अगर आप सोच रहे हैं कि नवम्बर-दिसम्बर में ठंड उतना नहीं पडे़गा तो आप गलत है, क्योंकि नक्षत्र…

जब हमें पिछले दिनों अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में विभिन्न समाचार माध्यमों से जानकारी मिली कि ‘नवंबर और दिसंबर इस बार तपेंगे। दिसंबर में तेज ठंड नहीं पड़ेगी। अक्टूबर और नवंबर में दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा बना रहेगा। कड़ाके की सर्दी जनवरी में ही पड़ेगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अलनीनो के असर के कारण ऐसा होगा। इसका असर सर्दी के मौसम की तिमाही पर अक्टूबर से दिसंबर तक पड़ेगा’। तो मेरे कान खड़े हो गये।

जब हमें पिछले दिनों अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में विभिन्न समाचार माध्यमों से जानकारी मिली कि ‘नवंबर और दिसंबर इस बार तपेंगे। दिसंबर में तेज ठंड नहीं पड़ेगी। अक्टूबर और नवंबर में दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा बना रहेगा। कड़ाके  की सर्दी जनवरी में ही पड़ेगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अलनीनो के असर के कारण ऐसा होगा। इसका असर सर्दी के मौसम की तिमाही पर अक्टूबर से दिसंबर तक पड़ेगा’। तो मेरे कान खड़े हो गये।

हमने सोचा कि क्या सचमुच इस बार ऐसा ही होगा, जैसा कि मौसम वैज्ञानिकों के माध्यम से विभिन्न समाचारों प्रेषकों का समूह बता रहा है, या वहीं होगा, जो पिछले कई वर्षों से भारतीय नक्षत्रों के गणनाओं के अनुसार, हमारे बाप-दादा कहते आ रहे हैं। जो लोग बिहार के सुदूर गांवों में रहते हैं, उन्हें तो आज भी पता है कि उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र जिसे लोग कनवा नक्षत्र कहते हैं, उस नक्षत्र के आते ही कान में जाड़ा लगने लगता है। हस्त नक्षत्र यानी हथिया के आने से हाथ में जाड़ा लगने लगता है और चित्रा के आने से चित्त में ठंड लगने लगता है।

हां ये अलग बात है कि बेतरतीब ढंग से प्रकृति के दोहन करने के कारण, अब इन नक्षत्रों ने भी अपने प्रभाव छोड़ने कम कर दिये हैं, पर ऐसा भी नहीं कि नवम्बर और दिसम्बर में सामान्य गर्मियों के दिन की तरह तापमान हो जाये, क्योंकि नक्षत्रों की सुनें तो जैसा कि अभी मौसम दिख रहा है, वो तो बता रहा है कि नक्षत्रों ने अपना कमाल दिखाना शुरु कर दिया है।

पिछले दिनों 14 सितम्बर को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र दिन के 11.47 में  प्रवेश किया। इसके बाद हस्त नक्षत्र 27 सितम्बर को रात्रि के 3.10 में प्रवेश किया। इसके बाद चित्रा नक्षत्र 11 अक्टूबर को रात्रि के 3.40 में प्रवेश किया। इसके बाद स्वाती नक्षत्र 24 अक्टूबर को रात्रि के 1.20 बजे प्रवेश किया और फिलहाल स्वाती 6 नवम्बर तक रहेगा और उसके बाद विशाखा नक्षत्र चढ़ जायेगा।

अगर वर्तमान स्थितियों को देखे तो चित्रा ने अपना काम बखूबी किया और स्वाती ने लोगों को ठंड का पूरी तरह ऐहसास करा दिया, ऐसे में मौसम वैज्ञानिकों का ये कहना कि नवम्बर और दिसम्बर में सामान्य दिनों की तरह तापमान देखने को मिलेंगे, अल-नीनो का प्रभाव दीखेगा, हमें लगता है कि ऐसा यहां इस बार देखने को नहीं मिलेगा, ठंड अपना ऐहसास उसी तरह कराता रहेगा, जैसा कि पूर्व मे कराता रहा है, हां कुछ इलाकों में तो ये अपने ही पुराने रिकार्ड़ को तोड़ देगा।

Krishna Bihari Mishra

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