दिवाली की रात, पटाखों की आवाज और वो घबराई नन्हीं चिड़ियां का मेरे घर आना
दिवाली की रात, यही कोई आठ या नौ बज रहे होंगे। अचानक एक छोटी सी चिड़िया मेरे किराये के मकान के एक कमरे में आ गई। वह बहुत घबराई हुई थी। छोटे से कमरे में वह एक छोर से दूसरे छोर तक उड़ती-फरफराती दौड़ लगा रही थी, कभी वह पंखे के उपर बैठ जाती, कभी लोहे के सिकर पर बैठ जाती तो कभी छोटे से छज्जे पर रखे सामानों पर बैठ जाती। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें? क्या न करें?
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