प्रयागराज का कुम्भ मेला यानी भारत को देखने का एक अलग नजरिया, एक संन्यासी के शब्दों में, पार्ट-2
संन्यासी बोले जा रहे थे, सभी के साथ मैं भी बड़े भाव से सुनता जा रहा था, उनका बोलना, बोलने की तारतम्यता, सभी श्रोताओं को बांधे हुए था, सभी को बड़ा आनन्द आ रहा था, ऐसे भी कुम्भ मेला है ही ऐसा, कि जब उसके बारे में कोई कुछ कहना चाहे, तो लोग सुनना पसन्द ही करते हैं, और जब मंजा हुआ संन्यासी इस पर कुछ कहें तो उसका आनन्द कुछ और ही बढ़ जाता है।
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