जिसने गीता का रसपान किया, उसने जीवन के कुरुक्षेत्र में सफलता पाई – स्वामी ईश्वरानन्द गिरि
सारा वेद गाय है, और इन गायों से दुध दूहनेवाले श्रीकृष्ण है, इस दुग्ध का पान करनेवाले गांडीवधारी अर्जुन है और जो दूध है वह स्वयं गीता है, जो इस गीतारुपी दुध का पान करता है, वह जीवन के कुरुक्षेत्र में सर्वदा विजयी रहता है, इसे समझने की जरुरत है। यह उद्गार आज रांची के योगदा सत्संग मठ में आयोजित आध्यात्मिक व्याख्यान के क्रम में योगदा सत्संग मठ के प्रशासक स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने व्यक्त किये।
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