जिन भाजपाइयों ने रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम की दुर्दशा कर दी, वे उनके गांव को क्या आदर्श बनायेंगे?
सत्ता क्या बदली, भाजपाइयों को मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा याद आने लगे। भाजपाइयों को सांसद होने का एहसास होने लगा। मरांग गोमके के गांव की याद सताने लगी। मतलब ये राजनीतिक हार, ऐसी सबक सिखा देती है कि लोगों को अपने महापुरुष, उनके गांव, महापुरुषों के चरित्र व संस्कार तक याद आने लगते हैं, यही नहीं ये अपने घर पर कार्यक्रम भी आयोजित करने लगते हैं
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