राजनीति

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त्रिपुरा में मिली अपार सफलता से गदगद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नया डायलॉग सुनिये…

सूर्य उदय काल तथा अस्तकाल में लाल ही होता है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को सुख-दुख में समभाव में रहना चाहिए, पर हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को देखिये, त्रिपुरा में उन्होंने वामपंथी ईमानदार मुख्यमंत्री माणिक सरकार की सरकार को पराजित क्या कर दिया? धइले नहीं धरा रहे हैं। खूब उछल रहे हैं। उनके पांव जमीन पर नहीं हैं, दिये जा रहे हैं, और जब प्रधानमंत्री ही इस उपलब्धि पर धइले नहीं धरा रहे हैं तो उनके भक्त लोग क्या करेंगे?

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होली का असर, चौथे दिन ही आजसू छात्र संघ का आमरण अनशन ‘टे’ बोल दिया

स्थानीय व नियोजन नीति में संशोधन को लेकर मोराबादी मैदान में लेटे आजसू छात्र संघ के नेताओं का आमरन अनशन चौथे दिन यानी 1 मार्च को ही ‘टे’ बोल गया, चूंकि 2 मार्च को होली थी, और होली के दिन कौन ऐसा छात्र, युवा या नेता होगा जो होली का मजा न ले, इसलिए बहुत ही गोपणीय ढंग से इस आमरन अनशन को तुड़वाने के लिए सम्मानजनक रास्ता निकलवाया गया, भाजपा और आजसू के सत्तारुढ़ दल के नेता मोराबादी मैदान पहुंचे, जूस पिलवाया।

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राजबाला वर्मा, जिसके आगे झारखण्ड के सीएम रघुवर की एक न चली

राजबाला वर्मा एक ऐसी मुख्य सचिव, जिसने झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के होश ठिकाने लगा दिये। राजबाला वर्मा, जब तक मुख्य सचिव पद पर रही, उन्होंने कभी भी मुख्यमंत्री रघुवर दास की बात नहीं मानी और किया वहीं, जो राजबाला वर्मा को अच्छा लगा।

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स्थानीयता के नाम पर आजसू का जनता को उल्लू बनाने का प्रयास

आजसू के नेता झारखण्ड में रह रहे नागरिकों एवं युवा वर्ग को उल्लू समझते हैं। ये समझते है कि दुनिया की जितनी अक्लमंदी है, बस उन्हीं के अंदर आकर स्थापित हो गई है, और इसका लाभ सिर्फ वे ही उठा सकते हैं, बाकी जितने भी यहां के लोग हैं, मूर्ख हैं, और इन लोगों को बेवकूफ बनाना, उनका जन्मसिद्ध अधिकार है।

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सुधीर त्रिपाठी को CS बनाकर, भाजपा से रुठे ब्राह्मणों को मनाने की कोशिश

सुधीर त्रिपाठी झारखण्ड के नये मुख्य सचिव बनाये गये है। इसकी अधिसूचना आखिरकार रघुवर सरकार ने जारी कर दी। अधिसूचना जारी होते ही इस बात की संभावना सदा के लिए समाप्त हो गई, जिसमें कहा जा रहा था कि राजबाला वर्मा को कुछ महीनों के लिए एक्सटेंशन दिया जा सकता है।

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झारखण्ड में भ्रष्टाचार और बेईमानों के खिलाफ अकेला लड़ रहा मंत्री सरयू राय

रघुवर सरकार में कहने को तो दस मंत्री हैं, पर पुरुषार्थ से भरा सिर्फ एक ही मंत्री है, जिनका नाम है सरयू राय, जो खुलकर सत्य बोलने का साहस रखते हैं, बाकी सारे मंत्री कौरव सभा में बैठे, उन सभासदों जैसे लगते हैं, जिन्होंने भरी सभा में बैठकर द्रौपदी का लाज लूटता देखा और मौन रहे। क्या ऐसे लोग झारखण्ड की जनता की सेवा कर रहे हैं या जनता को धोखा दे रहे हैं?

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पत्थलगड़ी पर ग्रामीणों को मिला झारखण्ड के सभी दलों का साथ, भाजपा की नींद उड़ी

पत्थलगड़ी पर कांग्रेस, झामुमो, झाविमो, भाकपा, माकपा, भाकपा माले, यहां तक की भाजपा की महत्वपूर्ण सहयोगी आजसू भी ग्रामीणों के साथ हैं, पर भाजपा की विचारधारा इन सबसे अलग है। भाजपा के लोग, यहां तक की मुख्यमंत्री इन दिनों पत्थलगड़ी में लगे ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं को देश विरोधी करार दे रहे हैं, यही नहीं, इन्हें देश-विरोधी करार देकर, इन्हें कुचलने की बात भी कह रहे हैं,

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मंत्री सीपी सिंह ने बस ऑनर्स एसोसिएशन द्वारा बढ़ाये गये किराये को अवैध करार दिया

संजीव कुमार लाल का कहना है कि झारखण्ड राज्य के अंदर बस भाड़ा नियत करने की शक्ति (जिसके अंतर्गत अधिकतम तथा न्यूनतम किराया और माल भाड़ा नियत करना भी है) मोटरयान अधिनियम 1988  की धारा 67 की उपधारा (1) के खण्ड (1) में राज्य सरकार में निहित है, बगैर राज्य सरकार की सहमति के बस ऑनर्स एसोसिएशन के द्वारा राज्य में बसों के किराये में बढ़ोत्तरी करना बिल्कुल गलत तथा अवैध है।

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मैंने आप पर कृपा लूटाई, अब आप हम पर कृपा बनाये रखियेगा, और क्या कहूं?

दिल्ली व झारखण्ड में क्या अंतर हैं? दिल्ली और झारखण्ड में सिर्फ इतना ही अंतर है कि दिल्ली का सीएस अपने अपमान का बदला लेने के लिए अरविन्द केजरीवाल सरकार से टकरा रहा है, संघर्ष कर रहा है, जबकि झारखण्ड के सीएस के सम्मान की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास विपक्ष ही नहीं बल्कि अपने लोगों भी से टकरा जा रहा है, और उसे हर प्रकार से क्लीन चिट दिलवाकर सदा के लिए विभिन्न आरोपों से मुक्त कर देने का दुस्साहस भी करता है।

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ज्यादातर प्रमुख अखबारों से ‘नीतीश कुमार’ प्रथम पृष्ठ से गायब

एक समय था, जब नीतीश कुमार रांची आते तो एक अखबार जो स्वयं को अखबार नहीं आंदोलन कहता है, उसमें नीतीश कुमार की खबरें प्राथमिकता के आधार पर प्रथम पृष्ठ पर हुआ करती, पर आज आश्चर्य है कि उक्त अखबार में आज नीतीश कुमार अंदर के पेजों पर विद्यमान हैं।

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