Author: Krishna Bihari Mishra

राजनीति

देशद्रोहियों की मदद करना भी देशद्रोह, हम पर भी मुकदमा दर्ज करें रघुवर सरकार

रांची स्थित बिहार क्लब के प्रांगण में राज्य के विभिन्न जनसंगठनों तथा सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने एक आवश्यक बैठक कर, राज्य सरकार द्वारा 20 जननेताओं पर लगाए गए देशद्रोह के मुकदमें की तीखी आलोचना की तथा संयुक्त स्वर में कहा कि राज्य सरकार इन सारे लोगों से अविलम्ब देशद्रोह का मुकदमा वापस लें।

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अपनी बात

आखिर झारखण्ड में भरे-पड़े ब्रजेश ठाकुर जैसे लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

ऐसा नहीं कि ब्रजेश ठाकुर सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही रहता हैं, ब्रजेश ठाकुर जैसे लोग देश के हर कोने-कोने में फैले हैं और अपनी सुविधानुसार अपने अखबारों के हित में नये-नये जाल फैलाकर, अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। आशंका हैं, ऐसा ही जाल रांची में भी फैला हो, क्योंकि पत्रकार जगत में चर्चा है कि रांची में भी आपको ब्रजेश ठाकुर टाइप लोग मिल जायेंगे,

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अपनी बात

अरे भाइयों, इन चालाक लोगों के लिए क्यों आंसू बहाते हो, अगर आंसू बहाना ही हैं तो…

अरे इनके लिए क्यों रोते हो, क्यों आंसू बहाते हो, इतना दर्द क्यों छलकाते हो, अगर तुम इनके लिए नहीं भी रोओगे, नहीं आंसू बहाओगे या दर्द नहीं छलकाओगे तो ऐसा नहीं कि देश बर्बाद हो जायेगा या ये बर्बाद हो जायेंगे, ये तो आज एबीपी में हैं, कल उछलकर किसी दूसरे जगह चले जायेंगे, ये जाते भी रहे हैं, ऐसा करते भी रहे हैं, इसलिए नहीं कि इन्हें देश से प्यार था,

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अपनी बात

क्या DGP के मुख से किसी के खिलाफ छह इंच छोटा करने का बयान शोभा देता है?

पता नहीं, विकास को कौन रोक रहा है, या रोक रहा है भी या नहीं, पर विकास को रोकनेवालों के नाम, संविधान को चुनौती देनेवालों के नाम, आपने जिन्हें छह इंच छोटा करने का बयान जो जारी किया, डीजीपी डी के पांडेय महोदय, ये बयान बताता है कि आप भी अब नक्सली की जुबां बोलने लगे हैं, क्योंकि हमने सुना है कि वे भी इसी प्रकार का बयान देते हैं,

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राजनीति

वामदलों के बिहार बंद का जनता ने किया समर्थन, बंद असरदार, SC ने लिया संज्ञान

वामदलों ने मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में नाबालिग लड़कियों के साथ हुए दुष्कर्म एवं इस मामले में मंत्री के इस्तीफे और उसके पति की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बिहार बंद बुलाया, बिहार के कई इलाकों में यह बंद असरदार रहा, जबकि कई इलाकों में बंद का मिला-जुला असर दिखाई पड़ा, इस बंद को राज्य के सभी विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था,

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अपनी बात

शर्मनाक, एक पत्रकार, बिहारियों पर ऐसा दाग लगाया कि ये दाग कभी धूलनेवाला नहीं

जब से मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी नमक का दारोगा के अलोपीदीन ज्ञानचक्षु खुलने के बाद, ईमानदार वंशीधर के घर जाना छोड़ दिये, तभी से हमारे समाज में ब्रजेश ठाकुर जैसे दैत्यों का बोलबाला और उनका जाल इस कदर फैला कि वह दैत्य हाथों में हथकड़ी पहनने तथा जेल जाने के बाद भी न तो उसने अपना मुंह छुपाया, बल्कि अट्टहास करता हुआ, फोटो खिंचवाते हुए जेल की ओर चल पड़ा।

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अपनी बात

पूरे झारखण्ड में आदिवासी जनसंगठनों का “अखबार बहिष्कार आंदोलन” प्रारम्भ

पूरे झारखण्ड में आदिवासी जनसंगठनों का आज से “अखबार बहिष्कार आंदोलन” प्रारम्भ हो गया हैं, आदिवासी जनसंगठनों ने जिन अखबारों के बहिष्कार का निर्णय लिया हैं, उनके नाम हैं – प्रभात खबर, दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण। इन अखबारों पर आरोप हैं कि ये आदिवासी विरोधी समाचारों को प्रमुखता देते हैं, तथा सीएम रघुवर भक्ति में लीन हैं,

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अपराध

CM ने दिये CID जांच के आदेश, क्या आरोपी सफेदपोश और पुलिस अधिकारी नपेंगे?

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बहुचर्चित मानगो रेप केस के सीआइडी जांच के आदेश दिये हैं, तथा एक महीने के अंदर इसकी जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है, हालांकि दुष्कर्म की पीड़िता इस मामले की सीबीआई जांच चाहती है, हम आपको बताते चलें कि इस कांड में समाज के कई संभ्रांत लोग एवं पुलिस पदाधिकारी भी शामिल है।

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अपनी बात

वाह मरांडी जी, आपने पोते के साथ धान-रोपनी कर युवाओं को एक अच्छा संदेश दिया

अच्छा लगा, जब हमने देखा कि झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में झारखण्ड विकास मोर्चा के अध्यक्ष बाबू लाल मरांडी अपने पोते के साथ, अपने गांव में धान की रोपनी में लगे हैं। मैं चाहता हूं कि देश का हर नेता कृषि कार्यों को प्रमुखता दें, यहीं नहीं, बल्कि अन्य समाजोपयोगी कार्यों को भी प्रमुखता से अपने जीवन में उतारें, ताकि इसका प्रभाव आम जन-जीवन पर पड़े, क्योंकि इससे लोग समझेंगे,

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अपनी बात

पहले हजारीबाग और अब रांची, आखिर आपके कानों पर जूं कब रेंगेगा? सीएम साहब

अभी कोई ज्यादा दिन नहीं हुए कि आर्थिक तंगी के कारण, हजारीबाग से एक खबर आई कि एक समृद्ध व्यवसायी के यहां छः लोगों की मौत हो गई। ठीक इसी प्रकार से अब रांची में कल ये खबर सुनने को मिली की आर्थिक तंगी के कारण परिवार के पांच लोगों को मारकर दो भाई फांसी के फंदे से झूल गये। हजारीबाग और रांची की घटना को अगर नजदीक से देखे तो दोनों मामला एक सा ही हैं,

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