Author: Krishna Bihari Mishra

राजनीति

सरकार प्रायोजक और सरकार के मंत्री ही काटे बवाल, ज्यां द्रेज को भाषण देने से रोका

प्रभात खबर का कार्यक्रम, झारखण्ड सरकार प्रायोजक और झारखण्ड सरकार के एक मंत्री ने ही होटल रेडिशन ब्लू में हंगामा खड़ा कर दिया, ज्यां द्रेज को अपनी बात कहने नहीं दी, जमकर बवाल काटा, कार्यक्रम के बहिष्कार तक की बात आने लगी, किसी तरह केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने मोर्चा संभाला।

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अपनी बात

क्या सरकार को मालूम है, गांधी ने धर्मांतरण के साथ-साथ ग्राम स्वराज्य पर भी कुछ बयान दिया है?

गांधी ने केवल धर्मांतरण के उपर ही नहीं, और भी बहुत सारी विषयों पर ज्ञान दिया था, क्या जनाबे आली को वे सारे ज्ञान भी याद है, या केवल धर्मांतरण पर ही जाकर उनकी ज्ञान अटक गयी है? यह सवाल जनता इसलिए पूछ रही है,  क्योंकि गत 11 अगस्त को जनाबे आली ने जो अपने सत्ता के गुरुर में रांची से प्रकाशित विभिन्न प्रमुख अखबारों में गांधी का हवाला देते हुए गलत विज्ञापन छपवाया,

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राजनीति

अपने दिव्य ज्ञान से बिहार की जनता को रिझाने में लगे शरद

शरद यादव को दिव्य ज्ञान हुआ है, ठीक उसी प्रकार जैसे कभी गौतम बुद्ध को हुआ था, गया के बोधिवृक्ष के नीचे। दिव्य ज्ञान मिलने के बाद से वे उस दिव्यता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बिहार के दौरे पर है, वे गला फाड़-फाड़ कर लोगो को बता रहे है कि वे आज भी महागठबंधन के साथ है।

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धर्म

गांधी के कंधे पर बंदूक रखकर रघुवर ने चलाई धर्मांतरण की गोली

सरकार बताएं कि कल जो राज्य के प्रमुख अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर विज्ञापन छपवाएं गये, उसमें जो महात्मा गांधी के बयान को उद्धृत किया गया है, वह किस प्रमाणिक पुस्तक या किस पूर्व में प्रकाशित समाचार पत्र/पत्रिका या ऑडियों का हिस्सा है। जनता जानना चाहती है।

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अपनी बात

ना मुंह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो….

छठी कक्षा में पढ़ रहा छोटा राजू, अपनी बड़ी बहन सविता को पहली बार दुपट्टा को नकाब का शक्ल देकर उससे मुंह छुपाकर निकलते हुए घर से बाहर जाते देखा था, तभी उसने मां से पूछा कि मां आज दीदी दुपट्टा से मुंह ढक कर क्यों निकली? पहले तो मैंने ऐसा उसे करते नहीं देखा था। बड़ी ही सहजता से राजू ने ये सवाल अपनी मां से पूछे थे। मां ने भी बड़ी सरलता से जवाब दिया था कि ये तुम जो सवाल हमसे पूछ रहे हो, इसका जवाब तुम स्वयं अपनी दीदी से क्यों नहीं पूछ लेते?

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अपराध

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे पर बिगड़ैलों ने लगाया ग्रहण

अब तो रांची में जो स्थिति है, उस स्थिति को देखकर समझ में ही नहीं आ रहा है कि बेटी को पढाए या उसकी सम्मान बचाने के लिए सदा के लिए घर पर उसे बिठा दें। सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, पर जो राज्य की स्थिति है, वहां बेटियों को घर से निकलना ही मुश्किल है।

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धर्म

क्या सरकार द्वारा धर्मांतरण पर विज्ञापन के माध्यम से किसी समुदाय को टारगेट करना ठीक हैं?

उपर में भगवान बिरसा मुंडा और स्व. कार्तिक उरांव जी की तस्वीर है, इनके अगल-बगल पं. दीन दयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी और झारखण्ड सरकार का लोगो हैं। पूरे एक पृष्ठ के विज्ञापन में एक ओर महात्मा गांधी की तस्वीर और नीचे मुख्यमंत्री रघुवर दास का लोक-लुभावन चित्र दिया गया है। विज्ञापन में लिखा है – भगवान बिरसा मुंडा और स्व. कार्तिक उरांव का सपना पूरा करने की दिशा में पहल।

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अपनी बात

एक बेटा ये है और एक बेटा वो भी हैं

जानते है, जब एक औलाद का जन्म होता है तो एक मां-बाप को कितनी खुशी होती है, वो खुशी उसकी पदोन्नति की होती है। वह मां बनी है, वह बाप बना है, पिता बना है, पालनकर्ता बना है एक बच्चे का, जो बड़ा होकर उसकी तकदीर बनेगा, भविष्य बनेगा, जब वो लहुलूहान होगा तो वह पूछेगा कि पापा आप कैसे हो? मां कैसी हो? और जैसे ही उसके मुख से ये शब्द निकलेंगे, उसके सारे जख्म और पीड़ा समाप्त हो जायेंगे।

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अपराध

लो चोटीकटवा झारखण्ड भी पहुंच गया

पलामू जिले में है, छतरपुर और ठीक उसके सटे है बौरहवाखांड गांव जहां रहती है, देवकली देवी। देवकली देवी बताती है कि कल रात को वो साग भात खाकर सोने गई और जब सुबह उठी और अपने बालों पर हाथ फेरा, तो उनके चोटी गायब थे। गांववाले बताते है कि देवकली देवी की चोटी बहुत बड़ी थी, पर रात में चोटीकटवा के काट लिये जाने से वो चोटी ही नहीं दीख रही। इस घटना के बाद से गांववाले भी परेशान है

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अपनी बात

लालच भारत छोड़ो, कभी-कभी नेता, अच्छे समय पर, काम की बात बोल जाते हैं

लालच भारत छोड़ो

कभी-कभी नेता, अच्छे समय पर, काम की बात बोल जाते है, जो लोगों के दिलों में उतर जाती है। कल की ही बात है, पूरे देश में 1942 भारत छोड़ों आंदोलन की 75 वीं वर्षगांठ मनायी जा रही थी। संसद से लेकर देश के महानगरों मे कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे थे। ममता बनर्जी कोलकाता में एक रैली के माध्यम से भाजपा भारत छोड़ों का नारा दे रही थी, तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना में लालच भारत छोड़ों का नारा दे रहे थे। लालच भारत छोड़ों नारा देने के दौरान जो बाते उन्होने उजागर की, वह चौकानेवाला था।

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