अपनी बात

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तीसरे दौर में भी मतदाताओं की पहली पसन्द बनी महागठबंधन, भाजपा का 65 पार का सपना धूमिल होने के आसार

लक्षण ठीक नहीं दिख रहे भाजपा के। आज तीसरे दौर के मतदान की समाप्ति हो गई। 17 सीटों पर हुए मतदान के बाद जो रिपोर्टें आ रही हैं, वह भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं दे रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि यही हाल रहा तो समझ लीजिये कि भाजपा के दुर्दिन के दिन झारखण्ड में आ चुके। रांची विधानसभा सीट जो भाजपा का गढ़ माना जाता हैं, वह भी दरकने लगा हैं, जिन क्षेत्रों में भाजपा मतदाताओं की एक बड़ी तादाद हैं,

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कौन किसको निकाला भाई? ऐसा करने से कौन किसको कमजोर कर रहा, जरा माथा पर ठंडा तेल लगाकर सोचियेगा

भाई जाड़ा के दिन में भी कभी-कभी माथा गरम हो जाता हैं, ऐसे में कोई भी ठंडा तेल मिले, जैसे – हिमताज तेल, हिमगंगे तेल या नवरत्न तेल, इसका उपयोग करिये, ताकि माथा ठंडा रहे और आप अच्छा निर्णय ले सकें, कही ऐसा नहीं कि चुनाव के समय लिये गये ऐसे निर्णय आपके लिए ही आपको मुख्यालय पर सदा के लिए शटर गिरवा दें।

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जब कुछ लोगों को लगी हार सताने, तो उन्हें लगे “रामटहल” याद आने

भाई कमाल हो गया, जिस दल ने राम टहल चौधरी को रांची से इस बार सांसद नहीं बनने दिया, उनका टिकट काट दिया। जिसके विरोध में स्वयं रामटहल चौधरी रांची संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में लड़े। इस दौरान उन्होंने उक्त दल से सदा के लिए अपना संबंध समाप्त कर लिया था, उन रामटहल चौधरी को कुछ लोग फिर से भाजपाई बनाने में लगे हैं। आखिर ये कौन लोग हैं?

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पीएम मोदी और उनके समूहों की सभा को करारा जवाब दे रही हेमन्त की अकेली चुनावी सभा

भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं को इस बात का आभास हो गया है कि झारखण्ड में भाजपा की पकड़ ढीली होती जा रही हैं, दो चरणों के चुनाव बता रहे है कि भाजपा साफ है, इसलिए भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी सभा व रैलियों की संख्या बढ़ा दी है। गृह मंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के चुनावी सभा में गायब हो रही भीड़ ने भाजपा के दिल की धड़कन को और तेज कर दिया है।

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मारवाड़ियों ने पूछा कि क्या वे सिर्फ भाजपा और संघ के लिए लंच और मंच की व्यवस्था करने के लिए बने हैं?

धनबाद के झरिया में रहनेवाले सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता तथा भाजपा के कट्टर समर्थक कृष्णा अग्रवाल ने अपने मारवाड़ी सम्मेलन झरिया के अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त कर दी है। यह पीड़ा मारवाड़ी समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व न मिलने को लेकर है। आखिर इन्होंने अपने पत्र में क्या लिखा है? उस पर ध्यान दें। पत्र में लिखा है कि…

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अब आप कितना भी मोदी, शाह, सिंह, ईरानी की सभा करा लीजिये, कोई लाभ नहीं मिलनेवाला

अब आप कितना भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी की सभा करा लीजिये, अबकी बार इस चुनाव में आपको कोई फायदा नहीं मिलनेवाला। अब आप कितना भी राममंदिर मुद्दा सुलझाने, धारा 370 हटाने आदि का ढोल पीट लीजिये, जनता को इससे कोई मतलब नहीं, क्योंकि उसके चुल्हे पर दाल नहीं बैठ रही और प्याज की बेतहाशा महंगाई ने तो उनकी चूले हिला दी है।

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यह लोकतंत्र की ताकत नहीं, बल्कि यह एक नक्सली एवं उनके परिवारों को मिला दिव्य ज्ञान हैं, क्या समझे?

जिसे आप लोकतंत्र की ताकत कह रहे हैं, वह दरअसल लोकतंत्र की ताकत नहीं, बल्कि इसके मजे व लाभ लेने के ऐहसास हो जाने का एक परिदृश्य भर हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं। रांची से प्रकाशित एक अखबार ने आज मुख्य पृष्ठ पर एक समाचार को स्थान दिया है। समाचार है – यही है लोकतंत्र की ताकत, कभी चुनाव का बहिष्कार करनेवाले नक्सली कुंदन पाहन का पूरा परिवार वोट देने खड़ा था कतार में।

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सिल्ली में सुदेश को सीमा की चुनौती, कहीं फिर हारकर भाजपा की चिरौरी में तो नहीं जुट जायेंगे आजसू सुप्रीमो

झामुमो सिल्ली विधानसभा में हैट्रिक बनाने जा रही है। लगातार इस सीट पर दो बार विजयी घोषित हुई झामुमो के इस बार भी हौसले बुलंद है। झामुमो की उम्मीदवार सीमा महतो एक बार फिर यहां से चुनाव लड़ रही हैं, इसके पूर्व वह एक बार यहां से चुनाव जीत चुकी है, जब उनके पति अमित महतो को चुनाव लड़ने से अयोग्य कर दिया गया था। ज्ञातव्य है कि अमित महतो झामुमो की टिकट पर सिल्ली विधानसभा से पहली बार 2014 में जीते थे,

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दूसरे चरण का मतदान समाप्त, महागठबंधन और मजबूत, BJP और CM रघुवर की सेहत ठीक नहीं

लीजिये, धीरे-धीरे दूसरे चरण का मतदान भी समाप्त हो गया। राजनीतिक पंडितों का समूह जोड़-घटाव कर अपना विश्लेषण करने में लग गया। रिपोर्ट बता रही है कि आज जिन-जिन विधानसभा क्षेत्रों में वोट पड़े, उन सारे क्षेत्रों में जमकर वोटों का बिखराव हुआ और इसमें सर्वाधिक नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा हैं, जो भाजपा के जन्मजात वोटर थे, वे अपने घरों में रहकर समय बिताना ज्यादा जरुरी समझा।

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आखिर सिविल सोसाइटी और चेंबर से जुड़े लोग नगर विकास मंत्री सीपी सिंह व CM रघुवर से इतने नाराज क्यों?

भाई, एक सवाल तो उठता है कि आखिर झारखण्ड सिविल सोसाइटी व चेंबर ऑफ कॉमर्स के लोगों को सीपी सिंह और राज्य के सीएम रघुवर दास का केवल नाम ले लेने पर ही गुस्सा क्यों आ जाता हैं? जबकि इनसे जुड़े लोगों का कभी पहला प्रेम ही भाजपा हुआ करता था, आम तौर पर सामान्य लोग इस बात को मानते व स्वीकार करते हैं, कि व्यवसायियों की पहली पसन्द भाजपा हुआ करती है, और चेंबर से जुड़े लोग कभी भाजपा को दिल से स्वीकार करते भी थे,

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