‘पूर्वोदय’ की बात छोड़ ‘हिन्दुस्तान’, तू सिर्फ इतना बता कि इस कार्यक्रम के लिए ‘रघुवर सरकार’ से कितने पैसे लिये?
जब – जब किसी भी राज्य में चुनाव आता है, आप देखेंगे कि बड़े-बड़े अखबार और चैनलों की लॉटरी निकल आती हैं। संपादकों और इनके यहां काम कर रहे छुटभैये पत्रकारों की मौज शुरु हो जाती हैं, और ये अपनी मौज तथा आर्थिक सेहत को ठीक करने के लिए बड़े-बड़े कॉनक्लेव-विशेष चर्चा आदि शुरु कर देते है, अब चूंकि झारखण्ड में भी विधानसभा चुनाव होने है, तो जितने भी देश के बड़े-बड़े अखबार व चैनल हैं,
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