बिहार के ‘देव’ में उमड़ा शाकद्वीपीय विद्वानों का समूह,  देश व समाज की परिस्थितियों पर की चर्चा

बिहार के ‘देव’ में आयोजित ‘मग महोत्सव’ में बड़ी संख्या में शाकद्वीपीय विद्वानों ने भाग लिया। देश के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान कर रहे इन शाकद्वीपीय विद्वानों ने देश व समाज की परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा की तथा सभी से शांति व एकजुटता के साथ समाज को बेहतर स्थिति में लाने के लिए एक ईमानदार प्रयास करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

बिहार के देव में आयोजित मग महोत्सवमें बड़ी संख्या में शाकद्वीपीय विद्वानों ने भाग लिया। देश के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान कर रहे इन शाकद्वीपीय विद्वानों ने देश व समाज की परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा की तथा सभी से शांति व एकजुटता के साथ समाज को बेहतर स्थिति में लाने के लिए एक ईमानदार प्रयास करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

इस कार्यक्रम में ओम प्रकाश मिश्र, एडीशनल सेक्रेटरी, होम गर्वमेंट आफ एनसीटी आफ देल्ही ने कहा कि किसी को कोसने से अच्छा है कि हम मिलकर समाज की बेहतरी के लिए कार्य करें। ये समझना की हमारी स्थिति बहुत खराब है, ये ठीक नहीं है, आज भी राजनीतिज्ञों को राजनीतिक खुराक देने में इसी समाज की महती भूमिका है, उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा से दूर न हो, बल्कि संस्कृत पढ़े और पढ़ाये, क्योंकि आज भी संस्कृत भाषा के विद्वानों और जानकारों का अभाव है, जो संस्कृत से जुड़े है, वे आज भी अच्छी स्थिति में है। रही बात वेद विद्यालय बनाने या धर्मशाला बनाने की तो ये भी समय की मांग है, जरुरत के अनुसार पूरा किया जा सकता है, पर अच्छा रहेगा कि हम बेहतरी की ओर कदम बढ़ाए।

सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता कृष्णा मां ने शाकद्वीपीय का अर्थ संक्षिप्त में ही पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि शाकद्वीपीय का अर्थ समझने की है। शाकद्वीपीय का अर्थ है शील, तेजस्विता, भगवत्ता, और ऐश्वर्य से परिपूर्ण व्यक्तित्व, जिसका अभाव साफ झलकता है, पर जैसे ही आप इससे युक्त होते है, आप निरंतर आगे बढ़ते जाते है।

भारतीय निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के उपसचिव आनन्द कुमार पाठक ने सभी से एकता के सूत्र में बंधकर समाज व देशहित में कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मग महोत्सव के द्वारा समाज का एकत्रीकरण और विकास को लेकर चर्चा एक अच्छा प्रयास है, इस पर कार्य करते रहना चाहिए।

स्वामी शैलेन्द्रानन्द ने कहा कि अपने समाज की दयनीय स्थिति है, उसके जिम्मेवार भी समाज ही है, कोई उपाकर्म नहीं करता। व्राह्मणत्व खत्म होता जा रहा है। जिस मैकाले की हिम्मत नहीं हुई, ब्राह्मणत्व खत्म करने की, वो ब्राह्मणत्व खत्म होने जा रहा है, उसका कारण है कि लोग अपने धर्म व कर्म से विमुख हो रहे है, जो कतई ठीक नहीं, इसे जरुरत है, और बेहतर करने की। उन्होंने सामाजिक विषमता से अलग सामाजिक समरसता पर ध्यान देने की जरुरत बताया।

नई दिल्ली से आये भास्कर संस्था के अध्यक्ष प्रणव कुमार मिश्र ने महानगरों में रहनेवाले शाकद्वीपीय ब्राह्मणों की दयनीय दशा पर प्रकाश डाला और उन्हें इस दयनीय दशा से कैसे उपर उठाया जाय, इस पर चर्चा की।

 

मग महोत्सव को सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत सच्चिदानन्द मिश्र, राजस्थान से आये रामशंकर शास्त्री, प. बंगाल से आये विमल मिश्र, मग महोत्सव के अध्यक्ष संजय कुमार मिश्र, सचिव उज्जवल रंजन, विवेकानन्द वैद्य, भैरवनाथ पाठक, सिद्धनाथ मिश्र ने भी संबोधित किया, जबकि मग महोत्सव के कोषाध्यक्ष उमेश कुमार मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापित किय़ा। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रांची से सार्वभौम शाकद्वीपीय ब्राह्मण महासभा के संरक्षक हरिहर प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में, अध्यक्ष ब्रज बिहारी पांडेय, उपाध्यक्ष मिथिलेश कुमार मिश्र, मंत्री गोपाल पाठक व कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल भी देव पहुंचा।

Krishna Bihari Mishra

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