ब्राह्मणों ने चंद्रग्रहण के दिन गोपणीय ढंग से संपन्न किया रघुवर सत्ता विनाशक जप

17 दिसम्बर से चले आ रहे रघुवर सत्ता विनाशक जप का कल देर रात समापन हो गया। कल चूंकि चंद्रंग्रहण भी था, इसलिए कल हवन-पूजन कर जप की इतिश्री कर डाली गई। पंडितों का मानना है कि इस सवा लाख जप से सीएम रघुवर दास के यश कीर्ति का क्षय होना अवश्यम्भावी है तथा इनके हाथों से सत्ता अवश्य जायेगा, इसमें कोई किन्तु-परन्तु नहीं हैं, क्योंकि यह जप पूरी तरह से गोपणीय तरीके से प्रारंभ किया गया था और इसका समापन भी गोपणीय ढंग से किया गया, क्योंकि इस जप में गोपणीयता का विशेष ध्यान रखा जाना था, अगर गोपणीयता नहीं रखी जाती, तो इस जप का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, अब चूंकि गोपणीय तरीके से जप संपन्न हो गया हैं तो इसका प्रभाव अवश्य और शीघ्र दीखेगा।

ज्ञातव्य है, पिछले दिनों गढ़वा में ब्राह्मणों के खिलाफ सीएम रघुवर दास द्वारा दिये गये बयान से आहत ब्राह्मणों का एक बहुत बड़ा वर्ग राज्य सरकार और सीएम रघुवर दास से बेहद खफा है। इधर रांची में ही ब्राह्मणों ने एक गोपणीय बैठक कर, मुख्यमंत्री रघुवर दास की सत्ता को सदा के लिए समाप्त करने के लिए विशेष रघुवर सत्ता विनाशक जप प्रारंभ कर दिया था। सवा लाख तक चलनेवाले जप को संपन्न कराने के लिए ब्राह्मणों को दल गोपणीय तरीके से लग चुका था, सूत्र बताते है कि जल्द ही इस जप का प्रभाव दिखने को मिलेगा, कुछ तो कह रहे है कि प्रभाव दिखेगा क्या? प्रभाव दिखना शुरु हो गया है। सत्तारुढ़ दल में आधे से अधिक मंत्रियों-विधायकों का अपनी ही सरकार से नाराज हो जाना, मंत्री सरयू राय का मंत्री पद से हटने की बात करना, इसी की एक कड़ी हैं।

इधर रघुवर सत्ता विनाशक जप पूर्ण होने, हवन-पूजन समाप्त करने के बाद ब्राह्मणों का दल अपने-अपने स्थानों को लौट गया हैं, जिस ब्राह्मण यजमान ने यह जप संपन्न कराया है, उसने अपना नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि अब देर किस बात की हैं? ग्रहण में संपन्न किये गये कार्यों व सिद्धियों की विशेष फल को भला कौन काट सकता हैं, बस अब उलटी गिनती शुरु, क्योंकि जिस दिन से रघुवर सत्ता विनाशक जप प्रारम्भ हुआ, तभी से रघुवर दास की लोकप्रियता में भारी कमी आनी शुरु हुई, जिसमें निरन्तरता जारी है।

One thought on “ब्राह्मणों ने चंद्रग्रहण के दिन गोपणीय ढंग से संपन्न किया रघुवर सत्ता विनाशक जप

  • February 1, 2018 at 11:19 am
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    तथा अस्तु..स्वस्तिः।।
    जो जन कल्याणकारक और शुभ हो,
    नारायण हरि ।।ॐ।।
    परम

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