पुनर्विचार याचिका पर तुंरत सुनवाई से इनकार कर सुप्रीम कोर्ट ने बताया हमारे लिए देश महत्वपूर्ण

आइये एक कहानी सुनाते है, एक गांव था। उस गांव में एक बहुत बड़ा गुंडा रहा करता था। उसके गुंडई से पूरे गांव के लोग और महिलाएं परेशान थी। उस गुंडे के आतंक से बचने के लिए, गांव के लोगों और महिलाओं ने अपने ही गांव में पनप रहे एक नये गुंडे को मजबूत करना शुरु किया, ताकि वे वर्तमान गुंडे से बच सकें, फिर क्या था नये वाले गुंडे की भाव बढ़नी शुरु हुई, नये गुंडे ने जल्द ही पुराने गुंडे का सफाया कर दिया।

आइये एक कहानी सुनाते है, एक गांव था। उस गांव में एक बहुत बड़ा गुंडा रहा करता था। उसके गुंडई से पूरे गांव के लोग और महिलाएं परेशान थी। उस गुंडे के आतंक से बचने के लिए, गांव के लोगों और महिलाओं ने अपने ही गांव में पनप रहे एक नये गुंडे को मजबूत करना शुरु किया, ताकि वे वर्तमान गुंडे से बच सकें, फिर क्या था नये वाले गुंडे की भाव बढ़नी शुरु हुई, नये गुंडे ने जल्द ही पुराने गुंडे का सफाया कर दिया और उस स्थान पर खुद को बिठा लिया, फिर क्या था अब इस नये गुंडे ने वहीं हरकत करनी शुरु कर दी, जो पुराना गुंडा किया करता था, अब बेचारे गांव वाले और महिलाएं क्या करें? एक नई मुसीबत फिर उनके सामने आकर खड़ी हो गई।

ये कहानी आज के भारत की है। कल भारत बंद के नाम पर जिस एक वर्ग ने पूरे देश में बवंडर खड़ा किया, हिंसक आंदोलन किये, जिसमें 9 लोगों की जान चली गई, कई लोग घायल हो गये और ऐसे हिंसक आंदोलन को जिस प्रकार देश की सभी विपक्षी पार्टियों ने उनका समर्थन किया, वो बताता है कि आनेवाले भारत का भविष्य कितना सुखद और कितना उज्जवल है? इन बंद समर्थकों में से कुछ ऐसे भी पत्रकार थे, जो सोते-उठते भाजपा को गाली देने से नहीं चूकते, उन्हें भाजपा और उनसे संबंधित लोगों की कभी-कभी अच्छाइयों में भी गुंडई दीखती है, पर कल हुई गुंडई में उनको भारत की उज्जवल तस्वीर दीख रही थी, खैर ठीक हैं, हर व्यक्ति को अपनी सोच जनता के सामने रखने की छूट हैं, अगर वह अपने विचार को नहीं रखेगा तो पता कैसे चलेगा कि उसके अंदर किस प्रकार का शैतान बैठा हैं?

हमारे विचार से गुंडई तो गुंडई हैं, चाहे वह सवर्ण करें या दलित। गुंडई को कोई अपने पक्ष में सत्य के साथ स्थापित करना चाहेगा, तो हम उसका विरोध जरुर करेंगे। हम बधाई देंगे, भारत की सर्वोच्च न्यायालय को उसके द्वारा दिये गये एक फैसले के बाद पूरे देश में 2 अप्रैल को जो गुंडई हुई, उसके आगे वह झूकी नहीं, अगर वह झूक जाती तो पूरे देश में इस प्रकार की गुंडई करनेवालों को छूट मिल जाती और फिर दूसरा वर्ग ऐसा ही गुंडई करने को विवश हो जाता और फिर शुरु होता, देश में गुंडई पर्व/उत्सव का एक नया अध्याय।

कल जिस प्रकार से केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की, वह उसकी मजबूरी को दर्शाता हैं, पर सर्वोच्च न्यायालय भी मजबूर हो जाता तो निश्चय ही इससे गलत संदेश जाता। कल सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने ठीक ही कहा कि कि इस याचिका पर उचित समय पर विचार किया जायेगा, यानी इस प्रकार कोर्ट ने तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर कल गुंडई करनेवालों को एक प्रकार का संदेश दे दिया कि सरकार झूक सकती है, पर न्यायालय को इस प्रकार की गुंडई कर झूकाया नहीं जा सकता।

सचमुच अगर सर्वोच्च न्यायालय इस प्रकार की कल फैसले नहीं लेती तो गुंडई द्वारा अपने सामने न्यायालय को झूकाने की नई प्रवृत्ति से न्यायालय पर भरोसा करनेवालों का भरोसा टूट जाता तो फिर पूरे देश में न्यायालय के प्रति जो लोगों का सम्मान हैं, वह पूर्णतः समाप्त हो जाता, सचमुच सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय का हम सम्मान करते हैं। गुंडई कोई करें, उसकी आलोचना होनी चाहिए, हम तो यह भी चाहेंगे कि जिनकी गुंडई के कारण पूरे देश में जो जान-माल का नुकसान हुआ, उसकी भरपाई भी उन्हीं लोगों से की जाय, ताकि कोई दल या कोई संस्था इस प्रकार की गुंडई करने के पहले दस बार सोचे।

Krishna Bihari Mishra

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