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जिस CM को, किससे कैसे पेश आना चाहिए, पता ही नहीं हो, उससे आप क्या उम्मीद लगा सकते हैं?

जिस राज्य में झारखण्ड हाइकोर्ट के निर्माण कार्य की लागत मात्र दो साल में ही 265 करोड़ से बढ़कर 699 करोड़ हो जाती है (ज्ञातव्य है कि जब 2016 में रामकृपाल कन्सट्रक्शन प्रा. लि. को टेंडर मिला था, उस समय इस योजना का प्राक्कलन राशि 265 करोड़ रुपये था), जिस राज्य में बिना किसी तरह की स्वीकृति लिये, ठेकेदार को बिना टेंडर के ही काम दे दिया जाता हो, जिस राज्य में, जिस योजना की तकनीकी अनुमोदन ही नहीं मिलना चाहिए

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निर्लज्जता और बेशर्मी का सारा रिकार्ड तोड़ने को बेकरार झारखण्ड का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग

शायद झारखण्ड सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने संकल्प कर लिया है, कि वह निर्लज्जता और बेशर्मी का सारा रिकार्ड तोड़ कर रख देगा, वह वो सारा काम करेगा, जिसकी इजाजत न तो उसका जमीर देता है और न ही उसका विभाग। कल यानी 29 अक्टूबर को एक बार फिर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने अपनी आदत के अनुसार, आइपीआरडी की सरकारी साइट से आइएएस आफिसर्स की पत्नियों से जुड़ी निजी दीवाली मेला के समाचार का प्रेस रिलीज जारी कर दिया।

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ऐसे होते हैं शिक्षक, ऐसे होते हैं न्यायाधीश और ऐसी होती हैं IAS की पत्नियां, जो दूसरों के…

शनिवार की रात कोई आभास नहीं था। बस मन उचाट था। क्यों, पता नहीं। तब मैंने अपनी प्रकृति के विपरीत लिखा था – ‘जी में है पतवार अब लहरों में डाल दूँ।’ लेकिन शायद उसके पीछे एक खबर थी जो मुझ तक पहुंची नहीं थी। आज पहुंची – मेरे अभिन्न मित्र श्री रंजन खान की पत्नी पुष्पा उस रात चिरंतन लहरों में चली गईं। मैं महसूस कर रहा हूँ, जीवन-वृक्ष के वे पत्ते जो कभी हरे थे, जिनसे मेरी पुरानी पहचान थी, एक एक कर पीले हो रहे हैं,

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काश, झारखण्ड के CM रघुवर दास की सोच भी, राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की तरह होती…

कल की ही बात है, झारखण्ड की राजधानी रांची में राष्ट्रीय युवा शक्ति के बैनर तले, बड़ी संख्या में युवाओं की टीम ने पहाड़ी मंदिर से लेकर राजभवन तक आक्रोश मार्च निकाला। इस आक्रोश मार्च के माध्यम से युवा अपनी बात राज्यपाल महोदया तक पहुंचाना चाहते थे, वे उनसे कहना चाहते थे कि राज्यपाल महोदया, थोड़ा आप इस पर ध्यान दे, हो सकता है कि आपके ध्यान देने से पहाड़ी मंदिर की किस्मत संवर जाये।

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IAS आफिसर्स की पत्नियों को खुश करने के लिए, IPRD कर रहा सरकारी साइटों का दुरुपयोग

चूंकि वे झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रधान सचिव हैं, चूंकि वे मुख्यमंत्री रघुवर दास के बेहद करीबी हैं, चूंकि वे मुख्यमंत्री रघुवर दास के दिल में बसते हैं, चूंकि वे सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के प्रधान सचिव हैं, तो ऐसे में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के नियमों, कायदा-कानूनों से खेलने का अधिकार तो उन्हें प्राप्त हो ही जाता हैं, इसलिए रघुवर दास जब तक झारखण्ड के मुख्यमंत्री हैं,

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रांची की प्रतिष्ठित पहाड़ी मंदिर को बचाने के लिए युवाओं का राजभवन मार्च

पहाड़ी मंदिर को बचाने को लेकर राष्ट्रीय युवा शक्ति के बैनर तले बड़ी संख्या में युवाओं ने पहाड़ी मंदिर से लेकर राजभवन तक आक्रोश मार्च निकाला। यह आक्रोश मार्च राष्ट्रीय युवा शक्ति के अध्यक्ष उत्तम यादव के नेतृत्व में निकाला गया, जिसमें मुख्य रुप से मिसेस जय एशिया रिंकू भगत ने भी भाग लिया। आक्रोश मार्च में शामिल बड़ी संख्या में युवा पहाड़ी मंदिर को बचाने से संबंधित तख्तियां अपने हाथों में लिये थे

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पूरे झारखण्ड से सीएम रघुवर दास का इकबाल समाप्त, जनता को अब 2019 की आस

पूरे राज्य की जनता को 2019 की इंतजार है कि कब 2019 आये, चुनाव आयोग झारखण्ड में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी करें और वर्तमान रघुवर सरकार को ठिकाने लगाएं। झूठ और सिर्फ झूठ पर टिकी रघुवर सरकार को अपने एलइडी तथा झूठे प्रचार तंत्र पर पूरा भरोसा हो गया है, यहां के सीएम रघुवर दास को विश्वास हो गया है कि जिस प्रचार इवेन्ट्स की जादूगरी से नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश को 2014 के लोकसभा चुनाव में अपनी ओर झूका लिया।

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शंघाई टावर का ख्वाब देखनेवाले चाइनीज लाइट का विरोध कर, हमारी आंखों में धूल कब तक झोकते रहेंगे?

सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा चीन से बनवायेंगे, रांची में शंघाई टावर बनाने का जुनून पालेंगे व ढिंढोरा पीटेंगे, चीन जाकर वहां के उद्योगतियों को अपने राज्य में निवेश कराने के लिए नाक रगड़ेंगे और जैसे ही दिवाली आयेगा, यहीं नेता चाइनीज लाइट का विरोध करेंगे, भाषण देंगे और भाषण में कहेंगे कि, दिवाली में चाइनीज लाइट नहीं, मिट्टी के दीये जलायें। शायद भाजपा के नेता भारतीयों को बेवकूफ समझते हैं, तभी तो वे ऐसी-ऐसी हरकतें करते हैं,

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RSS में प्रेस क्लब या प्रेस क्लब में RSS, RSS को प्रेस क्लब में कब से दिलचस्पी होने लगी?

आम तौर पर माना जाता है कि आरएसएस या आरएसएस के लोग प्रचार-प्रसार से दूरी बनाए रखते हैं, वे बहुत कम अवसर पर ही स्वयं को जरुरत के अनुसार प्रकट करते हैं, पर अब चूंकि प्रचार-प्रसार का युग हैं, इसलिए अब शायद RSS व RSS के लोगों ने भी हर छोटी से छोटी बातों में भी खुद को हाइलाइट करने का वो सारा नुस्खा आजमाने में लगे हैं, जो विभिन्न राजनीतिक दलों के क्षुद्र राजनीतिक नेताओं का समूह किया करता हैं।

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बेटिकट यात्रा करनेवाले गुंडों के रहमोकरम पर, शुरु होती हैं रांची जंक्शन से रेलयात्रियों की रेलयात्रा

भारतीय रेल के सलोगन ‘यात्रा मुस्कान के साथ’ के झांसे में जब आयेंगे, तब आप मुसीबत में ही पड़ेंगे, इसलिए मुस्कान को घर पर छोड़ आइये और यात्रा के दौरान ट्रेन में सवार गुंडों के रहमोकरम पर रेल यात्रा करिये, अगर आप गुंडों से टकरायेंगे और ये सोचेंगे कि आरपीएफ के लोग, आपको बचाने आयेंगे, आपको सुरक्षित यात्रा कराने में सहयोग करेंगे, तो इसका मतलब है कि आप निहायत आला दर्जे के मूर्ख है।

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