नोट पकड़ो और बाइक के साथ जन आशीर्वाद यात्रा में शामिल हो और बोलो अबकी बार 65 पार

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लीजिये, जब जन आशीर्वाद यात्रा में भीड़ नहीं जुटी तो भाजपा नेताओं ने पैसों का सहारा लिया, खुब जमकर दोनों हाथों से रुपये लूटाए गये तथा रुपयों के खातिर सब कुछ करनेवालों ने इसका जमकर रसास्वादन किया तथा बेइमानी के रास्ते, बेइमानी के कार्यों में भी शत प्रतिशत ईमानदारी दिखाई तथा बाइक लेकर मुख्यमंत्री के जन-आशीर्वाद यात्रा में खुद को शरीक किया।

आश्चर्य है कि भाजपाइयों द्वारा रुपये लेने-देने का विडियो कल से ही विभिन्न सोशल साइटों पर डाला हुआ हैं, लोग रसास्वादन कर रहे हैं, भाजपा नेताओं की खिल्लियां उड़ा रहे हैं, पर धनबाद से प्रकाशित अखबारों को पलटे तो उन्हें शहंशाह-ए-झारखण्ड की जन-आशीर्वाद यात्रा में खुदा का नूर दिखाई पड़ रहा हैं।

धनबाद से प्रकाशित सभी प्रमुख अखबारों-चैनलों ने शहंशाह-ए-झारखण्ड के आगे खुद को बिस्तर की तरह परोस दिया हैं। आश्चर्य है कि कल धनबाद परिसदन के बाहर बड़ी संख्या में नव-चयनित होमगार्ड के जवानों ने अपने प्रशिक्षण के लिए सीएम रघुवर से मिलने को ठानी, पर सीएम रघुवर ने अपने स्वभावानुसार मिलने से इनकार कर दिया।

धनबाद परिसदन के बाहर नव-चयनित होमगार्ड के जवानों ने प्रदर्शन तक किया, पर इस प्रमुख समाचार को भी कई अखबारों ने इस प्रकार पचा लिया, जैसे लगता है कि धनबाद परिसदन में कुछ हुआ ही नहीं, यानी ये हैं आज की बिकी हुई पत्रकारिता, बिके हुए लोग और बिकने को तैयार वे सभी लोग, जो सत्य की जगह असत्य को प्रतिष्ठित करने में लगे हैं।

कमाल है रात का समय हैं, एक-एक कर बाइक निकलती जा रही हैं, बाइक सवार बिना हेलमेट का हैं, भाजपा पंडाल में अबकी बार 65 पार लिखा टीशर्ट पहना भाजपा कार्यकर्ता बाइक सवार का चेहरा देखता है और नोट थमाता हैं, बाइक सवार मुस्कुराता हुआ उस नोट को अपने जेब में डालता है और आगे की ओर निकल जाता है, यानी कितनी पारदर्शिता भाजपाइयों ने अपनाई, ये लेन-देन में भी, वह सारे राजनीतिक दलों जो अनैतिकता अपनाकर, जनता की आंखों में धूल झोंककर राजनीति करने को लालायित हैं उनके लिए यह अनुकरणीय है, पर भारत और झारखण्ड जैसे राज्यों के लिए कलंक है।

मुख्यमंत्री जन-आशीर्वाद यात्रा की रिपोर्टिंग बहुत अच्छी हो, उसके लिए स्थानीय नेताओं ने अखबारों-चैनलों को मुंहमांगी रकम तक थमा दी हैं, और उसका प्रभाव चैनलों में तो कल ही दिख गया, जबकि धनबाद से प्रकाशित अखबारों में आज स्पष्ट दिख रहा हैं, आप कोई अखबार देखें, अखबारों से जनता गायब है, जनता की समस्या गायब है, अगर कोई हैं तो सिर्फ और सिर्फ रघुवर तथा उनके नाम पर राजनीति कर रहे भाजपा के सांसद, विधायक और उनके स्वपोषित छुटभैये नेता व कार्यकर्ता।

कल तो देखने में यह भी आया कि शहंशाह-ए-झारखण्ड का दिव्य दर्शन के लिए धनबाद के कई पत्रकार धनबाद परिसदन में मौजूद थे और शहंशाह-ए-झारखण्ड रघुवर दास के साथ एक सेल्फी हो जाये, इसके लिए वे उनसे मनुहार भी कर रहे थे। सीएम रघुवर दास ने तुरन्त ही इन कथित पत्रकारों द्वारा हो रहे मनुहार को स्वीकार किया और उन्हें अपने साथ सेल्फी लेने की इजाजत दे दी, फिर क्या था?

सारे कथित पत्रकार उछल पड़े और स्वयं को भाग्यशाली मानते हुए, उन तस्वीरों को फेसबुक पर चिपकाना शुरु कर दिया, जबकि दूसरी ओर धनबाद परिसदन के बाहर अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे होमगार्ड के नव-नियुक्त जवानों से मिलने के लिए न तो सीएम रघुवर के पास समय था, और न ही उन कथित पत्रकारों के पास उनकी समस्याओं को जनता और न ही सरकार-ए-बहादुर के पास पहुंचाने का वक्त था, यानी दोनों अपनी-अपनी गरिमा को अपने क्षुद्र स्वार्थ की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखे।

लोग कहते है कि कानून अंधा होता है, एक तो फिल्म भी बनी है – अंधा कानून, पर यहां तो शहंशाह-ए-झारखण्ड के आगे, पत्रकार और पत्रकारिता भी अंधी हो गई, तो भला जनहित के समाचार कहां दिखेंगे, चलिए आज आपने धनबाद, सिंदरी, झरिया और बलियापुर का नजारा लिया और कल धनबाद और बाघमारा का अखबारों में नजारा लिजिये, चैनल पर तो ये नजारा आज ही दिख जायेंगे, लेकिन टीवी तथा अखबारों के पीछे की सच्चाई का सच तो हम यानी आपको विद्रोही24. कॉम तो जरुर ही दिखायेगा…

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