फिलहाल कुछ दिनों तक ट्रेन से भागलपुर या पटना की ओर परिवार के साथ यात्रा न करें तो ही अच्छा

इन दिनों रेलवे ग्रुप डी की बहाली के लिए हो रही परीक्षा में भाग लेने के लिए बिहार और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का समूह रांची पहुंच रहा है। ये अभ्यर्थी बड़ी संख्या में विभिन्न ट्रेनों से रांची पहुंच रहे हैं, जिस कारण पिछले कई दिनों से जो भी यात्री रात को हटिया-रांची स्टेशन से खुलनेवाली रांची भागलपुर एक्सप्रेस या रांची पटना एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे हैं, उनके पसीने छूट जा रहे हैं,

इन दिनों रेलवे ग्रुप डी की बहाली के लिए हो रही परीक्षा में भाग लेने के लिए बिहार और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का समूह रांची पहुंच रहा है। ये अभ्यर्थी बड़ी संख्या में विभिन्न ट्रेनों से रांची पहुंच रहे हैं, जिस कारण पिछले कई दिनों से जो भी यात्री रात को हटिया-रांची स्टेशन से खुलनेवाली रांची भागलपुर एक्सप्रेस या रांची पटना एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे हैं, उनके पसीने छूट जा रहे हैं, आश्चर्य यह भी है कि जिस 18624 डाउन रांची पटना एक्सप्रेस में कभी रेलवे सुरक्षाकर्मी ट्रेन खुलने के समय विभिन्न डब्बों के गेट पर खड़े होकर बड़े-बड़े टार्चों से लाइट कर मुआयना किया करते थे, वे भी नहीं दिखाई पड़ रहे।

फिलहाल आजकल आप रांची सायं समय रांची स्टेशन पहुंचिये और देखिये नजारा। रांची-भागलपुर वनांचल एक्सप्रेस जैसे ही प्लेटफार्म नं. दो पर आती है, इस ट्रेन के स्लीपर बॉगियों और सामान्य बॉगियों पर कब्जा जमाने के लिए अभ्यर्थियों का समूह टूट पड़ता है, वह इस ट्रेन पर कब्जा जमाने के लिए पटरियों पर भी उतर जाता है, ये लोग यह भी ध्यान नहीं देते कि अगर विपरीत दिशा से ट्रेनें आ गई तो क्या होगा, ये तो खुद ही अपनी जान पर खेलकर, ट्रेनों पर कब्जा जमाने के लिए कानून को तोड़ते ही है, दूसरे को भी आफत पहुंचा देते हैं।

इधर जिनके पास स्लीपर की उचित टिकट होती है, वे इन अभ्यर्थियों के इन हरकतों को देख, अपने परिवार के साथ सिहर उठते हैं, कि यात्रा करें या न करें, ऐसे में जिनको बहुत ज्यादा जरुरी होता है, जैसे-तैसे ट्रेन पर चढ़ते हैं तथा इन अभ्यर्थियों में शामिल लफंगों के फब्तियों के शिकार होकर खून घूंटकर रेलयात्रा करते हैं। ज्यादातर दिक्कतें उन रेलयात्रियों को होती है, जो अपनी बेटियों या अपनी पत्नी के साथ यात्रा कर रहे होते हैं, ये लफंगे ऐसी-ऐसी भाषाओं का रास्ते भर प्रयोग करते हैं, जिसको देखकर कोई भी व्यक्ति अपना आपा खो सकता है।

यहीं हाल 18624 रांची पटना एक्सप्रेस का है, अगर आपके पास स्लीपर बॉगी की टिकट है तो समझ लीजिये, आपको इन बॉगियों में सोना मना है, ये रास्ते भर आपको तंग करेंगे, आपकी बर्थ पर आपको सोना तो दूर, बैठने तक नहीं देंगे और रात भर अपनी गंदी बातों से आपकी यात्रा को कष्टप्रद बना देंगे, हालांकि रांची जंक्शन या  हटिया स्टेशन पर लगे स्पीकर आपको बार-बार सुनायेंगे कि भारतीय रेल आपकी सुखद एवं मंगलमय यात्रा की कामना करता है, पर ये सुखद व मंगलमय यात्रा कैसे संपन्न होगी, इसकी गारंटी नहीं होती।

यहीं नहीं इन अभ्यर्थियों द्वारा रांची जंक्शन के प्लेटफार्म नं चार एवं पांच पर भी गंदगियां फैलाते देखा जा सकता है, पशुवत मल-मूत्र का त्याग, महिलाओं व लड़कियों पर फब्तियां कसना तथा विभिन्न प्लेटफार्मों से होकर गुजरनेवाली ट्रेनों में बैठी महिलाओं या प्लेटफार्म से गुजर रही लड़कियों व महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार सामान्य सी बात हो गई है, आश्चर्य इस बात की भी है कि कहा जाता है कि सभी प्लेटफार्मों पर सीसीटीवी लगी है, पर ये हरकतें पता नहीं सीसीटीवी पर नजर रखनेवाले लोगों की पड़ती भी है या नहीं।

रांची जंक्शन से बराबर यात्रा करनेवालों का समूह बताता है कि पता नहीं ये सब कब तक झेलना पड़ेगा, पहले तो ये सब शनिवार और रविवार को झेलना पड़ता था, पर अब ये प्रतिदिन झेलना पड़ रहा है, ऐसे में अपने परिवार के साथ फिलहाल यात्रा करना कष्टप्रद ही नही बल्कि अपने इज्जत से खेलना भी है।

आश्चर्य यह भी है कि ये जितने भी अभ्यर्थी हैं, इनमें नाममात्र के पास ही टिकट होता है, जबकि सभी बिना टिकट के ही यात्रा करते तथा स्टेशन पर उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग करते तथा गंदगियां फैलाते हैं, लेकिन इस ओर न तो स्टेशन प्रबंधक का और न ही रेलवे की सुरक्षा एवं संरक्षा मे लगे लोग ही ध्यान दे रहे हैं, सूत्रों की माने तो अभ्यर्थियों द्वारा कही उत्पात न मचा दिये जाये, इसलिए फिलहाल ये सभी रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा समाप्त होने की भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं, ताकि स्थिति सामान्य हो सकें।

Krishna Bihari Mishra

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