एकमात्र श्रीकृष्ण को जानिये और स्वयं को ब्रह्मानन्द में समाहित कर लीजिये
जन्माष्टमी अर्थात् श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का महान पर्व, श्रीकृष्ण को हर बार, बार-बार, प्रतिवर्ष नये ढंग से समझने का पर्व। जो श्रीकृष्ण को समझ लिया, जान लिया, पा लिया, उसकी जय हो गई, उसका जीना सफल हो गया और जो नहीं जाना, वो काल की परिधि में पीसता चला गया। भारतीय वांग्मय कहता है – यतो कृष्णः ततो धर्मः यतो धर्मः ततो जयः अर्थात् जहां श्रीकृष्ण हैं वहीं धर्म हैं और जहां धर्म है, जय उसी का होना हैं।
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