धर्म

कही गो सेवा तो कही प्रह्लाद की हरिभक्ति का संदेश दे रहा इस बार की सरस्वती पूजा

पूरा झारखण्ड वसंत की मादकता में डूब चुका है। आज वसंत पंचमी है यानी वसंत का प्राकट्योत्सव, साथ ही प्राकट्योत्सव हैं विद्या की अधिष्ठात्री जगत जननी सरस्वती का। प्रातः काल मे सरस्वती की आराधना के पश्चात सायं काल में विभिन्न सरस्वती पंडालों में सरस्वती पुत्रों-पुत्रियों का जनसैलाव उमड़ पड़ा, लोग बड़ी ही भक्ति भाव से सरस्वती की प्रतिमा के आगे सर नवाया और आशीष ग्रहण किया।

इधर कई सरस्वती पंडालों में संदेश देते हुए कई दृश्य दिखाई दिये। पावर हाउस चुटिया के पास की सरस्वती पंडाल में गो सेवा को केन्द्र बनाया गया था। जिसमें दिखाया गया था कि गो सेवा भारतीय कृषि ही नहीं बल्कि भारतीय जीवन की रीढ़ है, अगर हम गो सेवा करते है, तो हम स्वयं पर उपकार करते हैं, न कि गो पर।

दूसरी ओर चुटिया के उपकार क्लब ने महान हरिभक्त प्रह्लाद की झांकी प्रस्तुत किया। झांकी में दिखाया गया था कि प्रह्लाद के पिता हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद पर कैसे-कैसे अत्याचार किये और प्रह्लाद फिर भी इन अत्याचारों के आगे नहीं झूका और हरिभक्ति में लगा रहा। यहां प्रह्लाद को पहाड़ के नीचे गिराने, गरम कड़ाही में खौलते तेल में डालने, होलिका के साथ प्रह्लाद को जलाने का बहुत ही सुंदर दृश्य दिखाई दिया। इन पंडालों में इन झांकियों को देखने के लिए बड़ी भीड़ जुटती रही।

कई स्थानों पर सरस्वती की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई, जहां देर रात लोग आकर भव्य प्रतिमाओं को अपलक निहारते रहे। सरस्वती पूजा को लेकर विभिन्न सरस्वती पूजा समितियों ने श्रद्धालुओं के लिए अच्छी व्यवस्था की थी, जिसका लाभ श्रद्धालुओं ने उठाया।

विभिन्न पंडालों में माता सरस्वती की प्रसाद को ग्रहण करने के लिए लोग आते रहे, वहीं कई पंडालों में अभिभावकों ने अपने नन्हें-मुन्नों का स्लेट-पेसिंल छुलाकार विद्याध्ययन की ओर कदम बढ़ाया।