अफसोस, सत्तारुढ़ दल और राज्य के CM ने सदन को सिर्फ बजट पास कराने का जरिया बना लिया
झारखण्ड विधानसभा का शीतकालीन सत्र समाप्त हो गया, ये सत्र भी आम सत्रों की तरह ही हंगामें की भेंट चढ़ गया, सत्तापक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों ने अपने-अपने ढंग से सदन को चलाने की कोशिश की, पारा टीचरों के आंदोलन तथा बाहरी व्यक्तियों को राज्य में मिल रही नौकरी ही हंगामें के केन्द्र में रहा, पारा टीचरों के मुद्दे पर तो जैसे राज्य सरकार ने संकल्प ही ले रखा है कि पारा टीचरों को सबक सीखा देना है,
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