लानत है, आपकी सोच पर निशिकांत दूबे, आप पहले कृष्ण को समझे, तब उनका दृष्टांत दें

गोड्डा के सांसद निशिकांत दूबे, आप किसको लानत भेज रहे हो, लानत तो आपको आनी चाहिए, पहले आप बताओ कि अगर आप सही थे, तो बार-बार अपना पोस्ट क्यों अपडेट करते रहे? इसका मतलब है कि आपको लगा कि कहीं न कहीं गड़बड़ियां हुई हैं? आप कहते हो कि ‘पैर धोना तो झारखण्ड में अतिथि के लिए होता है’, सही है यह अतिथि के लिए होता है, पर आप बताओ,

गोड्डा के सांसद निशिकांत दूबे, आप किसको लानत भेज रहे हो, लानत तो आपको आनी चाहिए, पहले आप बताओ कि अगर आप सही थे, तो बार-बार अपना पोस्ट क्यों अपडेट करते रहे? इसका मतलब है कि आपको लगा कि कहीं न कहीं गड़बड़ियां हुई हैं? आप कहते हो कि ‘पैर धोना तो झारखण्ड में अतिथि के लिए होता है’, सही है यह अतिथि के लिए होता है, पर आप बताओ, जहां आपका पांव पखारा गया, जहां आपके पैर से धूले जल को पीया गया, उस इलाके के लिए आप अतिथि थे, या जनप्रतिनिधि?

एक तरफ आपकी ही पार्टी का व्यक्ति जो भारत का प्रधानमंत्री हैं, वह खुद को चाय बेचनेवाला बताता है, वह खुद को सेवक बताता है, वह खुद कही जाता है तो वह जनता जनार्दन का पांव छूता है, वह अपना पांव नहीं छूलवाता/धुलवाता, ये आप कैसे भूल गये? और लगे हाथों आप ये बताओं कि आपको ये किसने बता दिया कि एक सांसद/एक जनप्रतिनिधि अपने इलाके का अतिथि होता है?

कहां से आपने इन बातों की शिक्षा ले ली? अरे आपने तो उस शिक्षक का ही अपमान कर दिया, जिसने आपको पढ़ाया, आज ही इसे समझने की कोशिश करे, कि जनप्रतिनिधि सिर्फ और सिर्फ जनता का सेवक होता है, न कि अतिथि और गोड्डा में कही भी जाओ, तो आप अपने आपको अतिथि मत मानो, सिर्फ और सिर्फ जनता का सेवक मानो, ये जो खुद को सर्वश्रेष्ठ मानने की, जो आपकी मानसिकता है, उससे उपर उठो।

आप लिखते हो कि अपने पुरखों से पूछिये, ‘महाभारत में कृष्ण जी ने क्या पैर नहीं धोया?’ बेशक धोया, पर किसी से अपना पैर धुलवाया नहीं। बेशक धोया, पर गरीब सुदामा के पैर धोये, सुदामा से पैर धुलवाया नहीं और न ही अपना चरणोदक उसे पीने दिया। बेशक उन्होंने युद्धिष्ठिर द्वारा किये गये राजसूय यज्ञ में सभी के चरणपादुका उठाये, उनके चरण धोये, पर एक भी प्रसंग बताओ, जहां श्रीकृष्ण ने अपने पैर धुलवाये हो या अपने चरणोदक पिलवाये हो। आप सभी को जो मूर्ख समझने की कोशिश कर रहे हो, न इससे उबरने की कोशिश करो, नहीं तो आपको दिक्कत होगी, हर पत्रकार या हर कार्यकर्ता या हर भारत का नागरिक आपके जैसा लोल नहीं होता।

और ये क्या हिन्दू-मुस्लिम इसमें भी लगा कर रख दिया, आप कहते हो ‘कमरगामा में जब मुस्लिम मुझे जला रहे थे तो शीतल, अमन व विष्णु जी ही किरासन तेल अपने उपर डलवा रहे थे’ क्या कोई डकैत, अपराधी या बदमाश अगर हिन्दू समुदाय से आता है तो सारे के सारे हिन्दू समुदाय को आप दोषी ठहरा दोगे या उसे दोषी ठहराओगे, जिसने गलत किया? लानत तो आपकी सोच पर है कि आप सांसद कैसे बन गये?  जरुर तिकड़म किये हो, क्योंकि बिना तिकड़म के सांसद आप बन ही नहीं सकते? लानत है आपकी सोच पर…

Krishna Bihari Mishra

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