‘पूर्वोदय’ की बात छोड़ ‘हिन्दुस्तान’, तू सिर्फ इतना बता कि इस कार्यक्रम के लिए ‘रघुवर सरकार’ से कितने पैसे लिये?

जब – जब किसी भी राज्य में चुनाव आता है, आप देखेंगे कि बड़े-बड़े अखबार और चैनलों की लॉटरी निकल आती हैं। संपादकों और इनके यहां काम कर रहे छुटभैये पत्रकारों की मौज शुरु हो जाती हैं, और ये अपनी मौज तथा आर्थिक सेहत को ठीक करने के लिए बड़े-बड़े कॉनक्लेव-विशेष चर्चा आदि शुरु कर देते है, अब चूंकि झारखण्ड में भी विधानसभा चुनाव होने है, तो जितने भी देश के बड़े-बड़े अखबार व चैनल हैं,

जब जब किसी भी राज्य में चुनाव आता है, आप देखेंगे कि बड़ेबड़े अखबार और चैनलों की लॉटरी निकल आती हैं। संपादकों और इनके यहां काम कर रहे छुटभैये पत्रकारों की मौज शुरु हो जाती हैं, और ये अपनी मौज तथा आर्थिक सेहत को ठीक करने के लिए बड़ेबड़े कॉनक्लेवविशेष चर्चा आदि शुरु कर देते है, अब चूंकि झारखण्ड में भी विधानसभा चुनाव होने है, तो जितने भी देश के बड़ेबड़े अखबार चैनल हैं, उन्होंने अपने ढंग से सरकार को दुहना शुरु कर दिया है, और सरकार भी दुधारु गाय की तरह खुद को दुहवाने के लिए तैयार है।

साथ ही सहजीविता के आधार पर अखबारचैनल और सरकार एक दुसरे को संजीवनी देने का काम करते हैं, यानी लेदे संस्कृति के अनुसार अखबारचैनल वाले सरकार की झूठी जयजय करते हैं और सरकार उनके लिए विशेष व्यवस्था करती है, जैसे होटलों में रहने की व्यवस्था से लेकर उनके सारे शौक तथा अलग से आर्थिक व्यवस्था भी कर देती है, ताकि वे जब तक जीवित रहे, उनके इस आवभगत को याद रखें, और ये इसके लिए अपने जमीर को दांव पर लगा देते हैं। 

हालांकि कॉनक्लेव कहने के लिए तो जनता की बात होती है, पर इसमें जनता नहीं होती, इसमें उच्च कोटि के भ्रष्ट नेता, भ्रष्ट अधिकारी तथा उनके पीछेपीछे चलनेवाले छुटभैये नेताओं का दल तथा व्यापारियों का समूह होता है, जिनका स्वार्थ सरकार और ऐसे घटिया स्तर के अखबारोंचैनलों के मालिकों संपादकों से जुड़ा रहता है, अब जरा देखिये आपने हिन्दुस्तान के पूर्वोदय का नाम सुना ही होगा, 18 सितम्बर 2019 को रांची से प्रकाशित इस अखबार हिन्दुस्तान ने पूर्वोदय नामक कार्यक्रम आयोजित किया।

नाम तो पूर्वोदय था, पर सच्चाई यही है कि इन लोगों ने अपना आर्थिक उदय किया और इसमें मुख्य भूमिका रघुवर सरकार ने निभाई। चूंकि राज्य में विधानसभा चुनाव है, इसलिए इसे देखते हुए सरकार की चमचई के लिए पूर्वोदय कार्यक्रम आयोजित किया गया और इसमें उन सारे लोगों को बुलाया गया जो शोपीस थे। दूसरे दिन यानी 19 सितम्बर 2019 को इस हिन्दुस्तान ने इसे लेकर पांच पृष्ठ दे दिये, पर इन पांच पृष्ठों से किसका भला हुआ? इसका कौन जवाब देगा, सरकार या अखबार?

कमाल है, अरे आपने इसी तरह का पूर्वोदय तो रांची में पिछले साल 8 अक्टूबर 2018 को कराया था, जब छतीसगढ़ में विधानसभा का चुनाव था और आपके इस कार्यक्रम का उस वक्त प्रायोजक था झारखण्ड सरकार और सह प्रायोजक थी छत्तीसगढ़ शासन। जो लोग जानते है, उन्हें पता  होगा कि छतीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के लिए पहले चरण का मतदान 12 नवम्बर 2018 और दूसरे चरण का मतदान 20 नवम्बर 2018 को संपन्न हुआ था और 11 दिसम्बर 2018 को वोट की गिनती हुई थी।

दिमाग पर अगर जोर डाले, उस वक्त भी मकसद था कि चूंकि भाजपा शासित राज्य छतीसगढ़ में चुनाव हो रहा है, उसका फायदा दोनों स्टेटों से लिया जाये और हिन्दुस्तान अखबार ने लिया भी। अब सवाल उठता है कि जब आपने 8 अक्टूबर 2018 को भी पूर्वोदय कार्यक्रम आयोजित किया था, तो अब तो साल होने जा रहे हैं, कौन सा पूर्वोदय हो गया, कौन सा झारखण्ड आगे निकल गया?

हां, हिन्दुस्तान वाले, एबीपी वाले आपने तो भाजपा शासित राज्यों से जनता की गाढ़ी कमाई की राशि अपने हाथों से लूट ली, वह भी पूर्वोदय के नाम पर।  क्या आप जनता को इतना मूर्ख समझते हैं, क्या जनता नहीं जानती कि नाम पूर्वोदय है और काम है इसके आड़ में अखबार के संपादकों/मालिकों छुटभैये लोगों का आर्थिक संवर्द्धन। हद कर दी है इन लोगों ने। जनता को चाहिए कि ऐसे धूर्त लोगों का विरोध करें, नहीं तो ये पूर्वोदय के नाम पर लूट का सिलसिला जारी रखेंगे।

Krishna Bihari Mishra

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