Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

पूछिये, झारखण्ड के CM रघुवर दास से, उड़ता हाथी का क्या समाचार हैं?

बात उन दिनों की है, जब राज्य में मोमेंटम झारखण्ड की चर्चा चारों ओर थी। झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके कनफूंकवों को लगता था कि बस मोमेंटम झारखण्ड संपन्न हुआ कि उधर हाथी उड़ा, लेकिन भला हाथी भी कहीं उड़ता है, हाथी तो भारी भरकम जीव है, जो ठीक से दौड़ भी नहीं सकता, वो उड़ेगा क्या? इसी को लेकर कभी पत्रकारों ने प्रेस कांफ्रेस के दौरान सीएम रघुवर दास से पूछ दिया कि आपके दिमाग में ये उड़ता हाथी का कन्सेप्ट कैसे आया?

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राजनीति

फ्यूज उड़ानेवाले मैटेरियल है बाबूलाल, भाजपा अभी से संभल जाये

झारखण्ड विकास मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव बंधु तिर्की का कहना है कि बाबू लाल मरांडी फ्यूज बल्ब नहीं, बल्कि भाजपा

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राजनीति

इवेंट मैनेजमेंट की तरह होती हैं CM रघुवर की सभा, भीड़ जुटाने में उपायुक्तों को छुट रहे पसीने

लोग तो कहते है कि इवेंट मैनेजमेंट बंद हो जाय, तो पता चलेगा कि सीएम रघुवर दास को सुनने के लिए सिर्फ और सिर्फ खाली कुर्सियां ही रह गई, क्योंकि तीन सालों के इस शासन काल में सीएम रघुवर दास ने ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे राज्य की आम जनता को लगे कि इन्होंने आम जनता के लिए कुछ किया, ये तो केवल अपने नेताओं, बड़े-बड़े अधिकारियों और उनके परिवारों और पूंजीपतियों की समृद्धि में लगे है,

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राजनीति

हेमंत के आरोपों का जवाब दें रघुवर सरकार, रांची के सभी अखबार भी अपनी स्थिति स्पष्ट करें

हेमंत सोरेन ने आज दावे के साथ कहा है कि एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के संपादक को एक खास समाचार छापने के कारण सरकार से धमकियां मिली। उन्हें कहा गया कि आपको साल में 12 करोड़ रुपये का विज्ञापन इसलिए नहीं दिया जाता कि आप सरकार के विरोध में खबरे छापें। लोकतंत्र के लिए इससे दुखद स्थिति नहीं हो सकती है कि अखबार एवं मीडिया को जनता का हथियार बनने के बदले शासक का कवच बनने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

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अपनी बात

सुपरफ्लॉप हो गया, सीएम रघुवर दास और उनके कनफूंकवों का ‘झारखण्ड माइनिंग शो’

भला इस प्रकार के माइनिंग शो से आज तक किसी राज्य का विकास हुआ हैं, जो झारखण्ड का होगा और जब विकास ही नहीं होगा तो फिर इस प्रकार के माइनिंग शो मील का पत्थर कैसे बनेंगे? सवाल मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके प्रिय कनफूंकवों, से कि इस तीन दिवसीय झारखण्ड माइनिंग शो से राज्य को क्या हासिल हुआ?  जरा खुलकर बताये।

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अपनी बात

अगर यहीं सवाल कोई रघुवर दास से पूछ दें कि आप को सीएम किसने बना दिया तब?

ये हैं, झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास, जिन्हें बात करने की तमीज ही नहीं। कल की बात है, सूचना भवन में मुख्यमंत्री जन संवाद केन्द्र में कार्यक्रम ‘सीधी बात’ के तहत एक फरियादी ने सीएम रघुवर दास को अपना दुखड़ा क्या सुनाया? वे आपे से बाहर हो गये? उन्होंने गुमला के एसपी से पूछ डाला कि ‘आपको आइपीएस किसने बना दिया?’  ‘गजब शासन चला रहा हैं आपलोग’ ‘ एक्शन क्यों नहीं लियो?’ अब सवाल है कि क्या ये सीएम की भाषा हो सकती है?

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राजनीति

CM रघुवर को कौन समझाये? मेला लगाने से निवेश नहीं होता, माहौल बनाने से निवेश होता हैं…

कमाल है, रघुवर सरकार के इस मंत्री ने खुलकर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को आगाह किया कि माहौल को बेहतर बनाइये, पर कनफूंकवों से घिरे मुख्यमंत्री रघुवर दास को इससे अलग, केवल मेला लगाने में ही आनन्द लग रहा है, जिसका परिणाम हैं कि न तो राज्य में निवेश हो रहा और न ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे, पर इस मेले के आयोजन से, मेला लगानेवालों का कारोबार खुब फल-फूल रहा है, जिससे सीएम की झूठी वाहवाही तो हो रही है

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राजनीति

भाजपा हटाओ झारखण्ड बचाओ रैली में दिखा जोश, रघुवर सरकार के प्रति दिखी लोगों की नाराजगी

रांची के मोराबादी मैदान में राज्य के विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ सभी विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई और राज्य से भाजपा को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया। रघुवर सरकार बनने के बाद पहली बार इस प्रकार की रैली दिखी, जिसमें राज्य के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने राज्य की सभी विपक्षी पार्टियों को एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया।

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अपनी बात

बस मौका मिलना चाहिए सीएम रघुवर दास को नेहरु और नेहरु परिवार को नीचा दिखाने का…

कमाल है, जो किसी को इज्जत देता ही नहीं, वह इज्जत देने की बात कर रहा हैं। हैं न आश्चर्य?  झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास का कहना है कि सरदार पटेल को जो मान- सम्मान मिलना चाहिए था वो किसी ने नहीं दिया।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरदार पटेल को वो सम्मान मिल रहा है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ये भी कहते है कि कश्मीर की समस्या खत्म करने के लिए सरदार चाहते थे कि वहां सेना का उपयोग किया जाए लेकिन पंडित नेहरू ने मना किया

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अपराध

लानत है ऐसी पत्रकारिता पर, अपने को मनुष्य कहने पर, बचाने की जगह पत्रकार प्रश्न पूछता रहा

जिस राज्य में पत्रकारिता के शीर्ष पर अथवा पत्रकारिता को जीवन देनेवाले प्राणदाताओं वाले स्थान पर चरित्रहीनों, बेशर्मों और जाहिलों का कब्जा होता है, वहां ऐसे ही भस्मासुर रुपी पत्रकारों का जन्म होता है, जो किसी के प्राण बचाने के बजाय, उससे ये पूछ रहे होते हैं कि आप मर रहे हो, बताओ कैसा लग रहा है? जो लोग अभी पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रहे हैं या जो अभी हैं, जरा बताओ कि उनमें कौन सा चारित्रिक गुण है, जिससे हम ये समझे कि

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