जिस CM को, किससे कैसे पेश आना चाहिए, पता ही नहीं हो, उससे आप क्या उम्मीद लगा सकते हैं?
जिस राज्य में झारखण्ड हाइकोर्ट के निर्माण कार्य की लागत मात्र दो साल में ही 265 करोड़ से बढ़कर 699 करोड़ हो जाती है (ज्ञातव्य है कि जब 2016 में रामकृपाल कन्सट्रक्शन प्रा. लि. को टेंडर मिला था, उस समय इस योजना का प्राक्कलन राशि 265 करोड़ रुपये था), जिस राज्य में बिना किसी तरह की स्वीकृति लिये, ठेकेदार को बिना टेंडर के ही काम दे दिया जाता हो, जिस राज्य में, जिस योजना की तकनीकी अनुमोदन ही नहीं मिलना चाहिए
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