पूरे देश से जुटे शाकद्वीपीय बंधु, गया में मग मिलन महोत्सव का हुआ आगाज

गया में आज से दो दिवसीय मग मिलन महोत्सव का आगाज हुआ। इसका उद्घाटन स्वामी शैलेन्द्रानन्द सरस्वती ने किया। इस मग मिलन महोत्सव में राजस्थान, असम, बिहार, झारखण्ड समेत बंगाल आदि में रह रहे शाकद्वीपीय बंधुओं ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए स्वामी शैलेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख हैं, कि आज दूसरा समाज अपने हक की लड़ाई के लिए एकताबद्ध होकर संघर्ष कर रहा हैं,

गया में आज से दो दिवसीय मग मिलन महोत्सव का आगाज हुआ। इसका उद्घाटन स्वामी शैलेन्द्रानन्द सरस्वती ने किया। इस मग मिलन महोत्सव में राजस्थान, असम, बिहार, झारखण्ड समेत बंगाल आदि में रह रहे शाकद्वीपीय बंधुओं ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए स्वामी शैलेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख हैं, कि आज दूसरा समाज अपने हक की लड़ाई के लिए एकताबद्ध होकर संघर्ष कर रहा हैं, पर हमारा शाकद्वीपीय समाज एकताबद्ध न होकर, आज भी एक दूसरे से भिड़ने में ही ज्यादा समय लगा रहा है, उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि इतिहास से सीखिये कि आखिर चाणक्य ने चंद्रगुप्त को ही मगध का बागडोर संभालने के लिए क्यों चुना? क्या उसके समाज में चंद्रगुप्त के जैसा व्यक्ति कोई नहीं था? उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है, कि जिस चीज के लिए शाकद्वीपीय समाज जाना जाता था, वह उस चीज की ओर ध्यान नहीं दे रहा, आज उन चीजों पर शोध दूसरे समुदाय के लोग कर रहे हैं और अपना शाकद्वीपीय समाज बिना कुछ किये ही सम्मान प्राप्त करने की सोच रख रहा हैं, ऐसे में ये समाज कैसे आगे निकलेगा, समझने की जरुरत हैं, विचार करने की जरुरत है।

राजस्थान से आई डा. कामिनी भोजक पूरे मग मिलन समारोह में अपने बातों तथा संभाषण के कारण चर्चा में बनी रही। उन्होंने शाकद्वीपीय समाज से अपील की कि वे बेकार की बातों में समय न गवाएं, मुस्कुराते रहे, संघर्ष करते रहे, अच्छाइयों को अपनाते रहे, हमेशा ये सोचे कि कोई व्यक्ति, कोई संगठन विपरीत परिस्थितियों में कैसे स्वयं को निखार रहा है, अगर वह स्वयं को निखार रहा हैं, और बेहतर कर रहा है, तो यह चीज सीखने की जरुरत हैं, और स्वयं को और बेहतर बनाने की जरुरत हैं।

संज्ञा समिति एवं सूर्य पूजा परिषद के फाउंडर मेंबर और संरक्षक नागेन्द्र पाठक ने शाकद्वीपीय बंधुओं से स्पष्ट रुप से कहा कि महत्वपूर्ण ये नहीं कि इस मगमिलन समारोह में कितने लोग उपस्थित हैं, महत्वपूर्ण ये है कि इसमें कितने लोग सजग और कितने लोग क्रियाशील है, उन्होंने एक सुप्रसिद्ध लोकोक्ति से  उन बातों को सिद्ध किया जो हमारे समाज में काफी वर्षो से प्रचलित है…पंक्तियां थी… येषां न विद्या न तपो न दानं, न ज्ञान शीलं न गुणो न धर्मः, ते मर्त्यभूमे भूवि भारभूता। मनुष्य रुपेण मृगाश्चरन्ति।

मग मिलन महोत्सव को संज्ञा समिति गया को छोड़कर बिहार व झारखण्ड की कई शाकद्वीपीय सगंठनों ने समर्थन दिया। झारखण्ड सार्वभौम शाकद्वीपीय ब्राह्मण महासभा के संरक्षक हरिहर पांडेय, अध्यक्ष ब्रज बिहारी पांडेय, मंत्री गोपाल पाठक ने भी इस महोत्सव की सराहना की तथा इसके उद्देश्यों को मग हित में बताया।

इधर संज्ञा समिति के एक गुट ने कहा है कि गया में हो रहे मग मिलन महोत्सव के कार्यक्रम को उनका नैतिक समर्थन नहीं है, फिर भी जो बाहर के लोग गया में आ रहे है, उन्हें अगर किसी भी चीज की आवश्यकता हो, तो उनकी समिति उन्हें हर प्रकार का सहयोग करने को तैयार है, इस गुट ने सहयोग करनेवाले व्यक्तियों के नाम व दूरभाष नंबर भी जारी किये, जिसकी जानकारी संज्ञा समिति के एक गुट के प्रवक्ता उदय मिश्र ने दी।

इधर संज्ञा समिति मदनपुर के प्रखण्ड अध्यक्ष जगनारायण पाठक ने बिना वैधानिक प्रकिया एवं बिना वोटर लिस्ट जारी किये हो रहे संज्ञा समिति के चुनाव की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने संज्ञा समिति के केन्द्रीय कमेटी में शामिल लोगों से अपील की कि वे मनमानी न करें या इसे जेबी संस्था न बनाये, 40 वर्ष की पुरानी संस्था को बर्बाद करने से बाज आये।

गोपाल पाठक ने कहा कि एक सच्चा आदमी, किसी से नफरत नहीं करता, वह सब की इज्जत करता है, और सब से इज्जत पाता है, उन्होंने कहा फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती है, लेकिन एक व्यक्ति की अच्छाई हर दिशा में फैलती है। उन्होने यह भी कहा कि एकता मिट्टी ने की तो ईंट बनी, ईंट ने की तो दीवारें बनी, दीवार ने की तो घर बना, ये सब बेजान चीजें है, ये जब एक हो सकते है तो हम तो इंसान है।

 

Krishna Bihari Mishra

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