुवर को ये बात दिल में चुभ गई, वे अंदर ही अंदर तमतमा गये, और इसे अपने मन में रख लिया और जब उन्हें अपनी बात कहने का समय मिला तो वे भाषण के क्रम में वो सारी बातें उड़ेल दी, जो उनके मन में घर कर गई थी।

सीएम ने बड़ी ही चतुराई से अपने ही बिरादर, सजातीय भाई ढुलू को सीख दे डाली, कि वो खुद को टाइगर न कहकर सेवक कहलाना पसन्द करें, तथा साथ ही टाइगर सेना के लोगों से भी कहा कि वे खुद को सेवक कहलाना पसन्द करें, क्योंकि भाजपा में कोई टाइगर नहीं होता, बल्कि सभी सेवक होते हैं, सीएम रघुवर ने ढुलू का नाम लेते हुए कहा कि जब उन्होंने राम मंदिर बनाया हैं तो राम से सीखे भी, उन्होंने राम पर ही एक मिनट लेकर कुछ अच्छी बातें भी कह डाली, पर ढुलू अथवा ढुलू के लोगों पर इसका असर होगा, हमें नहीं लगता, क्योंकि जिसने जिदंगी भर भय की राजनीति की, वो भय की राजनीति को ही तिलांजलि दे दें, यह कैसे संभव हैं?

राजनीतिक पंडित बताते है कि अब चूंकि सीएम रघुवर ने कह दिया कि वो खुद को सेवक कहलाना पसन्द करें, तो अब देर क्या? दो दिनों में ही पता चल जायेगा कि ढुलू और ढुलू के लोगों पर सीएम रघुवर की बातों का कितना प्रभाव पड़ा, राजनीतिक पंडित तो यह भी कहते है कि भला यौन शोषण का आरोपी भी सेवक हो सकता है, ये बातें पहली बार किसी राज्य के मुख्यमंत्री के मुख से सुनने को मिली, जो आश्चर्यजनक है।

दूसरी ओर ढुलू महतो पर यौन शोषण का आरोप लगानेवाली कमला भी आज कतरास थाना चौक पर सीएम रघुवर का स्वागत की तथा एक ज्ञापन भी सीएम रघुवर को सौंपा, तथा  उस ज्ञापन के माध्यम से ढुलू जैसे लोगों को भाजपा का टिकट न देकर, एक अच्छे एवं सज्जन व्यक्ति को टिकट मिले, इसका अनुरोध किया, पर सीएम रघुवर उसकी बातों पर अमल करेंगे, इसकी संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आती, क्योकि सीएम रघुवर और ढुलू की यारी जगजाहिर है।

Krishna Bihari Mishra

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