अपनी बात

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धिक्कार उस पिता को, जिसका बेटा ये कहे कि पिता उसकी बात नहीं मान रहा तो हम पिता की बात क्यों माने?

‘जब उनके पिता उनकी बात नहीं मान रहे तो वह उनकी बात क्यों माने’, हां भाई, बात में दम तो हैं, जब बाप बेटा का बात नहीं माना, तो ये आज्ञाकारी बेटा बाप की बात क्यों माने? ये डॉयलॉग है बिहार के एक समय तेज तर्रार नेता रहे और वर्तमान में चारा घोटाला में सजा काट रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के सुयोग्य बड़े बेटे तेज प्रताप का, जब जनाब रांची से पटना के लिए निकल रहे थे।

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तेज प्रताप प्रकरण पर लालू प्रसाद का परिवार ‘घर फूटे गवांर लूटे’ लोकोक्ति का शिकार

फिलहाल पूरे देश में जो प्रमुख राजनीतिक दल हैं, वे आसन्न लोकसभा चुनाव को लेकर, अभी से ही जोर-आजमाइश में लगे हैं, अपने प्रतिद्वंदियों को पटकनी देने के लिए नाना प्रकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए राजनीतिक पैतरें ढूंढ रहे हैं, इधर स्वयं बिहार में भाजपा और जदयू ने अपनी सारी वैचारिक मतभेदों को भूलाकर, बिहार में लालू प्रसाद की पार्टी राजद के खिलाफ सशक्त मोर्चाबंदी कर दी हैं,

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अगर आप सोच रहे हैं कि नवम्बर-दिसम्बर में ठंड उतना नहीं पडे़गा तो आप गलत है, क्योंकि नक्षत्र…

जब हमें पिछले दिनों अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में विभिन्न समाचार माध्यमों से जानकारी मिली कि ‘नवंबर और दिसंबर इस बार तपेंगे। दिसंबर में तेज ठंड नहीं पड़ेगी। अक्टूबर और नवंबर में दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा बना रहेगा। कड़ाके की सर्दी जनवरी में ही पड़ेगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अलनीनो के असर के कारण ऐसा होगा। इसका असर सर्दी के मौसम की तिमाही पर अक्टूबर से दिसंबर तक पड़ेगा’। तो मेरे कान खड़े हो गये।

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फिलहाल कुछ दिनों तक ट्रेन से भागलपुर या पटना की ओर परिवार के साथ यात्रा न करें तो ही अच्छा

इन दिनों रेलवे ग्रुप डी की बहाली के लिए हो रही परीक्षा में भाग लेने के लिए बिहार और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का समूह रांची पहुंच रहा है। ये अभ्यर्थी बड़ी संख्या में विभिन्न ट्रेनों से रांची पहुंच रहे हैं, जिस कारण पिछले कई दिनों से जो भी यात्री रात को हटिया-रांची स्टेशन से खुलनेवाली रांची भागलपुर एक्सप्रेस या रांची पटना एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे हैं, उनके पसीने छूट जा रहे हैं,

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राहुल के मंदिर दौरे से घबराई भाजपा और संघ ने राममंदिर आंदोलन को दी हवा, भाजपाइयों ने निकाले पुराने फोटो

उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने बयान दिया, और इधर भाजपाइयों ने 1992 के वे पुराने फोटो निकालने शुरु किये, जो अयोध्या आंदोलन से जुड़े थे। भैय्या जी जोशी ने आज बयान दिया है कि राम मंदिर पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी से हिन्दू स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं, उनका कहना था कि संघ ने कभी भी न्यायालय के निर्णयों की उपेक्षा नहीं की,

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सीखिये पाक सुप्रीम कोर्ट से, पाकिस्तान में आसिया के पक्ष में फैसला सुनाना इतना भी आसां नहीं था

पूरा पाकिस्तान जल रहा है, पाकिस्तान की सरकार देश में फैले कट्टरपंथियों के जमात द्वारा फैलायी गयी कट्टरपंथी जनाक्रोश को झेलने को मजबूर है। देश के अंदर फैली इस कट्टरपंथी आग से पाकिस्तान को पूरे विश्व में जलालत झेलनी पड़ रही है, आसिया बीबी सुप्रीम कोर्ट से मिली न्याय से खुश है, पर खुद और उसका परिवार देश में फैले उसके खिलाफ जनाक्रोश से डरा हुआ है, और पाकिस्तान छोड़कर किसी दूसरे देश में बस जाना चाहता है,

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गवर्नर फटकार लगावे, CM रघुवर मेला दिखावे, ‘झारखण्ड’ गेंदा फूल

भाई, सीएम रघुवर दास और डीजीपी डी के पांडेय के बीच कितना प्रेम हैं, कितना मुहब्बत है, वो देखने को मिला, जैप ग्राउंड में चल रहे इप्सोवा दीपावली मेले में जहां सीएम रघुवर दास ने डीजीपी डी के पांडेय के प्रति अपने दिल में बैठे प्रेम के गुब्बारे को इस प्रकार फोड़ा कि, वो गुब्बारे में सिमटे गुलाब की पंखुड़ियों के गाल सुर्ख लाल हो उठे।

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सलाम दोस्त तुम्हारी बहादुरी को, सलाम उस मां को, जिसने तुम्हें जन्म दिया, तुमने तो चंद मिनटों में…

वे बंदूक की गोलियों से दहशत फैलाना चाहते हैं। वे बंदूक की गोलियों से दहशत फैलाकर सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं। उनके लोग अब गांवों से लेकर शहरों तक बसते हैं, और इन नक्सलियों को वैचारिक खुराक देते हैं, पर अच्यूतानन्द साहू की नक्सलियों द्वारा की गई नृशंस हत्या पर चुप्पी साधे हुए हैं। उनसे आप इसके अलावा कुछ दूसरे चीज की उम्मीद भी नहीं कर सकते, क्योंकि न तो उन्हें गांधीवाद पर भरोसा है और न ही भारतीय लोकतंत्र पर,

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सरदार पटेल को आगे कर, इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को रबर से मिटाने का प्रयास

ये जो राजनीतिक विद्वेष के कारण एक महान नेतृ श्रीमती इन्दिरा गांधी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा हैं, यह देश के लिए दुर्भाग्य ही नहीं, बल्कि चिन्ताजनक है, राजनीतिज्ञों की आपसी कटुता से देश का भविष्य प्रभावित हो जाये, ये किसी भी प्रकार से सही नहीं, अगर किसी को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती याद है, तो उसे श्रीमती इन्दिरा गांधी की पुण्यतिथि भी याद रहनी चाहिए।

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जो कुछ नहीं करता वह मुर्तियां बनाने और खुद के प्रचार में लगा रहता हैं और जो देश बनाते हैं…

आज सरदार पटेल जिंदा होते, तो हम उनसे जरुर पूछते कि सरदार पटेल जी आपने अपनी जिंदगी में कितनी मूर्तियां बनाई और अपने प्रचार-प्रसार पर कितनी राशियां खर्च की? पर अफसोस वे अब इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए हमारे पास कभी नहीं आयेंगे, पर जहां तक हमें जानकारी है, कि उनके पास मूर्तियां बनाने और उसे स्थापित करने का समय ही कहां था, उनका तो ज्यादा समय किसानों की मदद करने, स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने,

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