PM मोदी को तेज बहादुर की चुनौती, कहा – वाराणसी में लड़ाई असली और नकली चौकीदार के बीच

सीमा सुरक्षा बल के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का निश्चय कर लिया है। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती देंगे। उनकी बातों से पता चलता है कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से ज्यादा नाराज है। नाराजगी का कारण भी स्पष्ट है, वे साफ कहते है कि 2014 में जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे, तब उन्होंने कहा था कि “न मैं खाऊँगा और न खाने दूंगा।”

सीमा सुरक्षा बल के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का निश्चय कर लिया है। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती देंगे। उनकी बातों से पता चलता है कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से ज्यादा नाराज है। नाराजगी का कारण भी स्पष्ट है, वे साफ कहते है कि 2014 में जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे, तब उन्होंने कहा था कि “न मैं खाऊँगा और न खाने दूंगा।” और जैसे ही हमने जनवरी 2017 में खाने का विडियो वायरल किया, उलटे हमें ही नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। आखिर ये क्या है? क्या गलत का विरोध करना अनुशासनहीनता है? क्या भ्रष्टाचार का विरोध करना अनुशासनहीनता है?

तेज बहादुर यादव साफ कहते हैं कि वे तो पीएम नरेन्द्र मोदी के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का एक हिस्सा बनना चाहते थे, खुद पीएम मोदी ने वह विडियो तीन बार देखी थी, गृह मंत्री ने भी देखा, जबकि वे अच्छी तरह जानते थे कि मैं सही हूं, और फिर भी मुझे ही सजा दे दी गई। उनके साथी पंकज मिश्रा को भी बर्खास्त कर दिया गया। तेज बहादुर यादव का कहना है कि उन्होंने न्याय पाने के लिए क्या नहीं किया, धरना दिया, प्रदर्शन किया, पर किसी ने उनकी आवाज नहीं सुनी, तब हमने निश्चय किया कि हम संसद में जायेंगे और वहां अपनी आवाज रखेंगे, क्योंकि ऐसे तो कोई उनकी आवाज सुनने से रहा।

तेज बहादुर यादव का कहना था कि पीएम मोदी बहुत बड़े-बड़े वादे करते हैं, उन्होंने कहा था कि एनपीएस खत्म कर, ओपीएस लायेंगे, जरा बताइये, 2019 का चुनाव आ गया, कहां गया उनका ओपीएस लाने का वादा? लोग कहते है कि पुलवामा में जो जवान मरे, वे शहीद हो गये, जबकि सच्चाई यह है कि उन्हें कभी शहीद का दर्जा दिया ही नहीं गया, क्योंकि शहीद का दर्जा संविधान देता है, और ऐसा संविधान में उल्लेखित नहीं, तो फिर शहीद-शहीद बोलकर, उन मरे जवानों को माखौल क्यो उड़ाया जा रहा?

उन्होंने कहा कि ये भाजपा वाले और अन्य दल बड़ा जवान-जवान किया करते हैं, जवानों को सम्मान देने की बात करते हैं, लीजिये आपका जवान आपके सामने चुनाव लड़ने के लिए खड़ा है, करिये सम्मान जिताइये उसे, तब न जाने कि आप कितने जवानों का सम्मान करते हैं। तेज बहादुर यादव कहते है कि उन्हें अब तक आम आदमी पार्टी और ओम प्रकाश राजभर ने सहयोग करने की बात कही है, जबकि अन्य पार्टियों से भी वे सम्पर्क में हैं कि वे हमें सहयोग करें, देखते है कितनी पार्टियां हमें सहयोग करती है। तेज बहादुर यादव यह भी कहते है कि उनके साथ दो-तीन जवान और हैं, जो चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं, चूंकि उनके पास नौमिनेशन तक के पैसे नहीं हैं, इसलिए थोड़ा वित्तीय संकट हैं।

ये पूछे जाने पर कि आप मोदी के खिलाफ नोमिनेशन कब करेंगे, वे कहते है कि जिस दिन वे नोमिनेशन करेंगे, ठीक उसके एक दिन पहले या बाद में करेंगे, क्योंकि वे जब नोमिनेशन करेंगे, तो उनके साथ तो लाव-लश्कर होता है, हम जवानों के पास वैसा लाव-लश्कर कहां होगा? फिर भी जनता का प्यार तो मिल रहा हैं, अगर नहीं मिलता तो यहां तक कैसे पहुंचते?

तेज बहादुर यादव साफ कहते है कि पीएम नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री खूब कहते है कि मैंने सेना के लिए, जवानों के लिए खूब काम किये, जबकि सच्चाई यह है कि ऐसा उन्होंने कुछ नहीं किया, वे झूठ बोलते है कि वे चौकीदार है, असली चौकीदार तो हम हैं, जो 21 सालों तक देश की सीमाओं की चौकसी की हैं, यहां तो लड़ाई असली और नकली चौकीदार के बीच है।

तेज बहादुर यादव ने यह भी कहा कि जो लोग सेना को मोदी सेना के नाम से पुकारते हैं, ऐसे लोगों के खिलाफ तो देशद्रोह का मुकदमा होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने ऐसा कहकर सेना का अपमान किया है, सेना देश की है, भारत की है, न कि किसी व्यक्ति विशेष की। उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी हो सेना के नाम पर राजनीति बंद होनी चाहिए, सेना को बदनाम करने का कुकृत्य बंद होना चाहिए।

तेज बहादुर यादव कहते है कि वाराणसी की लड़ाई, सच और झूठ की लड़ाई है, हम राजनीति करने नहीं आये हैं, हम तो अपनी न्याय की लड़ाई लड़ने आये हैं। हम तो 21 साल नौकरी किये तो वर्दी पहने हैं, उन्हें तो वर्दी पहनने का अधिकार भी नही, फिर भी वे कभी कभार वर्दी पहनकर सेना को सम्मान देने का ढोंग खूब करते हैं।

Krishna Bihari Mishra

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