सावधान, शहंशाह-ए-झारखण्ड से कोई सवाल नहीं पूछेगा, और अगर पूछा तो जेल जाने को तैयार रहे

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जी हां, इस बात को जितना जल्दी हो सके, गांठ बांध लीजिये, उतना ही अच्छा है, अगर आपकी ओर झारखण्ड के जहांपनाह, शहंशाह-ए-झारखण्ड की सवारी गुजर रही हो, या जनाबे ए आली की सभा चल रही हो, तो आप सिर्फ अच्छे नन्हें बच्चे की तरह उनके भाषण को केवल सुनें, कोई सवाल-जवाब नहीं करें, और अगर आपके अंदर सवाल पूछने का कीड़ा कुलबुलाया तो समझ लीजिये, आपका जीना हराम, यानी शहंशाह-ए-झारखण्ड के मातहत काम करनेवाले उनके अधिकारी व कर्मचारी आपको ऐसा केस में फंसायेंगे कि आपकी जिंदगी तबाह हो जायेगी, आप का पूरा जीवन अदालत का चक्कर काटते बीत जायेगा।

ताजा मामला हजारीबाग के बरकट्ठा का है, जहां विगत सोमवार को मुख्यमंत्री जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान शहंशाह-ए-झारखण्ड यानी राज्य के होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास  भाषण दे रहे थे, वहां दो युवकों ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के संबोधन के दौरान ही सड़क एवं विकास योजना आदि से संबंधित सवाल कर दिये, फिर क्या था? शहंशाह-ए-झारखण्ड नाराज हो गये, यहीं नहीं, वे तमतमा भी गये, कि आखिर इन दोनों युवकों की हिम्मत कैसे हो गई, कि वो शहंशाह-ए-झारखण्ड से सवाल पूछ दे।

जैसे ही सभा समाप्त हुई, देर रात शहंशाह-ए-झारखण्ड की आज्ञाकारी पुलिस ने उक्त दोनों युवकों बुधन महतो और केला रविदास को हिरासत में ले लिया और सभा में व्यवधान डालने के आरोप में थाने में मामला दर्ज कराकर धारा 107 के आरोप में अनुमंडलीय न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया, जहां आरोपियों को जमानत मिल गई। इस घटना की चर्चा पूरे हजारीबाग में चल रही हैं, पर इससे संबंधित समाचार को शहंशाह-ए-झारखण्ड के नक्शे-कदम पर चलनेवाली अखबारों-चैनलों ने खा-पीकर पचा लिया, लेकिन एक धनबाद से प्रकाशित अखबार आवाज ने अपने यहां जगह दे दी, जिससे ये खबर बड़ी तेजी से वायरल हो रही हैं।

राजनीतिक पंडितों की मानें, तो आजकल जो शहंशाह-ए-झारखण्ड के चेहरे पर से जो नूर गायब हैं, उसका कारण यहीं है कि सीएम को आभास हो गया है कि भले ही टिकट के लालच में उनके छुटभैये भाजपाई नेता उनकी सभा में भीड़ जुटा दें, पर सच्चाई यहीं है कि जनता की नजरों में उनकी औकात दो कौड़ी की भी नहीं, तभी तो लोग सवाल दाग रहे हैं, और वे सवाल का जवाब न देकर, उन्हें अदालत की चक्कर काटने पर मजबूर कर रहे हैं।

राजनीतिक पंडितों का यह भी कहना है कि अगर शहंशाह-ए-झारखण्ड ने अपने रवैये में तब्दीली नहीं की तो एक बहुत बड़ा वर्ग जो युवाओं का हैं, उनमें सीएम रघुवर दास के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा हैं, जो आनेवाले समय में भाजपा के लिए एक बहुत बड़ा सिरदर्द बन सकता है, क्योंकि सभा में जुटी भीड़ वोट में तब्दील ही हो जाये, इसकी संभावना मात्र पांच से दस प्रतिशत ही होती है, लेकिन इन सभाओं में जो दृश्य उत्पन्न होते हैं, उसका प्रभाव 90 से 95 प्रतिशत तक हो जाता हैं, शायद इस बात की जानकारी भाजपाइयों को नहीं हैं, या हैं भी तो उसे घमंड में भूलने की कोशिश कर रहे हैं।

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