Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

EC द्वारा मतदाताओं को जागरुक करने के उद्देश्य से चलाये गये अभियान पर पत्रकारों का कब्जा

बहुत सारे पत्रकार, उनके परिवार और इसे पेशे से जुड़े लोग प्रथम मतदाता का सर्टिफिकेट लेकर इतरा रहे हैं, और उसके साथ फोटो खींचाकर फेसबुक पर डाल रहे हैं, शायद वे नहीं जान रहे कि उन्होंने मतदाताओं का हक छीना है। इस बार पहली बार, राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं में जागरुकता लाने के लिए यह सुंदर प्रयास प्रारंभ किया था, ताकि वह आम मतदाता, जो अपने वोट देने के अधिकार को, उसके महत्व को नहीं समझता,

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अपनी बात

अपने जमीर को बेचियेगा और कहियेगा कि हमारा शहर गंदा है, यह ठीक नहीं

आप युवा है न। मतदाता है न। …और जब मतदान का समय आयेगा, या किसी दल के लिए आपको पोलिंग एजेंट बनने की बात आयेगी या उसके प्रचार-प्रसार में उतरने की बात आयेगी, तो आप उक्त दल या प्रत्याशी से खुलकर एक दिन के हिसाब से दो हजार रुपये का डिमांड करेंगे, बिना दो हजार का नोट लिये आप टस से मस नहीं होंगे और चुनाव संपन्न हो जाने के बाद, जब उक्त दल या प्रत्याशी जीत जायेगा

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राजनीति

नगर निकाय चुनाव में आसन्न हार से घबराई भाजपा पूनम ढिल्लो की शरण में

नगर निकाय चुनाव में आसन्न हार से घबराई भाजपा आज सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री पूनम ढिल्लो की शरण में चली गई, और नगर निकाय चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़ दिया। पूनम ढिल्लो के शरण में जाने से यह भी स्पष्ट हो गया कि भाजपा के पास राज्य में कोई ऐसा नेता नहीं है, जो जनता को अपनी ओर आकर्षित कर, उनके आशीर्वाद को वोट में बदल दें।

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अपनी बात

सतुआनी यानी बचपन में “टुइयां” खरीदने और  “नाच बगइचां” जाने की जिद करने का दिन

पटना से 12 किलोमीटर की दूरी पर है – दानापुर कैंट। दानापुर कैंट से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर पर है – नासिरीगंज। ऐसे यह नासिरीगंज, दानापुर कैंट और गांधी मैदान पटना मार्ग पर पड़ता हैं। इसी नासिरीगंज इलाके करीब 40 वर्ष पूर्व तक एक बहुत बड़ा खुला खेत हुआ करता था, जिसे लोग “नाच बगइचां” कहा करते थे। ये “नाच बगइचां” कैसे नाम पड़ा? मैं नहीं जानता और न ही किसी बाग-बगइचां को नाचते देखा, पर चूंकि नाम था – “नाच बगइचां”

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अपनी बात

एक ब्राह्मण ने जमशेदपुर साकची में स्थित अम्बेदकर प्रतिमा को अपने हाथों से साफ किया

आम तौर पर विभिन्न दलित तथा विभिन्न तथाकथित स्वयंसेवी संगठनों, पिछड़ों तथा अतिपिछड़ों के नाम पर राजनीति करनेवाले विभिन्न संगठनों और उनके नेताओं की ये धारणा रहती है कि ब्राह्मण वर्ग दलितों को सम्मान नहीं देता अथवा उनके महापुरुषों को सम्मान नहीं करता, पर सच्चाई देखा जाय, तो इस तरह का भेदभाव अब आधुनिक समाज में नहीं देखने को मिलता।

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अपनी बात

घोर आश्चर्य? जिसे उपवास का मतलब नहीं मालूम, वो उपवास पर लेक्चर दिये जा रहा है

आजकल दो उपवासों का चर्चा पूरे भारतीय समाज में खूब उछाला जा रहा हैं। एक कांग्रेस का दलितों के नाम पर कुछ दिन पहले हुआ उपवास और दूसरा संसद नहीं चलने देने को लेकर भाजपा का उपवास। आश्चर्य इस बात की है, जिन्हें उपवास का अर्थ नहीं मालूम, वे भी आजकल धर्माचार्य बनकर खूब दिये जा रहे है, फेसबुक, व्हाट्सएप तो ऐसे धर्माचार्यों से भरे पड़े है। पूरा समाज जिनको धर्म की एबीसीडी नहीं मालूम,

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राजनीति

मेयर में झामुमो की वर्षा गाड़ी, डिप्टी-मेयर में कांग्रेस के राजेश लोकप्रियता में सबसे आगे

रांची नगर निगम पर सभी राजनीतिक दल अपना कब्जा जमाना चाहते हैं। पूर्व में देखा जाय, तो यहां अघोषित रुप से भाजपा का ही कब्जा था, क्योंकि मेयर और डिप्टी मेयर दोनों भारतीय जनता पार्टी से ही आते थे, तथा उनका झुकाव शुरु से लेकर अंत तक भाजपा के प्रति रहा, जो इस बार स्पष्ट रुप से परिलक्षित हुआ, जब भाजपा ने इन्हीं दोनों को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।

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अपराध

अफसाना के शव मिलने के पांच दिन बाद CM रघुवर के IPRD ने लापता होने का विज्ञापन निकाला

सीएम रघुवर दास के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग का कमाल देखिये। जिस लड़की की पांच दिन पहले शव मिल चुकी है, जिसका पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक आ चुका है, जिस अफसाना परवीन के शव को उसके परिवार वाले पहचान चुके हैं, उस अफसाना परवीन का आज लापता होने तथा उसकी सूचना शीघ्र विज्ञापन में छपे पुलिस अधिकारियों को देने का, विज्ञापन प्रकाशित कर रही है।विज्ञापन संख्या है – पीआर 182536 पुलिस (18-19) (D)।

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अपनी बात

घायल “प्रेम” मदद की गुहार लगाता रहा और लोग उसे देखते और चल देते, तभी…

दिनांक – 11 अप्रैल 2018, रात्रि 11.30 बजे, स्थान – एसएसपी आवास के आसपास। प्रेम कराह रहा था, प्रेम मदद मांग रहा था, लोग उसे देखते और आगे बढ़ जाते। कई गाड़ियां रुकी, पर किसी ने उसकी मदद करने के लिए हाथ नहीं बढ़ाया। प्रेम कराह रहा था, प्रेम दुर्घटना का शिकार था। किसी ने उसकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी थी. जिसके कारण उसके दोनों पांव टूट चुके थे।

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राजनीति

नगर निकाय चुनाव में JMM ने BJP की मुश्किलें बढ़ाई, जनता बदलाव के मूड में

झारखण्ड में हो रहे नगर निकाय चुनाव ने भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है। पहली बार दलीय आधार पर हो रहे चुनाव में भाजपा शिकस्त खाना नहीं चाहती। वह ज्यादा से ज्यादा नगर निकायों पर अपना कब्जा जमाना चाहती है, इसलिए नगर निकाय चुनाव, नगर निकाय का चुनाव न होकर लोकसभा-विधानसभा चुनाव की तरह भाजपा लड़ रही हैं, भाजपा ने अपने सारे मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को इसमें झोंक दिया है

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