इवेंट मैनेजमेंट की तरह होती हैं CM रघुवर की सभा, भीड़ जुटाने में उपायुक्तों को छुट रहे पसीने

लोग तो कहते है कि इवेंट मैनेजमेंट बंद हो जाय, तो पता चलेगा कि सीएम रघुवर दास को सुनने के लिए सिर्फ और सिर्फ खाली कुर्सियां ही रह गई, क्योंकि तीन सालों के इस शासन काल में सीएम रघुवर दास ने ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे राज्य की आम जनता को लगे कि इन्होंने आम जनता के लिए कुछ किया, ये तो केवल अपने नेताओं, बड़े-बड़े अधिकारियों और उनके परिवारों और पूंजीपतियों की समृद्धि में लगे है,

झारखण्ड के संसदीय कार्य मंत्री सह खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय का बड़ा बयान – उन बड़े कार्यक्रमों जिसमें मुख्यमंत्री शामिल होते है, उसमें भीड़ जुटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है, यह प्रशासनिक हिसाब से ठीक नहीं हैं। इस तरह की संस्कृति में हमें सुधार करने की जरुरत है। सरयू राय ने यह भी कहा है कि इस समय इवेंट मैनेजमेंट हो रहा है, उपर से कार्यक्रम आने पर उपायुक्त समेत सभी अधिकारी सब जरुरी काम छोड़कर उसी में लग जाते हैं। इसमें देखा जाता है कि सभी कार्यक्रमों में भीड़ के रुप में प्रायः एक ही तरह का सेट अप दिखाई पड़ता है, इससे महज यह कार्यक्रम की औपचारिकता लगने लगती है।

सरयू राय के इस बयान में दम है, आजकल मुख्यमंत्री की जहां भी सभा हो रही वह सभा इवेंट की तरह दीख रहा है, उसमें जो लोग आ रहे हैं, वे सभी एक ही टाइप के हैं, जिनका संबंधित कार्यक्रम से कोई लेना देना नहीं होता, उनका काम जहां सीएम रघुवर दास का भाषण होता है, वहां पर अगर भीड़ नही जुटी तो वहां पड़ी कुर्सियों को भर देना तथा भोजन पैकेट लेकर या इवेंट आयोजकों से कुछ गिफ्ट (जो सभा में आये लोगों को देने के लिए जैसे बैग-थैले, बहुमूल्य पैकेट जिसमें पेनड्राइभ, स्मार्टफोन या काम की चीजें आदि) लेकर चल देना होता है।

इसका सबसे सुंदर उदाहरण देखने को मिला, हाल ही में आयोजित झारखण्ड माइनिंग शो के दौरान जब उद्घाटन समारोह के दौरान केन्द्रीय खनन मंत्री पीयूष गोयल का भाषण समाप्त हुआ तो लोग सभा स्थल से बाहर निकलने लगे, तभी पता चला कि अभी सीएम रघुवर दास का भाषण होने में करीब एक घंटे लगेंगे, कही सीएम के भाषण के पूर्व ही सभास्थल की कुर्सियां खाली न दिखाई पड़ने लगे। इस इवेंट में शामिल अधिकारियों ने एक चाल चली, सभी गेटों को ब्लॉक करा दिया और किसी को सभास्थल से बाहर नही जाने दिया, स्थिति ऐसी हो गई कि जिन्हें लघुशंका लगा था, वे भी बाहर नहीं जाने दिये गये, जब सीएम का भाषण खत्म हुआ तभी गेट पर तैनात अधिकारियों ने सभास्थल के अंदर रह रहे लोगों को बाहर जाने दिया।

यहीं हाल झारखण्ड माइनिंग शो के समापन समारोह के दौरान हुआ, खाली कुर्सियों को स्कूली बच्चों से भरा गया। इस दिन भी सारे गेट ब्लॉक कर दिये गये, ये इवेंट मैनेजमेंट नहीं तो क्या है?हाल ही में जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आये थे और उन्हें एक कार्यक्रम के तहत खूंटी जाना था, तब वहां भी ऐसी ही स्थिति थी, जहां कार्यक्रम था, जैसे ही राज्य सरकार और वहां के अधिकारियों को लगा की स्थानीय लोगों ने उक्त कार्यक्रम से दूरी बना ली है,  तब उन्होंने बस से लोगों को वहां लाकर भीड़ दिखाई।

ये सारे कार्यक्रम राज्य में अब इवेंट मैनेजमेंट की तरह हो रहे हैं, उपायुक्त का काम अब यहीं रह गया है कि सीएम के भाषण में भीड़ जुटाये और भीड़ जुटाने का उनके पास अब एक ही मार्ग बचा है, या तो सीएम के भाषण में स्कूली बच्चों को लगाया जाय, या जो लोग सरकार की विभिन्न योजनाओं में शामिल होकर उन योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, उन्हें सीएम के भाषण सुनने के लिए जबर्दस्ती लगाया जाये, क्योंकि सामान्य जनता जो रोजमर्रा की जिंदगी की चीजों को जुटाने में लगी है, उन्हें सीएम के भाषण से क्या मतलब?  ऐसे भी राज्य के सीएम कोई लालू प्रसाद यादव या नीतीश कुमार की तरह स्टार नेता थोड़े ही हैं, कि भीड़ उनको सुनने के लिए दौड़ती हुई चली जाये।

लोग तो कहते है कि इवेंट मैनेजमेंट बंद हो जाय, तो पता चलेगा कि सीएम रघुवर दास को सुनने के लिए सिर्फ और सिर्फ खाली कुर्सियां ही रह गई, क्योंकि तीन सालों के इस शासन काल में सीएम रघुवर दास ने ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे राज्य की आम जनता को लगे कि इन्होंने आम जनता के लिए कुछ किया, ये तो केवल अपने नेताओं, बड़े-बड़े अधिकारियों और उनके परिवारों और पूंजीपतियों की समृद्धि में लगे है, ऐसे में जिनके लिए उन्होंने किया, वे भाषण सुने, आम जनता को सीएम के भाषण से क्या मतलब?

Krishna Bihari Mishra

One thought on “इवेंट मैनेजमेंट की तरह होती हैं CM रघुवर की सभा, भीड़ जुटाने में उपायुक्तों को छुट रहे पसीने

  1. सर आपका लेख अतुलनीय एवं सूर्य के समान सत्य है।
    बस यही समझ में नहीं आ रहा कि झारखण्ड के मुख्यमंत्री किसे मुर्ख बना रहे हैं।
    हमें तो उनपर तरस आता है कि इतनी गरिमामयी पद पर आसीन होते हुए भी वे न तो अपनी गरिमा को बचा पा रहे हैं और न ही पद की गरिमा को समझ पा रहे हैं।
    मेरी तो कामना है कि ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि दें।

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