सरकार प्रायोजक और सरकार के मंत्री ही काटे बवाल, ज्यां द्रेज को भाषण देने से रोका

प्रभात खबर का कार्यक्रम, झारखण्ड सरकार प्रायोजक और झारखण्ड सरकार के एक मंत्री ने ही होटल रेडिशन ब्लू में हंगामा खड़ा कर दिया, ज्यां द्रेज को अपनी बात कहने नहीं दी, जमकर बवाल काटा, कार्यक्रम के बहिष्कार तक की बात आने लगी, किसी तरह केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने मोर्चा संभाला।

ज्यां द्रेज के भाषण पर कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने काटा बवाल, जमकर किया हंगामा

आज होटल रेडिशन ब्लू में जो भी कुछ हुआ, वह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है, शर्मनाक इसलिए क्योंकि एक अखबार के जन्मदिवस/स्थापना दिवस पर जिस प्रकार से एक अतिथि को बोलने नहीं दिया गया, वह बताता है कि आनेवाला समय कितना खतरनाक है। वह भी तब जब राज्य सरकार ही इस कार्यक्रम की प्रायोजक हो। पिछले कई दिनों से रांची से प्रकाशित प्रभात खबर में एक विज्ञापन निकल रहा है। विज्ञापन में प्रभात उत्सव के नाम से विचार कल का, विमर्श आज का नाम से शीर्षक डाले गये हैं। इसमें बड़े-बड़े नेताओं, पत्रकारों और अर्थशास्त्रियों के पासपोर्ट साइज फोटो छपे हैं, बड़े-बड़े मतलब का मतलब ये मत समझ लीजियेगा कि यह मैं कह रहा हूं, ये प्रभात खबर कह रहा है। चूंकि प्रायोजक झारखण्ड सरकार है, तो सहमति भी सरकार की जरुर होगी।

वामपंथी विचारधारा के ज्यां द्रेज भाजपा और संघ की नीतियों के शुरु से ही कटु आलोचक रहे हैं

होटल रेडिशन ब्लू में नेताओं के भाषण चलने के बाद ज्यां द्रेज के भाषण का देने का समय आता है। ज्यां द्रेज वामपंथी विचारधारा के है, ईसाई समुदाय से है, भाजपा और संघ विचारधारा के कटु आलोचक है। उनका मानना है कि संघ और भाजपा की जो विचारधारा है, देश के लिए खतरनाक है और जो ज्यां द्रेज को जानते है, वे इस बात से पूर्णतः वाकिफ है, कि ज्यां द्रेज की सोच कहा जाकर खत्म होती है। जब ज्यां द्रेज के इस कार्यक्रम में शामिल होने की बात हो रही थी, तो आयोजक और प्रायोजक को पहले ही स्वीकार कर लेना चाहिए था कि उनकी बातें, आयोजक यानी प्रभात खबर को अच्छी लग सकती है, पर प्रायोजक यानी झारखण्ड सरकार के मंत्रियों को उनसे नाराजगी हो सकती है, पर नाराजगी ऐसी कि कार्यक्रम के बहिष्कार की नौबत आ जाये, ज्यां द्रेज को बोलने ही नहीं दिया जाय, ये तो गलत है। इससे अच्छा रहता कि ज्यां द्रेज को इस कार्यक्रम से दूर ही रखा जाता, पर ज्यां द्रेज ने जैसे ही धर्मांतरण विधेयक और राज्य सरकार द्वारा 11 अगस्त को निकाले गये विज्ञापन पर करारा प्रहार किया, राज्य के कृषि मंत्री रणधीर कुमार सिंह आपे से बाहर हो गये, उन्होंने ज्यां द्रेज के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग किया, बेचारे भय से ज्यां द्रेज अपनी बात पूरी नहीं कर सके और जाकर मंच पर अपनी जगह बैठ गये, मामला गरम होता देख केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने मोर्चा संभालने की कोशिश की, पर उन्हें भी माहौल को शांत करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि राज्य के मंत्री रणधीर कुमार सिंह और अन्य, उनकी भी नहीं सुन रहे थे, फिर भी राधा मोहन सिंह ने बार-बार सभी को चुप कराने की कोशिश की और उक्त विज्ञापन के बारे में अपना पक्ष रखा, तब जाकर माहौल शांत हुआ।

अपने विरोधियों की आवाज को रोकना, लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं

अब सवाल उठता है कि क्या आप अपने विरोधियों की बात नहीं सुनेंगे? आप बाहुबल व ताकत के आधार पर किसी की भी आवाज बंद कर देंगे, ये तो लोकतंत्र के लिए खतरा है? इसका मतलब है कि एक बार फिर से लोकतंत्र की मजबूती के लिए ऐसे लोगों के खिलाफ लड़ना होगा, जो अपनी ताकत से किसी का भी मुंह बंद करने की बात करते है, और इसके लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा, क्योंकि आज की घटना आनेवाले खतरे का संकेत है, यह बताता है कि सत्ता गलत लोगों के हाथों में चली गई है, जो दूसरे को सुनने को तैयार नही है।

झारखण्ड कॉनक्लेव के औचित्य पर सवाल?

जरा देखिये, प्रभात खबर अपना 34 वां स्थापना दिवस मना रहा है, इस अवसर पर उसने प्रभात उत्सव के नाम से होटल रेडिशन ब्लू में “झारखण्ड कॉनक्लेव” का आयोजन भी किया है, जिसका प्रायोजक प्रभात खबर नहीं, झारखण्ड सरकार है। चूंकि इस कॉनक्लेव में जो लोग भाग लेनेवाले हैं, वो मध्यम श्रेणी की होटलों में नहीं ठहरते, क्योंकि वहां उन्हें अच्छी नींद नहीं आती, तथा देश हित में उनके मन मस्तिष्क में अच्छे विचार नहीं आते, जैसे ही ये रेडिशन ब्लू टाइप होटल में आते है, ठहरते हैं, उन्हे नाना प्रकार के विकास संबंधी सुंदर-सुंदर विचार, उनके मन-मस्तिष्क में हिलोरें मारने लगती है और वे अपने मुख से वे विचार उगलने लगते है, जिससे सुना व माना जाता है कि राज्य बहुत तेजी से आगे की ओर निकल पडता है।  हम आपको यह भी बता दें कि जब प्रभात खबर कोई कार्यक्रम करता है तो उसे जिमखाना दिखाई पड़ता है, और जैसे ही इसका जिम्मा झारखण्ड सरकार लेती है तो ये आयोजन होटल रेडिशन ब्लू आकर अपना कमाल दिखाता है।

वे दूसरे से सुंदर चरित्र की कामना करते हैं, पर स्वयं पर अमल नहीं करते

जरा दूसरी घटना देखिये आज यहां क्या हुआ है? एक बहुत बड़े पत्रकार है, जो अभी राज्य सभा में है, उन्होंने कितना सुंदर भाषण दिया है, नाम उनका हरिवंश है, उन्होंने आज कहा कि हमारा आदिवासी समाज कम चीजों के साथ रहता है,  लेकिन खुश रहता है। उन्होंने कहा कि किसी राज्य को आगे ले जाने के लिए पहली शर्त है कि उसके नेता के पास विजन हो। इसके लिए विश्व के बड़े संस्थानों में पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है। इसके लिए कैरेक्टर और कनविक्शन सबसे ज्यादा जरूरी है। कामराज बहुत पढ़े-लिखे नेता नहीं थे। वह भाषा नहीं पढ़ पाते थे। लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी जैसा प्रधानमंत्री कामराज ने दिया। उन्हें पीएम बनाने की बात हुई, तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया, पर इन्होंने यह नहीं बताया कि जब नीतीश कुमार ने इन्हें राज्यसभा का टिकट देने की घोषणा की तब उन्होने राज्यसभा जाने से इनकार क्यों नहीं किया? यानी उपदेश सिर्फ दूसरों के लिए।

कमाल है विचार कल का, विमर्श आज का

प्रभात खबर का स्थापना दिवस, और भागीदारी रघुवर सरकार का