हेमंत के आरोपों का जवाब दें रघुवर सरकार, रांची के सभी अखबार भी अपनी स्थिति स्पष्ट करें

हेमंत सोरेन ने आज दावे के साथ कहा है कि एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के संपादक को एक खास समाचार छापने के कारण सरकार से धमकियां मिली। उन्हें कहा गया कि आपको साल में 12 करोड़ रुपये का विज्ञापन इसलिए नहीं दिया जाता कि आप सरकार के विरोध में खबरे छापें। लोकतंत्र के लिए इससे दुखद स्थिति नहीं हो सकती है कि अखबार एवं मीडिया को जनता का हथियार बनने के बदले शासक का कवच बनने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

हमारा मानना है कि अगर ये सच है, तो जिस अखबार को इस सरकार द्वारा धमकी दी गई, उसे इस बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहिए क्योंकि ये बहुत बड़ा मामला है, पर हमें नहीं लगता कि राज्य में ऐसा भी कोई अखबार हैं, जो सरकार के खिलाफ समाचार भी छापता है? यहां तो सारा सम्पादक एक पांव पर खड़ा होकर मुख्यमंत्री की स्तुति गाता रहता है। साष्टांग दंडवत् करता है। माननीय की पूजा अर्चना एवं परिक्रमा करता है।

जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रांची आते हैं तो उनसे गुरुमंत्र लेने के लिए, उनके साथ भोजन करने के लिए, उनके साथ सेल्फी लेने के लिए, इन संपादकों का दिल मचल उठता है, उसके प्रमाण सभी के पास मौजूद हैं, इसलिए हमें नहीं लगता है कि नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन की बातों में दम हैं, क्योंकि जहां का संपादक, अखबार का मालिक स्वयं सरकार के आगे नतमस्तक हो, उस सरकार को इन संपादकों को धमकी देने की क्या जरुरत है?

हेमन्त सोरेन के इस बात में दम हैं कि लालपुर रांची में एक छात्रा की हत्या हुई थी और जब छात्रा के पिता ने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई थी, तो मुख्यमंत्री के द्वारा उस दुखी पिता को बहुत ही गंदे तरीके से अपमानित और जलील किया गया था। हेमन्त सोरेन ने आज कहा कि अब गाली गलौज की भाषा को मुख्यमंत्री ने राजभाषा बना दिया है। राज्य का प्रशासन तंत्र ध्वस्त हो चुका है। इसके लिए पूर्ण रुप से मुख्यमंत्री जिम्मेवार है। उनका अमर्यादित आचरण, उनकी हताशा को दर्शाता है। संवैधानिक पद पर बैठे लोगों से मर्यादित आचरण की अपेक्षा की जाती है।

उन्होंने कहा कि राज्य में सर्कस का शो चल रहा है। सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर माइनिंग शो, अब थोड़े दिन बाद अडाणी शो प्रारंभ होगा। इसके पूर्व मेगा फूड पार्क का शो चल चुका है। ठीक इसी प्रकार अभी रैयतो को मुआवजा भी नहीं मिला, जमीन अधिग्रहण का काम भी नहीं शुरु हुआ, गोड्डा में शिलान्यास का ड्रामा भी देखने को मिलेगा।

उसके पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राजमहल बुलाया गया था, नतीजा क्या निकला? सरकार को मालूम है। अब गोड्डा में जो ड्रामा होगा, उसे भी सरकार देखेगी। बिना मुआवजा दिये, यदि रैयतों की जमीन पर शिलान्यास हुआ, तो फिर से गोड्डा के किसानों का खुन बहाकर जबरदस्ती जमीन लेने की पृष्ठभूमि तैयार होगी। बांगलादेश को बिजली देने के लिए सरकार झारखण्ड के किसानों पर गोली चलायेगी। सरकार को समझना चाहिए कि गरीब किसानों का खुन बहाकर लोकतंत्र में निवेश और व्यापार की पटकथा नहीं लिखी जाती है।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि हर रोज भाजपा के नेताओं की हत्या हो रही है। आम लोगों की तो बात ही छोड़ दीजिये, जिनका नाम अखबारों में नहीं छपता। लोगों को अनाज नहीं मिल रहा, भूख से लोग मर रहे हैं और सरकार सर्कस कर रही है। पूरे राज्य में लोकतंत्र को लाठीतंत्र में बदल दिया गया है, गाली-गलौज, बदतमीजी और भय, सरकार की भाषा हो गयी है।