जिसके दाहिने हाथ में हनुमान गुदे हुए हो, वह CM हाथी क्या बहुत कुछ उड़ा सकता है

झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ऐसे तो सारे हिन्दू देवी-देवताओं के फैन है, स्वयं धार्मिक भी हैं, कोई भी काम बिना पूजा-पाठ किये प्रारंभ नहीं करते, उनको जाननेवाले यह भी जानते है कि नित्य-क्रिया के उपरांत उनका कुछ समय पूजा-पाठ में भी जाता है, पर बहुत कम लोग जानते हैं कि अपने मुख्यमंत्री रघुवर दास रामभक्त हनुमान के बहुत बड़े फैन है और उन्हें अपने हनुमान पर बहुत भरोसा भी है।

कभी उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद जमशेदपुर की एक सभा में कहा भी था कि वे रघुवर दास हैं, यानी रघुवर के दास है, यानी हनुमान है, जैसे हनुमान ने राम की सेवा की, वैसे ही वे हनुमान बनकर राज्य की जनता की सेवा करना चाहते हैं, ऐसे भी हनुमान की सेवा को, उनकी रामभक्ति को कोई चुनौती भी नहीं दे सकता। रामभक्त हनुमान के प्रति इनकी इतनी श्रद्धा है कि वे अपने दाहिने हाथ में हनुमान जी का गोदना भी गोदवा चुके हैं।

जरा देखिये, इनके दाहिने हाथ में कैसे हनुमान जी विराज रहे है। ऐसे भी मुख्यमंत्री आवास में कभी अर्जुन मुंडा ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में हनुमान जी की प्रतिमा का स्थापना करवाया था, पर असली काम हनुमान जी, मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए ही कर रहे हैं, क्योंकि सर्वाधिक समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने का रिकार्ड मुख्यमंत्री रघुवर दास के पास ही हैं, ऐसे भी जो मुख्यमंत्री आवास पर ये तोहमत लगता था कि वहां भूतों का डेरा है, इसलिए कोई मुख्यमंत्री यहां ज्यादा दिनों तक शासन नहीं कर पाता, वह तोहमत भी कहीं दिखाई नहीं पड़ता, यानी हनुमान जी ने ऐसे लोगों की ऐसी क्लास ले ली है, कि उनका भक्त फिलहाल निष्कंटक राज झारखण्ड में कर रहा है।

भाई आप माने या न माने, कलयुग के जीते-जागते देवता तो हनुमान जी ही है, और जो हनुमान जी को अपने दाहिने हाथ में ही गोदवा चुका हो, भला उससे कौन टकरायेगा, उसके पास तो हनुमान जी सदा विराजमान है। ठीक उसी प्रकार जैसे महाभारत के युदध में अर्जुन के रथ पर हनुमान जी विराजमान रहा करते थे, तो झारखण्ड के राजनीतिज्ञों एवं मुख्यमंत्री का अहित चाहनेवालों सावधान, सबसे पहले रघुवर दास को सत्ता से हटाने के लिए आपको हनुमान की ही शरण में ही जाना होगा, क्योंकि फिलहाल हनुमान जी रघुवर दास के दाहिने हाथ पर विराजमान हैं और जब कहा जाता है कि…

संकट कटै-मिटै सब पीड़ा, जो सुमिरत हनुमत बलबीरा

तो भाई यहां तो सुमिरन की क्या आवश्यकता, यहां तो हनुमान जी को दाहिन हाथ में ही गोदवा कर फिट कर दिया गया है, इसलिए रघुवर का दास यानी हनुमान, पर हनुमान की ही कृपा है, तभी तो कई गड़बड़ियो के बावजूद, भारी-भरकम हाथी को उड़वा देने के बाद भी जमें हुए हैं, इसलिए जय बोलो रघुवर दास की, जय बोलो उनके दाहिने हाथ में गोदना के रुप में गुदे हुए हनुमान की…