धर्म

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गुप्त नवरात्र कल से प्रारंभ, विभिन्न शक्ति मंदिरों-घरों में भक्त करेंगे प्रसन्न महाशक्ति को

नवरात्र चार प्रकार के होते हैं, पहला वासंती नवरात्र जो चैत्र शुक्लपक्ष में, दूसरा शारदीय नवरात्र जो आश्विन शुक्लपक्ष में तथा दो गुप्त नवरात्र भी होते है जो आषाढ़ शुक्लपक्ष तथा माघ शुक्लपक्ष में मनाये जाते हैं। जो शक्ति के उपासक हैं, जिन्हें महाशक्ति में आस्था है, वे गुप्त नवरात्रों को भी विशेष महत्व देते हैं, क्योंकि वे जानते है कि महाशक्ति को गुप्त नवरात्रों में ध्यान करने, आवाहन करने तथा उनकी साधना में लीन हो जाने से वो हर चीजें प्राप्त होती है।

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आप बिहार में रहकर देव स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर का दर्शन नहीं किया, तो क्या किया

भारत में तीन प्रकार के छठ मनाये जाते है, एक चैत्र में, दूसरा भादों में और तीसरा कार्तिक में। ज्यादातर लोग कार्तिक माह में छठ पर्व करते/कराते हैं। इस समय पूरे बिहार-झारखण्ड की नदियों और जलाशयों की शोभा देखते बनती है, पर इसी दौरान औरंगाबाद के देव में स्थित भगवान भास्कर के इस प्राचीन मंदिर में लाखों लोग जुटते हैं और इसी के पास बने सूर्य कुंड में भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर अपने जीवन को धन्य करते हैं।

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बिहार के ‘देव’ में उमड़ा शाकद्वीपीय विद्वानों का समूह,  देश व समाज की परिस्थितियों पर की चर्चा

बिहार के ‘देव’ में आयोजित ‘मग महोत्सव’ में बड़ी संख्या में शाकद्वीपीय विद्वानों ने भाग लिया। देश के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान कर रहे इन शाकद्वीपीय विद्वानों ने देश व समाज की परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा की तथा सभी से शांति व एकजुटता के साथ समाज को बेहतर स्थिति में लाने के लिए एक ईमानदार प्रयास करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

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40वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाने के लिए अभी से कृतसंकल्पित है शाकद्वीपीय ब्राह्मण महासभा

सार्वभौम शाकदवीपीय ब्राह्मण महासभा द्वारा लिये गये महत्वपूर्ण निर्णय को महासभा से जुड़े अधिकारी तथा आजीवन सदस्यों द्वारा अक्षरशः जमीन पर उतार देने के भागीरथी प्रयास की सभी ने सराहना की है। ज्ञातव्य है कि सार्वभौम शाकद्वीपीय ब्राह्मण महासभा ने स्वयं से मिलती-जुलती संस्था द्वारा रांची में कल आयोजित कार्यक्रम से सभी को दूर रहने की अपील की थी, जिसमें सभी ने सहयोग दिया।

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अभिनन्दन, भगवान भास्कर एवं छठि मइया का…

माथे पर पीले कपड़ों से बांधे दौरा-सुप ले जाते विभिन्न जलाशयों की ओर बढ़ते लोगों, पियरी पहने और हाथ में लोटा लिए छठव्रतियों का समूह और ठीक उसके पीछे बड़ी संख्या में छठ की पारंपरिक गीतों को गाती महिलाओं का समूह बरबस आपको अपनी ओर खींच लेती है। आज सूर्य सप्तमी है, आज उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य समर्पित कर, छठव्रतियों ने व्रत तोड़ दिया है और सभी अपने- अपने घरों में जाकर भगवान भास्कर और छठि मइया को …

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आओ छठ मनाएं पर कैसे?

आओ छठ मनाएं, पर कैसै? क्या अखबार पढ़कर या चैनल देखकर या बेसिर-पैर के छठगीतों को सुनकर, या नेताओं द्वारा स्वयं के पापों को धोने के लिए चलाये जा रहे छठसामग्रियों का दान लेकर, फैसला आपको करना है… ऐसा नहीं कि आप पहली बार छठ कर रहे है, आपके पहले भी लोगों ने छठ किया है, आनेवाले समय में भी लोग छठ करेंगे, पर जब भाव न होकर, छठव्रत बाह्याडंबर और पाखंड का शरण ले लें तो फिर वह छठ, छठ नहीं रह जाता,

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भीड़ त दीखी पर छठि मइया ना दिखाई दीहे…

अल कर, बल कर, छठ पर आर्टिकल, लिख चल… अल कर, बल कर, छठ पर, अलबल बोल चल… अल कर, बल कर, छठ पर रिपोर्टिंग कर चल… टीवी पर अनाप-शनाप बक चल…एक बार फिर, पिछले कई दिनों से हमारे आंख-कान दोनों पक गये… अखबारों और टीवी चैनलों तथा गुगुल पुराणों ने छठ महापर्व की धज्जियां उड़ानी शुरु कर दी है… जितने अखबार, उतनी बुद्धि, जितने टीवी उतनी बक-बक और सभी ने अपने ज्ञान से छठ की ऐसी-तैसी करनी शुरु कर दी

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इन्द्र के कोपभाजन बने रांचीवासी, दीपावली में न दीये जले और न ही फूटे पटाखे

लोगों ने सोचा था, खूब दीये जलायेंगे, पटाखे भी खुब फोड़ेंगे, पर इन्द्र ने रांचीवासियों के सारे सपनों पर पानी बिखेर दिया। रह-रहकर पूरे दिन हो रही बारिश और रात में भी बारिश की फुहारों ने दीपावली में जमकर खलल डाला। किसी घर में बाहर में दीये जलते नहीं दीखे, दीयों का काम लोगों ने विद्युतीय लघु बल्बों से लिया, पर दीया तो दीया है, एक दीये का जलना, लाखों विद्युतीय लघु बल्बों पर भारी पड़ता है।

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जय हो धनतेरस को धरतेरस बनानेवाले महान आत्माओं की…

धनत्रयोदशी सुना था, धनतेरस सुना था, अब लीजिये ‘प्रभात खबर’ ने एक नया शब्द खोज निकाला है – ‘धरतेरस’ यानी धरते रहिये तेरस को, मिल जाये या पकड़ा जाये तो हमें भी बताइयेगा… कैसे धरा और कैसे पकड़ा और कैसे इसका उपयोग किया? जय हो धनतेरस को धरतेरस बनानेवाले महान आत्माओं की…जब हम धन को ही प्रमुख मान लेते है, और इसी में भविष्य ढूंढने लगते हैं तो धनतेरस, धरतेरस बन जाता है।

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पानी से लबालब हैं छठ तालाब, छठव्रतियों को अनहोनी से बचाने के लिए विशेष प्रयास की जरुरत

रांची के सारे तालाब लबालब भरे हैं। छठ आने में मात्र 20 दिन शेष है। इस बार बारिश के सभी नक्षत्रों ने अपनी ऐसी उपस्थिति दर्ज कराई हैं कि रांची के सभी क्षेत्रों में भूगर्भ जलस्तर में अच्छी खासी वृद्धि हुई हैं। सही मायनों में, अगर रांची की जनता, इस वर्षा जल का संरक्षण बेहतर ढंग से की होती तो स्थिति कुछ और बेहतर होती। इधर दुर्गा पूजा भी खत्म हो गया।

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