Author: Krishna Bihari Mishra

राजनीति

सुरक्षा मामलों में दोहरा मापदंड अपनाना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन – झामुमो

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 के अवसर पर आदर्श आचार सहिंता के अनुपालन में दिये गये निर्देशानुसार सुरक्षा वाहनों को ईंधन आपूर्ति रोक दी गई है। प्रसंगाधीन पत्र में यह भी उल्लेखित है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं उपराष्ट्रपति को ही सिर्फ इससे मुक्त रखा गया है, परन्तु यह भी ज्ञात है कि राज्य के मुख्यमंत्री के सुरक्षा-वाहनों में ईंधन आपूर्ति की जा रही है।

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अपराध

शर्मनाक, राज्य के भाजपाई मंत्री का हाल देखिये, महिलाओं का भी सम्मान नहीं करते, उन पर हाथ छोड़ देते हैं

राज्य के कृषि मंत्री रणधीर कुमार सिंह का विवादों से गहरा नाता रहा है, वे हमेशा सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसी-ऐसी हरकतें करते हैं,  जिसकी सर्वत्र आलोचना व भर्त्सना होती है, आश्चर्य है ऐसे मंत्री पर इसका कोई असर नहीं पड़ता, वे नई-नई हरकत करने बे बाज नहीं आते। कभी उन्होंने सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज को भी अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी,

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अपनी बात

भाई, अब तो अन्नपूर्णा को नई जगह और भाजपा को नया नेता मिल गया, फिर भी इनके मुंह क्यों लटके हैं?

भाई एक वक्त था, जब झारखण्ड नहीं बना था, एक बिहार था, जिसमें झारखण्ड भी समाया हुआ था। लालू प्रसाद यादव पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हुए, और देखते ही देखते वे पूरे देश में अपने आचरण व व्यवहार से छा गये। जो भी गरीब, चाहे वह किसी भी जाति का क्यों न हो? उन्हें देखता तो अपनी छाती फुला लेता, उसे लगता कि उसके घर का नेता पहली बार सत्ता में आया हैं,

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अपनी बात

महागठबंधन से घबराई BJP अन्नपूर्णा के शरण में, भूपेन्द्र की रणनीति भविष्य में पड़ सकती है BJP के लिए भारी

महागठबंधन ने भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं की नींद उड़ा दी है, हड़बड़ाहट में उनके द्वारा लिये जा रहे निर्णय बता रहे हैं कि वे कितने अंदर से घबराए हुए हैं। स्वयं को चारित्रिक रुप से पुष्ट बतानेवाली भाजपा अब राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी के शरण में चली गई तथा उनसे कोडरमा लोकसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ने का अनुरोध किया,

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राजनीति

राहुल बड़े और हेमन्त छोटे भाई, बाबू लाल के साथ मिल सभी ने लिया संकल्प भाजपा को करेंगे शून्य पर आउट

आज एक बार फिर महागठबंधन के सभी नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के आवास पर जुटे, सभी आत्मविश्वास से लवरेज थे, और सभी का लक्ष्य एक ही था कि भाजपा को केन्द्र और राज्य दोनों से विदाई कर देनी है, आज सभी ने एक स्वर से कहा कि महागठबंधन अपने स्वरुप में आ चुका है, कांग्रेस झारखण्ड की सात सीटों पर, झामुमो चार सीटों पर, झाविमो दो सीटों पर, तथा राजद एक सीट पर चुनाव लड़ेगी।

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अपनी बात

पहले BJP को खूब गरियाएं, फिर उस में शामिल हो, संघ-भाजपा नेताओं के पांव छूकर टिकट ले, चुनाव जीते

अब भाजपा नीति व सिद्धांत की सिर्फ बात करती है, उस पर चलती नहीं। एक समय था जब भाजपा नीति व सिद्धांतों के लिए ही जानी जाती थी, उसके विरोधी भी इस बात के कायल रहते थे, भाजपा कार्यकर्ताओं की भाजपा में पूछ भी हुआ करती थी, बड़े भाजपा नेता अगर किसी शहर में जाते तो वे बड़े होटलों में ठहरने की अपेक्षा भाजपा कार्यकर्ता के घर पर समय गुजारना ज्यादा पसन्द करते,

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राजनीति

मोदी-शाह के कट्टर विरोधी को फिल्म कौंसिल का अध्यक्ष बनाये जाने पर भाजपा कार्यकर्ता गुस्से में

झारखण्ड में मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा इस बार सातवे आसमान पर पहुंच गया है, हालांकि लोकसभा चुनाव को देखते हुए, ये भाजपा कार्यकर्ता फिलहाल सीएम रघुवर के खिलाफ कुछ भी खुलकर बोलने से बच रहे हैं, पर इन्होंने संकल्प कर लिया है कि विधानसभा चुनाव जब भी कभी होंगे, वे खुलकर सीएम रघुवर दास का विरोध करेंगे। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार सीएम रघुवर दास ने सारी सीमाएं लांघ दी है,

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अपनी बात

कमाल हो गया, आडवाणी के लिए वे भी रो रहे हैं, जो कल तक उन्हें बिना गालियां दिये सोते तक नहीं थे

भाजपा या वर्तमान राजनीतिक दलों में किसकी हिम्मत है कि स्वयं को लालकृष्ण आडवाणी के सामने खड़ा होने का दुस्साहस

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अपनी बात

आखिर भाजपा विरोधी गोलबंदी की हवा कौन निकाल रहा है? कांग्रेस, JVM, JMM या वामपंथी पार्टियां

कुछ दिन पहले तक ऐसा प्रतीत हो रहा था कि झारखण्ड में भाजपा सरकार के खिलाफ जो नाराजगी है, कहीं लोकसभा चुनाव में उन्हें खाता खोलने में भी न मुश्किल हो जाये। विपक्षी पार्टियों की लामबंदी जिसमे कांग्रेस से वामपंथी सभी एक साथ दिख रहे थे, महागठबंधन का यह स्वरूप भाजपा विरोधी जमात की बड़ी एकता दिखाई पड़ती थी। भाजपा के लिए इस महागठबंधन की एका को भेदना मुश्किल था।

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अपनी बात

झारखण्ड सिविल सोसाइटी ने लोगों को सावधान किया -‘बच के रहना झारखण्डवालों, अपने चौकीदारों से’

ये पंक्तियां राज्य की जनता के दर्द को बयां करती हैं। कोई भी कविताएं ऐसे ही जुबां पर नहीं आ जाती, वह तभी आती है, जब दर्द बर्दाश्त के बाहर हो, जरा देखिये राज्य के क्या हालात कर दिये हैं, राज्य की रघुवर सरकार ने? अगर झारखण्ड सिविल सोसाइटी ने राज्य की जनता से यह कह दिया कि बच के रहना झारखण्डवालों, अपने चौकीदारों से, तो ये गलत थोड़े ही हैं।

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